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फूलो की खेति करने वाले किसानों को उठाना पड रहा नुक्सान
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आरएस पुरा। कोरोना के चलते किसान से लेकर मजदूर वर्ग के लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब हालत बेहतर होने पर उम्मीद बंधी है। उपजिले में कई किसान फूलों की खेती कर जीवन-यापन करते हैं। दो वर्ष से कोरोना के चलते उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
किसान रमेश लाल ने बताया कि शादी-विवाह बंद होने के साथ मंदिर भी कोरोना महामारी के चलते फूल नहीं बेच पाए। गुटा, गेंदा फूल सहित कई किस्म के खेती काफी समय से कर रहे हैं। दो वर्ष से उन्हें कोरोना के चलते काफी नुकसान उठाना पड़ा। हर वर्ष दिसंबर में फूलों के बीज लगाए जाने पर इसकी खेती आरंभ करते हैं। मई के बाद धान लगाते हैं, इस बार फूल नहीं बेच पाने पर खेतों में लगे हैं। उन्होंने कहा कि पचास रुपये प्रति किलो के भाव तक जम्मू में जाकर बेचते हैं। लॉकडाउन के चलते इस बार किया खर्च भी पूरा नहीं हो पाया।
12 वीं कक्षा में शिक्षा प्राप्त कर रहे राकेश ने बताया कि खेतीबाड़ी किसी भी किस्म की हो, इसके लिए कड़ी मेहनत करने पर लाभ मिलता है। परिवार के साथ बीज लगाने के बाद समय-समय पर इसकी देखभाल करने पर बेहतर गुणवत्ता के साथ फूलों की पैदावार करने पर अधिक कीमत मिलती है। दो वर्ष से मेहनत करने पर भी घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि फलोरीकल्चर विभाग की ओर से किसानों को फूलों की खेती करने के लिए जागरूक किया जाता है। किसानों द्वारा फूलों की पैदावार करने पर इसे बेच पाना मुश्किल बना रहता है। उन्होंने कहा कि आरएस पुरा के सीमावर्ती क्षेत्र रंगपुर मौलनिया, कोरोटाना आदि के कई किसान वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह फूलों की खेती करने वाले किसानों की दिक्कतों का समाधान करे ताकि वह परिवार का खर्च चला सकें।
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किसान रमेश लाल ने बताया कि शादी-विवाह बंद होने के साथ मंदिर भी कोरोना महामारी के चलते फूल नहीं बेच पाए। गुटा, गेंदा फूल सहित कई किस्म के खेती काफी समय से कर रहे हैं। दो वर्ष से उन्हें कोरोना के चलते काफी नुकसान उठाना पड़ा। हर वर्ष दिसंबर में फूलों के बीज लगाए जाने पर इसकी खेती आरंभ करते हैं। मई के बाद धान लगाते हैं, इस बार फूल नहीं बेच पाने पर खेतों में लगे हैं। उन्होंने कहा कि पचास रुपये प्रति किलो के भाव तक जम्मू में जाकर बेचते हैं। लॉकडाउन के चलते इस बार किया खर्च भी पूरा नहीं हो पाया।
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12 वीं कक्षा में शिक्षा प्राप्त कर रहे राकेश ने बताया कि खेतीबाड़ी किसी भी किस्म की हो, इसके लिए कड़ी मेहनत करने पर लाभ मिलता है। परिवार के साथ बीज लगाने के बाद समय-समय पर इसकी देखभाल करने पर बेहतर गुणवत्ता के साथ फूलों की पैदावार करने पर अधिक कीमत मिलती है। दो वर्ष से मेहनत करने पर भी घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि फलोरीकल्चर विभाग की ओर से किसानों को फूलों की खेती करने के लिए जागरूक किया जाता है। किसानों द्वारा फूलों की पैदावार करने पर इसे बेच पाना मुश्किल बना रहता है। उन्होंने कहा कि आरएस पुरा के सीमावर्ती क्षेत्र रंगपुर मौलनिया, कोरोटाना आदि के कई किसान वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह फूलों की खेती करने वाले किसानों की दिक्कतों का समाधान करे ताकि वह परिवार का खर्च चला सकें।
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