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मेधावी छात्र सम्मान: 'अपने सपने न थोपें... तनाव मुक्त माहौल दें, बच्चे देंगे गौरव का पल', अभिभावकों ने ये कहा
Mon, 28 Oct 2024 08:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 28 Oct 2024 08:07 AM IST
सार
अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में पहुंचे अभिभावकों ने अपने बच्चों के परीक्षा सफर को याद किया। विद्यार्थियों ने भी अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों को दिया।
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उपराज्यपाल से अपने बच्चों का प्रशस्ति पत्र व मेडल प्राप्त करते अभिभावक।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बोर्ड परीक्षा में मेधावियों ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है। इस सफर में उनके अभिभावकों का साथ महाभारत में श्री कृष्ण की तरह सारथी का रहा है। बिना उनके समर्पण व त्याग के मेधावियों के लिए सफलता हासिल करना चुनौती थी।
बोर्ड परीक्षा के इस अहम सफर में अभिभावकों ने उन्हें न सिर्फ नियमित पढ़ाई करवाई, बल्कि तनावमुक्त माहौल दिया जिसमें उन्होंने अपनी तैयारी कर सफलता के झंडे गाड़ दिए।
अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में पहुंचे अभिभावकों ने अपने बच्चों के परीक्षा सफर को याद किया। विद्यार्थियों ने भी अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों को दिया। वहीं अभिभावकों ने भी कहा कि हम सारथी की भूमिका में थे, लेकिन रथ चलाने का काम बच्चों ने कही किया।
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उनकी सफलता ने हमें गौरवान्वित किया। उपराज्यपाल से सम्मान मिलना बच्चों के लिए बड़ी बात है। इस तरह का सम्मान उन्हें भविष्य की चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देता है।
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बोर्ड परीक्षा के इस अहम सफर में अभिभावकों ने उन्हें न सिर्फ नियमित पढ़ाई करवाई, बल्कि तनावमुक्त माहौल दिया जिसमें उन्होंने अपनी तैयारी कर सफलता के झंडे गाड़ दिए।
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अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में पहुंचे अभिभावकों ने अपने बच्चों के परीक्षा सफर को याद किया। विद्यार्थियों ने भी अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों को दिया। वहीं अभिभावकों ने भी कहा कि हम सारथी की भूमिका में थे, लेकिन रथ चलाने का काम बच्चों ने कही किया।
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उनकी सफलता ने हमें गौरवान्वित किया। उपराज्यपाल से सम्मान मिलना बच्चों के लिए बड़ी बात है। इस तरह का सम्मान उन्हें भविष्य की चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देता है।
पढ़ाई के साथ नैतिक मूल्य भी विकसति करें
कुपवाड़ा जिले के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल पंजगाम की छात्रा दरख्शा अल्ताफ ने दसवीं कक्षा में 488 अंक के साथ पास की है। पिता मोहम्मद अल्ताफ ने बताया की बेटी को अपनी मेहनत का फल मिला है। पेशे से शिक्षक अल्ताफ ने बच्चों को पढ़ने के साथ-साथ उनमें नैतिक मूल्य विकसति करने पर जोर दिया।
कहते हैं कि एलजी सर से पुरस्कार हासिल करते देखना उनके लिए और पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। इस उम्र में पुस्कार हासिल कर बच्चों का मनोबल बढ़ता है। वह अपने अगले सफर में और ज्यादा बेहतर की कोशिश करता है। पुरस्कार में क्या मिला, ये मायने नहीं रखता है। पुरस्कार मिलना ही अपने बड़ी बात है।
कुपवाड़ा जिले के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल पंजगाम की छात्रा दरख्शा अल्ताफ ने दसवीं कक्षा में 488 अंक के साथ पास की है। पिता मोहम्मद अल्ताफ ने बताया की बेटी को अपनी मेहनत का फल मिला है। पेशे से शिक्षक अल्ताफ ने बच्चों को पढ़ने के साथ-साथ उनमें नैतिक मूल्य विकसति करने पर जोर दिया।
कहते हैं कि एलजी सर से पुरस्कार हासिल करते देखना उनके लिए और पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। इस उम्र में पुस्कार हासिल कर बच्चों का मनोबल बढ़ता है। वह अपने अगले सफर में और ज्यादा बेहतर की कोशिश करता है। पुरस्कार में क्या मिला, ये मायने नहीं रखता है। पुरस्कार मिलना ही अपने बड़ी बात है।
दूसरे बच्चों को भी मिलेगी प्रेरण
