हिंसा के दौरान अमरनाथ यात्रियों को श्रीनगर के मंदिर में मिली थी शरण
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हालात खराब होने के बाद घाटी में फंसे हुए अमरनाथ यात्रियों का जम्मू पहुंचना मंगलवार को भी जारी रहा। किसी को श्रीनगर के बेस कैंप में शरण मिली तो किसी को मंदिर में आसरा मिला। यात्रियों ने बताया कि सुरक्षा बलों की मदद और बाबा बर्फानी की कृपा से ही सभी आज जम्मू तक सुरक्षित पहुंच पाए हैं।
आगरा के करण ने बताया कि दस जुलाई की शाम को बालटाल से श्रीनगर तक पहुंचे थे। श्रीनगर में हालात पूरी तरह से खराब थे। कोई वाहन जम्मू जाने के लिए नहीं मिल रहा था। मजबूर होकर सभी रास्ते में बैठ गए और फिर सुरक्षा बलों के जवान और अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने सबको सुरक्षित जेके बैंक के हेड आफिस के नजदीक स्थित मंदिर में पहुंचाया, जहां पहले से ही 200 के करीब अमरनाथ यात्री रुके हुए थे। एक दिन मंदिर में गुजारा और 11 जुलाई की रात करीब 12 बजेे पुलिस ने बसों की व्यवस्था करके सबको श्रीनगर से निकाला और जम्मू सुरक्षित पहुंचे हैं।
सुरक्षा बलों की मदद से लौट रहे फंसे यात्री
छपरा बिहार के राजेश और मनीष ने बताया कि सात जुलाई को दर्शन करने बाद आठ को श्रीनगर पहुंचे तो हालात खराब हो गए और सभी श्रीनगर बेस कैंप में फंस गए। तीन दिन तक सभी सुरक्षा बलों की सुरक्षा में तीन दिन तक कैंप में ही रहे और 11 जुलाई की रात करीब 12 बजे सुरक्षा बलों ने बसों का इंतजाम करके सबको जम्मू के लिए रवाना किया।
मंगलवार दोपहर करीब दो बजे बाबा बर्फानी की कृपा से सभी सुरक्षित जम्मू पहुंच गए हैं। तीन दिन तक श्रीनगर में सिर्फ पत्थरबाजों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प ही देखने को मिली है। उड़ीसा के गोविंद ने बताया कि हालात खराब होने के बाद पहलगाम में सेना के शिविर में शरण मिली और फिर सेना ने वाहन की व्यवस्था करके फंसे हुए यात्रियों को जम्मू के लिए रवाना किया।