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नरवाई जलाने पर प्रशासन नही कर रहा कारवाई

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Mon, 03 May 2021 11:28 PM IST
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आरएस पुरा गेहूं की फसल की कटाई के बाद कई खेतों में नाड़ जलाई जा रही है। इससे कई बार आसपास के खेतों में भी आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। नाड़ जलाने पर प्रशासन ने सिर्फ प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसी वजह से अब भी खेतों में आग देखी जा सकती है। प्रतिदिन कई खेतों में नाड़ जलाई जा रही है।
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कृषि विभाग की तरफ से किसानों को नाड़ जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक नहीं करना भी एक कारण। कथौलिक सोशल सर्विस सोसायटी के प्रोजेक्ट अधिकारी सुभाष चंद्र का कहना है कि नाड़ जलाने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व एवं मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। धीरे-धीरे जमीन बंजर भी हो सकती है। इससे पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। मानव स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। धुएं से दुर्घटनाएं होने की भी आशंका रहती है। खेतों में लगाई आग अनियंत्रित होकर बस्तियों को भी चपेट में ले सकती है। इससे जन-धन की हानि हो सकती है। उपजिले में करीब 70 फीसदी लोग कृषि कार्य में लगे हैं। जिले में फसल लेने के बाद किसान नाड़ जला रहे हैं, लेकिन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। किसान भी नाड़ जलाने से इनकार करते हैं और उनका तर्क होता है कि खेतों में आग लगाई नहीं गई बल्कि शार्ट सर्किट या अन्य कारणों से लगी है। कृषि विभाग का कहना है कि कुछ किसान नाड़ जलाते हैं, और वह रात के समय में आग को दुर्घटना बता देते हैं। इससे उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती।

कृषि विभाग के अधिकारी गुलशन शर्मा का कहना है कि आग से खेतों में बैक्टीरिया और अन्य उपजाऊ तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसलिए हम निरंतर किसानों से संवाद करते हैं। उन्हें नाड़ नहीं जलाने देते हैं। किसान रतन लाल व लालचंद ने बताया कि क्षेत्र में कहीं भी नाड़ नहीं जलाई जाती। फसल कटने के बाद खेत जुताई करते हैं, जिससे भूसा मिट्टी में मिल जाता है और पानी मिलने पर खाद का काम करता है। जगदीश राज का कहना है कि रविवार देर रात गांव चक्क इस्लाम, कुतमनिजाम रायपुर, कौला, कोठे आदि गांव में गेहूं की कंवाईन मशीन से कटाई के बाद नाड़ को आग लगने पर जीव जंतुओं व कई पक्षियों के चपेट में आने पर इसकी चहचहाहट दूर तक सुनाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि दिन ब दिन दूषित हो रहे वातावरण से हवा भी जहरीली हो गई है। कोरोना महामारी के चलते लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। इसके बावजूद भी कोई सबक नहीं ले रहा। प्रशासन को चाहिए कि किसान नाड़ न जलाएं और जिस प्रकार दिल्ली सरकार ने व्यवस्था की है उसी प्रकार जम्मू कश्मीर में किया जाए।

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