शिक्षक रियाज अहमद मीर ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं। सम्मान उन्हें भविष्य में और अच्छा करने की प्रेरणा देता है। शिक्षक होने के नाते मैं न सिर्फ अपने बल्कि अपने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझाता हूं।
वहीं बांदीपोरा से आए अभिभावक अब्दुल अजीज भट ने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के आयोजन के लिए अमर उजाला का आभारी हूं। इससे अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। बच्चों की सफलता में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों का अहम योगदान रहा है।
शिक्षक रियाज अहमद मीर ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं। सम्मान उन्हें भविष्य में और अच्छा करने की प्रेरणा देता है। शिक्षक होने के नाते मैं न सिर्फ अपने बल्कि अपने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझाता हूं।
वहीं बांदीपोरा से आए अभिभावक अब्दुल अजीज भट ने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के आयोजन के लिए अमर उजाला का आभारी हूं। इससे अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। बच्चों की सफलता में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों का अहम योगदान रहा है।
बेटी को तनावमुक्त माहौल दिया, जिससे परिणाम अच्छा आया
12वीं के साइंस संकाय में 486 अंक लाने वाली श्रीनगर की शाफिया मारिया के पिता विलायत ने कहा कि बेटी की सफलता पर मुझे गर्व है। बेटी ने अपनी मेहनत से यहां तक पहुंची है। एलजी के हाथों सम्मान पाना बड़ा बात है। इस तरह के सम्मान से भविष्य में उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा 12वीं कक्षा के इस पूरे सफर के दौरान बेटी को तनावमुक्त माहौल दिया। पढ़ाई को लेकर कभी कोई दबाव महसूस नहीं होना दिया। उसका लाभ ये मिला की बेटी ने उम्मीद से अच्छे अंक हासिल किए। जब परिवार के लोगों को पता चला की शाफिया को एलजी से पुरस्कार मिलेगा सब खुश थे। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपने सपने न थोपे उन्हें उस तरह का माहौल दे जिसमें व अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करे।
12वीं के साइंस संकाय में 486 अंक लाने वाली श्रीनगर की शाफिया मारिया के पिता विलायत ने कहा कि बेटी की सफलता पर मुझे गर्व है। बेटी ने अपनी मेहनत से यहां तक पहुंची है। एलजी के हाथों सम्मान पाना बड़ा बात है। इस तरह के सम्मान से भविष्य में उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा 12वीं कक्षा के इस पूरे सफर के दौरान बेटी को तनावमुक्त माहौल दिया। पढ़ाई को लेकर कभी कोई दबाव महसूस नहीं होना दिया। उसका लाभ ये मिला की बेटी ने उम्मीद से अच्छे अंक हासिल किए। जब परिवार के लोगों को पता चला की शाफिया को एलजी से पुरस्कार मिलेगा सब खुश थे। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपने सपने न थोपे उन्हें उस तरह का माहौल दे जिसमें व अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करे।
जो मेधावी नहीं आ सके, उनके अभिभावकों ने हासिल किया सम्मान
अमर उजाला छात्र सम्मान समारोह को लेकर मेधावियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी खूब उत्साह दिखा। किन्ही कारणों से कुछ बच्चे कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए। उनके हिस्से का सम्मान पाने उनके अभिभावक पहुंचे। अभिभावकों के गले में उनके बच्चों की मेहनत का मेडल और हाथों में सफलता का प्रशस्ति पत्र। उपराज्यपाल के हाथों पुरस्कार पाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। पुरस्कार लेने के बाद उन्होंने कहा कि बच्चे नहीं आ सके, इसका दुख तो है, पर आज उनके नाम का सम्मान पाकर गर्व महसूस हो रहा है। इस पल को शायद ही जीवन में हम कभी भुला पाएंगे।
अमर उजाला छात्र सम्मान समारोह को लेकर मेधावियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी खूब उत्साह दिखा। किन्ही कारणों से कुछ बच्चे कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए। उनके हिस्से का सम्मान पाने उनके अभिभावक पहुंचे। अभिभावकों के गले में उनके बच्चों की मेहनत का मेडल और हाथों में सफलता का प्रशस्ति पत्र। उपराज्यपाल के हाथों पुरस्कार पाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। पुरस्कार लेने के बाद उन्होंने कहा कि बच्चे नहीं आ सके, इसका दुख तो है, पर आज उनके नाम का सम्मान पाकर गर्व महसूस हो रहा है। इस पल को शायद ही जीवन में हम कभी भुला पाएंगे।