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Jammu News: 100 साधु-साध्वी पहुंचे राम मंदिर, 1 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा
Tue, 20 Jun 2023 02:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Tue, 20 Jun 2023 02:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होने वाली है। अलग-अलग आश्रमों और राज्यों से संत, साधु और साध्वी जम्मू आना शुरू हो गए हैं। अभी तक 100 साधु-साध्वी राम मंदिर पुरानी मंडी में पहुंच गए हैं। जम्मूू के मंदिरों में मंत्रों और भजनों की ध्वनि गूंज रही है। गुरु अपने शिष्यों को लेकर आए हैं, कई साध्वी अपनी माता को साथ लेकर आ रही हैं। कुछ साधु-संत तो बस ट्रेन से आ रहे हैं और कई अपने आश्रम से पैदल आ रहे हैं। साधु-संतों के अनुसार इस बार सभी संत देश की सुरक्षा और उन्नति के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन करने जा रहे हैं। राम मंदिर के मंहत के अनुसार मंदिर में लगभग 1900 साधु संत आना अभी शेष हैं, जिनका पंजीकरण 30 जून से शुरू हो जाएगा और यात्रा के पहले जत्थे के साथ साधुओं का पहला जत्था भी बाबा बर्फानी के दर्शन करेगा।
सभी मंदिर घूम लिए हैं, बस अमरनाथ जाने का सपना पूरा हो तो जीवन सफल हो जाए
दो साल पहले घर छोड़ दिया। सारी जिम्मेदारियां निभा ली हैं। अब बस मंदिर में जाकर परमात्मा को पाना चाहती हूं। जो गृहस्थी में रहकर नहीं कर पाई वह सन्यास धारण कर कर रही हूं। अब तक पैदल यमनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ के दर्शन किए हैं। 4 जून को जम्मू आ गई थी और जम्मू के आसपास के सभी मंदिर घूम आई हूं। बस अब अमरनाथ के दर्शन हो जाएं तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा।
साध्वी कंचन बाई, इंदौर
बाबा के दरबार जाने से मेरा दिव्यांग होना भी नहीं रोक पा रहा
7वीं बार अमरनाथ की यात्रा के लिए जा रहा हूं। मेरा दिव्यांग होना दुख देता है जैसे पिस्सो टॉप मुझसे चला नहीं जाता है लेकिन वह मेरी यात्रा को कभी विफल नहीं कर पाया है। मैं कभी घोड़े पर नहीं बैठा हूं और चंदनवाड़ी से पैदल ही यात्रा करता हूं। जहां पर भी लगता है कि अब मैं नहीं चल पाऊंगा या नहीं चल सकता हूं। वहीं पर ऐसा लगता है कि बाबा खुद आकर मुझे सहारा देकर चलाते हैं।
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मोहन साधु, एमपी निवासी
मां के आशीर्वाद से चल पाई बच्ची, अब आते हैं हर साल अमरनाथ
प्रतिमा हिमाचल प्रदेश से बाबा अमरनाथ के दर्शन करने आती हैं। प्रतिमा बताती हैं कि उनकी बेटी पूर्णिमा चल नहीं सकती थी, इसलिए बाबा के दर्शन कर मनोकामना करती थी कि उनकी बेटी चल पाए। एक दिन उनकी वह तपस्या रंग लाई। अब पूर्णिमा चल सकती है और पिछले 13 साल से मां के साथ बाबा के दर्शन करने आ रही हैं। प्रतिमा बताती हैं कि उनके पति नहीं है और बच्चा कहीं खो गया है। इस बार मैं बाबा से अपना बच्चा मांगने जा रही हूं। अब यह भी बाबा कर देंगे।
एक बाबा, जिन्होंने 12 साल से नीचे नहीं किया हाथ
भगवान शंकर को महायोगी की उपाधि दी जाती है, क्योंकि उनसे बड़ा कोई तपस्वी और योगी कोई नहीं हुआ है। भोले बाबा के भक्त भी उनके कहने के अनुसार ही चलते हैं। जम्मू के राम मंदिर में अमरनाथ यात्रा के लिए आए 40 साल के महाकाल गिरी नागा साधु ने पिछले 12 साल से अपना हाथ नीचेे नहीं किया है। उनके अनुसार यह उनकी बाबा के लिए साधना है जो वह कोई दिखावे के लिए नहीं अपितु इस दुनिया और भूमि के लिए कर रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें कभी भी थकान नहीं होती और ना ही हाथ कभी नीचे रखने का मन हुआ है। मैंने आज तक बाल नहीं कटवाए हैं और न ही कभी जूते पहने हैं। हम नागा साधु हैं, जिसका मतलब हम शिव के और शिव हमारे हैं, हम परिवार का त्याग कर चुके हैं और ब्रह्मचारी जीवन बीता रहे हैं।
