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किसानो द्वारा कृषि योग्या जमीन पर कव्जा करने पर जताया रोष
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आरएस पुरा। शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय चट्ठा जम्मू प्रबंधन पर खेती योग्य 78 कनाल पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। बुधवार को मीरां साहिब क्षेत्र के गांव नंदपुर के लोगों ने स्कास्ट जम्मू प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे किसनों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए। किसान जीत राज, ब्रिता राम, तरसेम सिंह आदि ने कहा कि जब यहां विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं हुई थी उससे कई साल पहले इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब कृषि विश्वविद्यालय प्रबंधन की तरफ से उनकी जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हें खेती करने से भी रोका जा रहा है। किसानों ने कहा कि राजस्व विभाग से लेकर कृषि विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों से भी इंसाफ की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके चलते उन्हें मजबूर होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जो हदबंदी की गई है उनकी जमीन उसके बाहर है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। उन्होंने जो फसल लगाई है वह भी काटने नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार जहां किसानों की बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ क्षेत्र के किसानों से उनकी जमीनें छीनने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के अधिकतर लोग खेती बाड़ी पर ही निर्भर करते हैं। ऐसे में अगर उनकी जमीन छीन ली जाती है तो वह परिवार का पालन पोषण मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें जल्द से जल्द इंसाफ नहीं मिला तो वह आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
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प्रदर्शन कर रहे किसनों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए। किसान जीत राज, ब्रिता राम, तरसेम सिंह आदि ने कहा कि जब यहां विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं हुई थी उससे कई साल पहले इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब कृषि विश्वविद्यालय प्रबंधन की तरफ से उनकी जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हें खेती करने से भी रोका जा रहा है। किसानों ने कहा कि राजस्व विभाग से लेकर कृषि विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों से भी इंसाफ की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके चलते उन्हें मजबूर होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जो हदबंदी की गई है उनकी जमीन उसके बाहर है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। उन्होंने जो फसल लगाई है वह भी काटने नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार जहां किसानों की बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ क्षेत्र के किसानों से उनकी जमीनें छीनने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के अधिकतर लोग खेती बाड़ी पर ही निर्भर करते हैं। ऐसे में अगर उनकी जमीन छीन ली जाती है तो वह परिवार का पालन पोषण मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें जल्द से जल्द इंसाफ नहीं मिला तो वह आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
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