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अलर्ट : देश के 777 रक्षा ठिकानों पर तौनात होगी एंटी ड्रोन प्रणाली, काम शुरू

Fri, 02 Jul 2021 12:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Jul 2021 12:35 AM IST
सार

  • जम्मू में वायुसेना स्टेशन पर एंटी ड्रोन तकनीक प्रणाली लगाई गई, मार गिराने वाले हथियार भी लगाए
  • दो साल पहले बीएसएफ ने तैयार की थी एंटी ड्रोन रिपोर्ट, गृह मंत्रालय नए सिरे से कर रहा अध्ययन
  •  जम्मू की घटना को सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीरता से लिया, सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए जा रहे: उप राज्यपाल

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Anti-drone system to be installed at more than 700 sensitive locations in the country
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विस्तार

देशभर के 777 संवेदनशील ठिकानों की पहचान कर एंटी ड्रोन प्रणाली लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं, जम्मू में वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन से हुए आतंकी हमले के पांच दिन बाद वहां एंटी ड्रोन तकनीक प्रणाली लगा भी दी गई है। फिलहाल, यह प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने लगाई है, जो हमले के बाद से वहां पर लगातार डटी हुई है।

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वहीं, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू की घटना को काफी गंभीरता से लिया है। सभी सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस प्रकार के खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई ड्रोन देखे गए हैं। बीएसएफ ने इस प्रकार के एक ड्रोन को हाल ही मार गिराया है। पुलिस ने इस प्रकार के प्रयासों को नाकाम बनाया है। 
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उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जम्मू वायुसेना स्टेशन पर रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्टर और सॉफ्ट जैमर के साथ ड्रोन को मार गिराने वाले हथियार भी लगाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा दो साल पहले तैयार किए गए एंटी ड्रोन रिपोर्ट का नए सिरे से अध्ययन कर रहा है। इसके तहत 777 अहम ठिकानों की पहचान की गई है। फिलहाल, ड्रोन की इस नई चुनौती के लिए कई एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं।
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इसमें ड्रोन के जैमर और एंटी ड्रोन गन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पहली बार जम्मू में हुए ऐसे हमले के बाद रतनचक-कालूचक सैन्य ठिकानों समेत कई जगहों पर ड्रोन दिखे, जिसे सतर्क सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया। शुरुआती जांच से मुताबिक ये ड्रोन पास के सीमापार से भेजे जा रहे हैं। इस नए खतरे की गंभीरता समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ बैठक कर देश की ड्रोन नीति को मजबूत करने और ठोस उपाय निकालने का फैसला लिया।

देश में बिना नियम कानून के उड़ रहे सात लाख ड्रोन
 सूत्रों के मुताबिक, देश में करीब सात लाख अलग-अलग तरीके के ड्रोन हैं, जो किसी नियम के तहत संचालित नहीं होते। ड्रोन की निगरानी से जुड़ी एक बड़ी समस्या यह है कि कम ऊंचाई पर उड़ने वाले उन्नत तकनीक वाले ड्रोन रडार की जद में नहीं आ पाते।


75 प्री प्रोग्राम ड्रोन पर किया परीक्षण, निकाली जा रही काट
इस बीच सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने एक वर्चुअल कार्यक्रम में बताया है कि सेना ने अपने ठिकानों पर हमला करने वाले 75 प्री-प्रोग्राम ड्रोन के साथ परीक्षण किया है और इन ड्रोन की काट तैयार की जा रही है। ड्रोन की विभिन्न तकनीक ने भविष्य की जंग के मद्देनजर कई नए आयाम पैदा कर दिए हैं। मुसीबत यह है कि यह सरकार के साथ गैर सरकारी लोगों के हाथ में भी पहुंच गया है। लिहाजा इस तकनीक के हरेक पहलू को अपनी योजना में शामिल करना होगा।

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