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जम्मू। अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होने वाली है। अलग-अलग आश्रमों और राज्यों से संत, साधु और साध्वी जम्मू आना शुरू हो गए हैं। अभी तक 100 साधु-साध्वी राम मंदिर पुरानी मंडी में पहुंच गए हैं। जम्मूू के मंदिरों में मंत्रों और भजनों की ध्वनि गूंज रही है। गुरु अपने शिष्यों को लेकर आए हैं, कई साध्वी अपनी माता को साथ लेकर आ रही हैं। कुछ साधु-संत तो बस ट्रेन से आ रहे हैं और कई अपने आश्रम से पैदल आ रहे हैं। साधु-संतों के अनुसार इस बार सभी संत देश की सुरक्षा और उन्नति के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन करने जा रहे हैं। राम मंदिर के मंहत के अनुसार मंदिर में लगभग 1900 साधु संत आना अभी शेष हैं, जिनका पंजीकरण 30 जून से शुरू हो जाएगा और यात्रा के पहले जत्थे के साथ साधुओं का पहला जत्था भी बाबा बर्फानी के दर्शन करेगा।
सभी मंदिर घूम लिए हैं, बस अमरनाथ जाने का सपना पूरा हो तो जीवन सफल हो जाए
दो साल पहले घर छोड़ दिया। सारी जिम्मेदारियां निभा ली हैं। अब बस मंदिर में जाकर परमात्मा को पाना चाहती हूं। जो गृहस्थी में रहकर नहीं कर पाई वह सन्यास धारण कर कर रही हूं। अब तक पैदल यमनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ के दर्शन किए हैं। 4 जून को जम्मू आ गई थी और जम्मू के आसपास के सभी मंदिर घूम आई हूं। बस अब अमरनाथ के दर्शन हो जाएं तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा।
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साध्वी कंचन बाई, इंदौर
बाबा के दरबार जाने से मेरा दिव्यांग होना भी नहीं रोक पा रहा
7वीं बार अमरनाथ की यात्रा के लिए जा रहा हूं। मेरा दिव्यांग होना दुख देता है जैसे पिस्सो टॉप मुझसे चला नहीं जाता है लेकिन वह मेरी यात्रा को कभी विफल नहीं कर पाया है। मैं कभी घोड़े पर नहीं बैठा हूं और चंदनवाड़ी से पैदल ही यात्रा करता हूं। जहां पर भी लगता है कि अब मैं नहीं चल पाऊंगा या नहीं चल सकता हूं। वहीं पर ऐसा लगता है कि बाबा खुद आकर मुझे सहारा देकर चलाते हैं।
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मां के आशीर्वाद से चल पाई बच्ची, अब आते हैं हर साल अमरनाथ
प्रतिमा हिमाचल प्रदेश से बाबा अमरनाथ के दर्शन करने आती हैं। प्रतिमा बताती हैं कि उनकी बेटी पूर्णिमा चल नहीं सकती थी, इसलिए बाबा के दर्शन कर मनोकामना करती थी कि उनकी बेटी चल पाए। एक दिन उनकी वह तपस्या रंग लाई। अब पूर्णिमा चल सकती है और पिछले 13 साल से मां के साथ बाबा के दर्शन करने आ रही हैं। प्रतिमा बताती हैं कि उनके पति नहीं है और बच्चा कहीं खो गया है। इस बार मैं बाबा से अपना बच्चा मांगने जा रही हूं। अब यह भी बाबा कर देंगे।
एक बाबा, जिन्होंने 12 साल से नीचे नहीं किया हाथ
भगवान शंकर को महायोगी की उपाधि दी जाती है, क्योंकि उनसे बड़ा कोई तपस्वी और योगी कोई नहीं हुआ है। भोले बाबा के भक्त भी उनके कहने के अनुसार ही चलते हैं। जम्मू के राम मंदिर में अमरनाथ यात्रा के लिए आए 40 साल के महाकाल गिरी नागा साधु ने पिछले 12 साल से अपना हाथ नीचेे नहीं किया है। उनके अनुसार यह उनकी बाबा के लिए साधना है जो वह कोई दिखावे के लिए नहीं अपितु इस दुनिया और भूमि के लिए कर रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें कभी भी थकान नहीं होती और ना ही हाथ कभी नीचे रखने का मन हुआ है। मैंने आज तक बाल नहीं कटवाए हैं और न ही कभी जूते पहने हैं। हम नागा साधु हैं, जिसका मतलब हम शिव के और शिव हमारे हैं, हम परिवार का त्याग कर चुके हैं और ब्रह्मचारी जीवन बीता रहे हैं।