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मौसम साफ होने पर किसानों को मिली राहत
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रणवीर नहर की जर्जर हालत के बारे में जम्मू कशमीर पीयूपल सैक्लूर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा जान
- फोटो : RSPURA
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सांबा। गत दो दिन हुई बारिश से जहां जनजीवन प्रभावित होकर रह गया। वहीं किसान भी चिंता में डूब गए। रविवार को मौसम के साफ होने पर किसानों को कुछ राहत मिली है।
किसान गारा राम, नरोत्तम, दिनेश आदि ने बताया कि गेहूं व सरसों की बिजाई कर दी थी। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा होने से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में गेहूं का बीज भी नष्ट होने पर है। उन्होंने कहा कि अभी तक अधिकतर किसानों ने गेहूं की बिजाई नही की थी। बारिश से खेतों में अधिक नमी के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। अधिक नमी वाले खेतों में दस दिन तक गेहूं की बिजाई नही हो सकेगी। उनके अनुसार अधिक बारिश से आलू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आलू की फसल भी नष्ट हो गई है। कुल मिलाकर यह वर्ष किसानों के लिए काफी नुकसान दायक रहा है। पहले बासमती की फसल नष्ट हो गई थी। अब गेहूं व सरसों के साथ सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसान काफी निराश हैं। जबकि सरकार की ओर से भी किसानों की कोई सुध नहीं ली जा रही है।
धूप खिलते ही किसानों ने किया खेतों का रुख
परगवाल। सीमावर्ती क्षेत्र परगवाल में रविवार को तेज धूप खिलने के साथ ही किसानों ने खेतों की ओर रुख कर लिया। उन्होंने गेहूं की बिजाई की हुई खेतों की जांच की। कुछ किसानों ने कहा कि दस से बारह दिनों के बाद ही सही पता चलेगा कि फसल होगी या दोबारा फसल लगाना पड़ेगी। हालांकि कुछ किसानों की सोच इनके विपरीत थी। उनका मानना था कि गेहूं की फसल की बुआई पहले ही काफी लेट हुई थी, लिहाजा अभी खेतों को सूखने में वक्त लगेगा। उसके बाद गेहूं की बिजाई का कोई फायदा रहेगा। स्थानीय किसान मदन शर्मा का कहना है कि उनको लगता है कि कम नमी वाले खेतों में बारिश के बद भी फसल निकल आएगी, लेकिन निचले खेतों में यहां बारिश का पानी खड़ा है। वहां फसल नहीं होने की संभावना है। ज्ञात रहे परगवाल कृषि प्रधान क्षेत्र है। वहीं पिछले दिनों हुई बारिश से फसल खराब होने की जो अटकलें लगाई जा रही हैं उसका सही आकलन 10 से 15 दिनों के बाद ही लग पाएगा, लेकिन इस बारिश से किसानों के माथे पर चिंता जरूर झलक रही है।
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‘गेहूं की फसल के नुकसान की भरपाई करे सरकार’
अखनूर। बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान पर किसानों ने सरकार से भरपाई की मांग की है। किसान जगदीश राज, विशन दास ने बताया कि इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी थी। मगर बारिश से कई जगहों पर खेतों में अधिक पानी आने पर फसल खराब हो गई है। सरकार को मुआवजा दिया जाना चाहिए। ब्यूरो
रणवीर नहर की हालत जर्जर
नहर विभाग की तरफ से मरम्मत की तरफ नहीं दिया जा रहा है ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
मीरां साहिब। किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पानी मुहैया कराए जाने के लिए दो सौ वर्ष पहले बनी रणवीर नहर की हालत जर्जर है। इसकी मरम्मत की तरफ नहर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। इससे किसान वर्ग में रोष है।
