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Jammu News: जम्मू विवि का बायोटेक्नोलॉजी विभाग पुंछ के मंडी में बढ़ाएगा केसर की खेती
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- लोरन, अड़ाई, सत्तपुर, बाइला गांव में 30 किसानों की जमीन को किया चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय का बायोटेक्नोलॉजी विभाग पुंछ के मंडी में केसर की खेती का दायरा बढ़ाएगा। विभाग ने ट्रायल के लिए अब 30 किसानों की जमीन को चिह्नित किया है। इससे विभाग अंदाजा लगाएगा कि केसर की खेती से यहां के किसानों की कितनी आमदनी बढ़ सकती है। विभाग ने पहले भी ट्रायल लिया था। इसमें सफलता मिली है। उसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने लोरन, अड़ाई, सत्तपुर, बाइला और गुराई आदि गांवों में दो-दो मरला जमीन में किसानों के सहयोग से केसर उगाने का फैसला लिया है। ट्रांसडिस्पिलिनरी परियोजना के तहत शुरू की जा रही इस पहल में किसानों को कश्मीर के पंपौर से लाकर निशुल्क बीज और विभागीय प्रयोगशाला में तैयार की गई खाद उपलब्ध करवाई गई है। किसानों को कश्मीर और किश्तवाड़ की तर्ज पर ही विभाग की टीम खेती के लिए मार्गदर्शन कर रही है। परियोजना की निदेशक प्रो. ज्योति वैंक्यू ने कहा कि प्रयोगात्मक तरीके से केसर की खेती के मामले में उन्हें जो कामयाबी हासिल हुई है। उसको व्यापक पैमाने पर आगे बढ़ाने के निर्णय लिया गया है। अब बीज खरीदने और मिट्टी की जांच के लिए जानकारी मांगी जा रही है।फिर केसर का बीज खरीदा जाएगा और मिट्टी के नमूने भी लिए जाएंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय का बायोटेक्नोलॉजी विभाग पुंछ के मंडी में केसर की खेती का दायरा बढ़ाएगा। विभाग ने ट्रायल के लिए अब 30 किसानों की जमीन को चिह्नित किया है। इससे विभाग अंदाजा लगाएगा कि केसर की खेती से यहां के किसानों की कितनी आमदनी बढ़ सकती है। विभाग ने पहले भी ट्रायल लिया था। इसमें सफलता मिली है। उसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने लोरन, अड़ाई, सत्तपुर, बाइला और गुराई आदि गांवों में दो-दो मरला जमीन में किसानों के सहयोग से केसर उगाने का फैसला लिया है। ट्रांसडिस्पिलिनरी परियोजना के तहत शुरू की जा रही इस पहल में किसानों को कश्मीर के पंपौर से लाकर निशुल्क बीज और विभागीय प्रयोगशाला में तैयार की गई खाद उपलब्ध करवाई गई है। किसानों को कश्मीर और किश्तवाड़ की तर्ज पर ही विभाग की टीम खेती के लिए मार्गदर्शन कर रही है। परियोजना की निदेशक प्रो. ज्योति वैंक्यू ने कहा कि प्रयोगात्मक तरीके से केसर की खेती के मामले में उन्हें जो कामयाबी हासिल हुई है। उसको व्यापक पैमाने पर आगे बढ़ाने के निर्णय लिया गया है। अब बीज खरीदने और मिट्टी की जांच के लिए जानकारी मांगी जा रही है।फिर केसर का बीज खरीदा जाएगा और मिट्टी के नमूने भी लिए जाएंगे।