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Amarnath Yatra 2023: आतंकवाद के गढ़ अनंतनाग में कश्मीरियत की मिसाल, बुर्कानशीं महिलाओं ने भक्तों पर बरसाए फूल

Sat, 01 Jul 2023 02:49 AM IST
विमल शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 01 Jul 2023 02:49 AM IST
सार

आतंकवाद का गढ़ रहे अनंतनाग में सड़क के दोनों किनारे तिरंगे के बीच महिला-पुरुष स्वागत के लिए लाइन लगाकर खड़े दिखे। यात्रियों का स्वागत गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर किया गया। 

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Amarnath Yatra 2023: burqa-clad women shower flowers on Amarnath devotees in Anantnag
पहलगाम पहुंचे अमरनाथ यात्रियों के पहले जत्थे का स्वागत करते अनंतनाग के उपायुक्त फखरुद्दीन हामिद व अन - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

अनुच्छेद 370 हटने के बाद अलगाववादियों तथा आतंकियों का दबदबा खत्म हुआ तो चार साल के भीतर ही कश्मीर घाटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बदलाव यह है कि अमरनाथ यात्रियों के स्वागत के लिए कश्मीर में आम जनों का हुजूम उमड़ पड़ा। इसमें बुर्कानशीं महिलाएं भी शामिल रहीं।

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कभी आतंकवाद का गढ़ रहे अनंतनाग में सड़क के दोनों किनारे तिरंगे के बीच महिला-पुरुष स्वागत के लिए लाइन लगाकर खड़े दिखे। यात्रियों का स्वागत गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर किया गया। बुके भी दिए गए। स्वागत से अभिभूत साधु संन्यासी तथा श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा।
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अमूमन हर साल अमरनाथ यात्रियों का जम्मू-कश्मीर में गर्मजोशी से स्वागत किया जाता रहा है। कश्मीर में भी स्वागत होता रहा है, लेकिन इस बार नजारा कुछ अलग ही दिखा। पहलगाम रूट के यात्रियों का अनंतनाग मुख्य बाजार में जोरदार स्वागत हुआ। दो घंटे से भी अधिक समय से लोग सड़कों पर लाइन लगाकर खड़े रहे।
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एक ओर पुरुष तो दूसरी ओर महिलाएं। सभी स्थानीय। बुर्का पहने महिलाएं भी अगवानी में आगे रहीं। किसी के हाथ में बुके तो किसी के हाथ में गुलाब की पंखुड़ियों से भरी थाली। मालाएं लिए भी महिलाएं खड़ी दिखीं। स्वागत के लिए पहुंचीं महिलाओं ने नाम बताने से परहेज किया, लेकिन कहा कि यह तो हमारी संस्कृति रही हैं।

यही कश्मीरियत है। हम वर्षों से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के साथा रहते आए हैं। एक दूसरे के सुख दुख में साझीदार बने हैं। उनका कहना था कि हमने कश्मीरियत तथा भाईचारे की मिसाल पेश करने के लिए अपने अमरनाथ यात्रियों का स्वागत करने का फैसला किया।

यह परंपरा की झलक है: उपायुक्त

अनंतनाग के डीसी डॉ. फखरुद्दीन हामिद स्वयं भी पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मौके पर स्वागत के लिए मौजूद रहे। उनका कहना है कि कश्मीर में स्वागत की परंपरा रही है। यह उसी की झलक है। हमारी कोशिश है कि जितने भी श्रद्धालु बाबा बर्फानी की यात्रा के लिए आए हैं वे जब यहां से लौटे तो कश्मीर की मेहमाननवाजी का संदेश अपने इलाके तक पहुंचाएं। डीसी ने खुद यात्रियों के साथ लंगर में प्रसाद भी ग्रहण किया।

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