मरालिया डाक बंगला से आरंभ हुई डी-दस रणवीर नहर कई स्थानों पर टूटने के साथ उसमें वृक्ष गिरे पड़े हैं। उपजिले के सीमावर्ती गांव तक इसी नहर का पानी किसानों को मुहैया कराया जाता है, लेकिन अब नहर के किनारे कई स्थानों पर टूट चुके हैं। संबधित विभाग इसे ठीक नहीं करा रहा। गत वर्ष गांव दड़प के पास नहर टूटने पर लगभग एक माह तक उस समय किसानों को पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई थी, जब गेहूं की फसल को पानी की अधिक जरूरत थी।
जम्मू कश्मीर पीपुल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि हर वर्ष नहरों की सफाई कराए जाने के लिए सरकार द्वारा तीन-चार माह तक रणवीर नहर को बंद कर इसकी मरम्मत की जाती है। इन दिनों मीरां साहिब क्षेत्र में रिंग रोड का निर्माण कार्य चलने पर नहर किनारे लगे वृक्षों की कटाई करने के उपरांत नहर में पडे़ होने पर कई स्थानों पर किनारे टूटने पर ठीक नहीं किए जा रहे। यही नहीं नहर में लगे कूडे़ - करकट के ढेर तक नहीं हटवाए जा रहे, जिसके चलते नहर में पानी आने पर इसका बहाव बेहतर नहीं होने पर रणवीर नहर का पानी आगे सुचारु रूप से नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने कहा कि नहरी विभाग को इसमें सुधार करना चाहिए ताकि किसानों को जरूरत के मुताबिक नहरी पानी मिल सके।
किसान मोहन लाल, सुखदेव राज का कहना है कि आरएस पुरा उपजिले में नहरी विभाग का कार्यालय होने पर विभाग के चार पांच जेई व अन्य अधिकारी नियुक्त होने पर उन्हें नहर की जर्जर हालत बनने पर इसका समाधान करना चाहिए, लेकिन आरएस पुरा में जाने पर कार्यालय में न तो विभाग के एईई मिलते और न ही अन्य कर्मी। किसानों का कहना है कि दिन व दिन नहर की हालत जर्जर बनी होने पर इस और ध्यान नही दिया जा रहा जिसके चलते किसानों को संचारू रूप से नहरी पानी की आपूर्ति नही हो पा रही।
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किसान गारा राम, नरोत्तम, दिनेश आदि ने बताया कि गेहूं व सरसों की बिजाई कर दी थी। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा होने से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में गेहूं का बीज भी नष्ट होने पर है। उन्होंने कहा कि अभी तक अधिकतर किसानों ने गेहूं की बिजाई नही की थी। बारिश से खेतों में अधिक नमी के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। अधिक नमी वाले खेतों में दस दिन तक गेहूं की बिजाई नही हो सकेगी। उनके अनुसार अधिक बारिश से आलू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आलू की फसल भी नष्ट हो गई है। कुल मिलाकर यह वर्ष किसानों के लिए काफी नुकसान दायक रहा है। पहले बासमती की फसल नष्ट हो गई थी। अब गेहूं व सरसों के साथ सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसान काफी निराश हैं। जबकि सरकार की ओर से भी किसानों की कोई सुध नहीं ली जा रही है।
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धूप खिलते ही किसानों ने किया खेतों का रुख
