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जेके बैंक में 350 करोड़ कर्ज घोटाले का एक और मामला, एसीबी ने बंगलूरू में मारा छापा, मुकदमा दर्ज
Sat, 17 Aug 2019 12:54 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 17 Aug 2019 12:54 AM IST
सार
- मिलीभगत कर 2012 से 2015 तक लोन की लिमिट बढ़ाई गई
- आरोपी ने गिरवी संपत्ति पर दो और बैंकों से 41 करोड़ का कर्ज लिया
- एसीबी ने जब्त किए दस्तावेज, मुकदमा दर्ज
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जम्मू-कश्मीर बैंक
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू कश्मीर बैंक में कर्ज देने में मिलीभगत और लापरवाही के मामलों का लगातार पर्दाफाश हो रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने ऐसे ही एक और मामले में मकदमा दर्ज किया है। 350 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के इस मामले में शुक्रवार को ब्यूरो की टीम ने बंगलूरू में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान कई तरह के कागजी और इलेक्ट्रानिक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इससे पहले सात अगस्त को बैंक से जुड़े 600 करोड़ रुपये के घोटाले के मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। बीते दस दिन में दर्ज किया गया यह तीसरा मुकदमा है।
जानकारी के अनुसार कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में एसए राथर स्पाइस प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है। इसके मालिक एवं एमडी अनीश राथर के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अनीश ने जेके बैंक के अफसरों, कर्मियों के साथ मिलीभगत कर 352.73 करोड़ का घपला किया गया है। शुक्रवार को ब्यूरो की टीम ने आरोपी के घर और कार्यालय पर छापेमारी की। ब्यूरो ने श्रीनगर कोर्ट से आरोपी के खिलाफ वारंट पहले ही ले लिए थे। अब प्राइवेट फर्म और बैंक अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले में आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
बंगलूरू के जोनल मुख्यालय में अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर लोन दे दिया गया था। कंपनी मसालों और काफी का आयात करती है। 2002 में कंपनी ने बैंक से लोन मांगा था। बैंक ने तीन संपत्तियों (10 करोड़) के बदले दो करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया। बैंक ने 2012 से 2015 तक लगातार कंपनी की लिमिट बढ़ाई और आंकड़ा 308 करोड़ पार हो गया, जबकि सिक्योरिटी वैल्यू 147 करोड़ की ही थी। इस लोन को सोपोर निवासी उस समय के ब्रांच मैनेजर शमीम अहमद हाजी ने मंजूरी दी थी। कंपनी के एमडी की ओर से प्रभाव डाल कर हाजी से कम कीमत की संपत्तियों का ज्यादा मूल्य पर मूल्यांकन कराया गया था।
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लोन लेने के बाद कंपनी ने इसे पहले से तय वक्त वक्त पर नहीं चुकाया। इसके बाद 2017 में लोन को एनपीए कर दिया गया। इसमें कंपनी का लंबित लोन 285 करोड़ हो गया, जबकि 66 करोड़ रुपये ब्याज लग गया। उक्त फर्म ने उसी समय एचडीएफसी से 16 करोड़ और आरबीएल बैंक से 25 करोड़ रुपये का लोन और लिया। यह लोन उस प्रापर्टी को गिरवी रखकर लिया गया, जो जेके बैंक के पास पहले से गिरवी रखी गई थी। एंटी करप्शन ब्यूरो मामले में आगे की जांच कर रहा है।
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जानकारी के अनुसार कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में एसए राथर स्पाइस प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है। इसके मालिक एवं एमडी अनीश राथर के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अनीश ने जेके बैंक के अफसरों, कर्मियों के साथ मिलीभगत कर 352.73 करोड़ का घपला किया गया है। शुक्रवार को ब्यूरो की टीम ने आरोपी के घर और कार्यालय पर छापेमारी की। ब्यूरो ने श्रीनगर कोर्ट से आरोपी के खिलाफ वारंट पहले ही ले लिए थे। अब प्राइवेट फर्म और बैंक अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले में आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
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बंगलूरू के जोनल मुख्यालय में अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर लोन दे दिया गया था। कंपनी मसालों और काफी का आयात करती है। 2002 में कंपनी ने बैंक से लोन मांगा था। बैंक ने तीन संपत्तियों (10 करोड़) के बदले दो करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया। बैंक ने 2012 से 2015 तक लगातार कंपनी की लिमिट बढ़ाई और आंकड़ा 308 करोड़ पार हो गया, जबकि सिक्योरिटी वैल्यू 147 करोड़ की ही थी। इस लोन को सोपोर निवासी उस समय के ब्रांच मैनेजर शमीम अहमद हाजी ने मंजूरी दी थी। कंपनी के एमडी की ओर से प्रभाव डाल कर हाजी से कम कीमत की संपत्तियों का ज्यादा मूल्य पर मूल्यांकन कराया गया था।
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लोन लेने के बाद कंपनी ने इसे पहले से तय वक्त वक्त पर नहीं चुकाया। इसके बाद 2017 में लोन को एनपीए कर दिया गया। इसमें कंपनी का लंबित लोन 285 करोड़ हो गया, जबकि 66 करोड़ रुपये ब्याज लग गया। उक्त फर्म ने उसी समय एचडीएफसी से 16 करोड़ और आरबीएल बैंक से 25 करोड़ रुपये का लोन और लिया। यह लोन उस प्रापर्टी को गिरवी रखकर लिया गया, जो जेके बैंक के पास पहले से गिरवी रखी गई थी। एंटी करप्शन ब्यूरो मामले में आगे की जांच कर रहा है।