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वायुसेना के लड़ाकू विमान भी तैयारः श्रीनगर, लेह, चंडीगढ़ एयरबेस एक्टिवेट

Thu, 18 Jun 2020 01:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Jun 2020 01:48 AM IST
सार

  • जरूरत पड़ने पर सुखोई और मिराज से भी दिया जाएगा जवाब 

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Air Force fighter aircraft also ready and Srinagar, Leh, Chandigarh Airbase Activate
sukhoi 57

विस्तार

एलएसी में तनाव के बीच सेना के बाद अब वायुसेना ने भी कमर कस ली है। वायुसेना ने अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को भी फारवर्ड एरिया में तैयार रखा है। श्रीनगर, लेह, चंडीगढ़ के एयरबेस को एक्टिवेट कर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर वहां से लड़ाकू विमानों को उड़ने के आदेश दिए जा सकते हैं।

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इस बीच सूत्रों के अनुसार चीन को करारा जवाब देने के लिए जरूरत पड़ने पर सुखोई 30 एमकेआई और मिराज 2000 जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इन दोनों विमानों का बेस हलवारा और ग्वालियर में है।
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5 मई की रात लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र के करीब विवादित फिंगर एरिया में पीएलए के सैनिक भारतीय सैनिकों से भिड़े थे। इस घटना के बाद पीएलए के हेलिकॉप्टरों को इसी इलाके में एलएसी के करीब देखा गया था।
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इसकी सूचना के बाद वायु सेना के सुखोई ने भी एलएसी के करीब एयर पेट्रोलिंग की थी। सूत्रों के मुताबिक 5 मई को ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएलए के हेलिकॉप्टरों के खिलाफ  वायुसेना ने फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया। इससे पहले 1962 की जंग में भी भारत ने चीन के खिलाफ  वायुसेना का इस्तेमाल नहीं किया था। 
 

चार किमी दायरे में नहीं उड़ा सकते हेलिकॉप्टर

प्रोटोकॉल की बात करें तो किसी भी देश के हेलिकॉप्टर बॉर्डर के 4 किलोमीटर के दायरे में उड़ान नहीं भर सकते। अगर किसी कारण उड़ान भरनी होती है तो दूसरे देश को इस बारे में पहले से सूचित किया जाना अनिवार्य है। लड़ाकू विमानों के लिए यह दायरा 10 किलोमीटर का होता है।

लद्दाख में वायुसेना के दो एयरबेस हैं लेकिन वहां पर फाइटर जेट्स की कोई स्क्वाड्रन नहीं है। जरूरत पड़ने पर वायुसेना के श्रीनगर, चंडीगढ़ या हरियाणा एयरबेस से लड़ाकू विमानों को अस्थायी तौर पर तैनात किया जाता है।  

सुखोई 30 एमकेआई की खासियत 
सुखोई 30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान है। यह ब्रह्मोस मिसाइल ले जाने की क्षमता रखता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, लड़ाकू विमान से या जमीन से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल को दिन अथवा रात तथा हर मौसम में दागा जा सकता है। इसकी मारक क्षमता अचूक होती है। हवा से सतह पर मार करने में सक्षम ब्रह्मोस की मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। सुखोई से इसके कई सफल फायर ट्रायल किए जा चुके हैं। 

मिराज-2000 की खासियत

मिराज-2000 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है। यह अधिकतम 2000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। कारगिल युद्ध में मिग-21 के साथ मिराज-2000 विमानों ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 2015 में इसे अपग्रेड किया गया।

इनमें नए रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे हैं जिनसे इन विमानों की मारक और टोही क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। मिराज-2000 में जुड़वा इंजन हैं। एक फेल होने पर दूसरा काम करता है। इससे पायलट और विमान दोनों सुरक्षित रहते हैं। जहां एक ओर यह अधिक से अधिक बम या मिसाइल गिराने में सक्षम है। वहीं यह हवा में दुश्मन का मुकाबला भी आसानी से करने में सक्षम है।

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