परगवाल। सीमावर्ती क्षेत्र परगवाल में रविवार को तेज धूप खिलने के साथ ही किसानों ने खेतों की ओर रुख कर लिया। उन्होंने गेहूं की बिजाई की हुई खेतों की जांच की। कुछ किसानों ने कहा कि दस से बारह दिनों के बाद ही सही पता चलेगा कि फसल होगी या दोबारा फसल लगाना पड़ेगी। हालांकि कुछ किसानों की सोच इनके विपरीत थी। उनका मानना था कि गेहूं की फसल की बुआई पहले ही काफी लेट हुई थी, लिहाजा अभी खेतों को सूखने में वक्त लगेगा। उसके बाद गेहूं की बिजाई का कोई फायदा रहेगा। स्थानीय किसान मदन शर्मा का कहना है कि उनको लगता है कि कम नमी वाले खेतों में बारिश के बद भी फसल निकल आएगी, लेकिन निचले खेतों में यहां बारिश का पानी खड़ा है। वहां फसल नहीं होने की संभावना है। ज्ञात रहे परगवाल कृषि प्रधान क्षेत्र है। वहीं पिछले दिनों हुई बारिश से फसल खराब होने की जो अटकलें लगाई जा रही हैं उसका सही आकलन 10 से 15 दिनों के बाद ही लग पाएगा, लेकिन इस बारिश से किसानों के माथे पर चिंता जरूर झलक रही है।
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‘गेहूं की फसल के नुकसान की भरपाई करे सरकार’
अखनूर। बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान पर किसानों ने सरकार से भरपाई की मांग की है। किसान जगदीश राज, विशन दास ने बताया कि इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी थी। मगर बारिश से कई जगहों पर खेतों में अधिक पानी आने पर फसल खराब हो गई है। सरकार को मुआवजा दिया जाना चाहिए। ब्यूरो
रणवीर नहर की हालत जर्जर
नहर विभाग की तरफ से मरम्मत की तरफ नहीं दिया जा रहा है ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
मीरां साहिब। किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पानी मुहैया कराए जाने के लिए दो सौ वर्ष पहले बनी रणवीर नहर की हालत जर्जर है। इसकी मरम्मत की तरफ नहर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। इससे किसान वर्ग में रोष है।
मरालिया डाक बंगला से आरंभ हुई डी-दस रणवीर नहर कई स्थानों पर टूटने के साथ उसमें वृक्ष गिरे पड़े हैं। उपजिले के सीमावर्ती गांव तक इसी नहर का पानी किसानों को मुहैया कराया जाता है, लेकिन अब नहर के किनारे कई स्थानों पर टूट चुके हैं। संबधित विभाग इसे ठीक नहीं करा रहा। गत वर्ष गांव दड़प के पास नहर टूटने पर लगभग एक माह तक उस समय किसानों को पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई थी, जब गेहूं की फसल को पानी की अधिक जरूरत थी।
जम्मू कश्मीर पीपुल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि हर वर्ष नहरों की सफाई कराए जाने के लिए सरकार द्वारा तीन-चार माह तक रणवीर नहर को बंद कर इसकी मरम्मत की जाती है। इन दिनों मीरां साहिब क्षेत्र में रिंग रोड का निर्माण कार्य चलने पर नहर किनारे लगे वृक्षों की कटाई करने के उपरांत नहर में पडे़ होने पर कई स्थानों पर किनारे टूटने पर ठीक नहीं किए जा रहे। यही नहीं नहर में लगे कूडे़ - करकट के ढेर तक नहीं हटवाए जा रहे, जिसके चलते नहर में पानी आने पर इसका बहाव बेहतर नहीं होने पर रणवीर नहर का पानी आगे सुचारु रूप से नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने कहा कि नहरी विभाग को इसमें सुधार करना चाहिए ताकि किसानों को जरूरत के मुताबिक नहरी पानी मिल सके।
किसान मोहन लाल, सुखदेव राज का कहना है कि आरएस पुरा उपजिले में नहरी विभाग का कार्यालय होने पर विभाग के चार पांच जेई व अन्य अधिकारी नियुक्त होने पर उन्हें नहर की जर्जर हालत बनने पर इसका समाधान करना चाहिए, लेकिन आरएस पुरा में जाने पर कार्यालय में न तो विभाग के एईई मिलते और न ही अन्य कर्मी। किसानों का कहना है कि दिन व दिन नहर की हालत जर्जर बनी होने पर इस और ध्यान नही दिया जा रहा जिसके चलते किसानों को संचारू रूप से नहरी पानी की आपूर्ति नही हो पा रही।