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फसल बचाने के लिए किसान कर रहे पहरेदारी
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परगवाल। सीमा क्षेत्र में मौजूदा समय गांव के युवा दिन रात पहरेदारी कर गेहूं की फसल को मवेशियों से बचाने में जुटे हैं। इसके लिए युवाओं ने चिनाब दरिया के किनारे जहां से मवेशी निकल कर खेतों में पहुंचते हैं। वहां अस्थायी निर्माण कर दिन रात पहरेदारी कर रहे हैं। मवेशियों को खेतों की तरफ नहीं आने दे रहें हैं।
गेहूं की फसल जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे ही वैसे उस पर खतरा भी मंडराने लगा है। अब फसल को जंगली पशुओं से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले किसान खुद अपने खेतों की रखवाली कर रहे थे, लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा था। क्योंकि खेतों में दावा करने वाले मवेशियों की संख्या करीब 100 से 150 होती थी। जिन्हें खेतों से निकालना एक दो आदमियों के बस की बात नहीं होती। क्योंकि आदमी को देखते ही ये उनको मारने दौड़ते हैं। जंगली मवेशियों से फसल को बचाने के लिए क्षेत्र के किसान कई बार नेताओं से लेकर प्रशासन तक गुहार लगा चुके, लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा था। इसी को देखते हुए किसानों ने पिछले दिनों गांव सजवाल में एकत्रित होकर रणनीति बनाई और गांव के ही कुछ युवाओं को जंगली मवेशियों से फसल को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी और बदले में फसल कटने तक प्रति एकड़ करीब 28 किलो गेहूूं देने का वादा किया। जो अनोखी पहल है। इसका अच्छा असर दिख रहा है। अब किसान वर्ग भी खुश दिख रहा है और पहरेदारी करने वाले युवा भी खुश हैं। क्योंकि उनकी फसल बचने के साथ-साथ उनको फायदा भी होगा। सनद रहे जंगली मवेशी ज्यादातर रात को किसानों के खेतों पर धावा बोलकर उनकी फसल बरबाद कर दरिया चिनाब के बीच बने टापू पर चले जाते हैं। इसको लेकर किसान वर्ग बहुत परेशान रहता था।
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गेहूं की फसल जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे ही वैसे उस पर खतरा भी मंडराने लगा है। अब फसल को जंगली पशुओं से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले किसान खुद अपने खेतों की रखवाली कर रहे थे, लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा था। क्योंकि खेतों में दावा करने वाले मवेशियों की संख्या करीब 100 से 150 होती थी। जिन्हें खेतों से निकालना एक दो आदमियों के बस की बात नहीं होती। क्योंकि आदमी को देखते ही ये उनको मारने दौड़ते हैं। जंगली मवेशियों से फसल को बचाने के लिए क्षेत्र के किसान कई बार नेताओं से लेकर प्रशासन तक गुहार लगा चुके, लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा था। इसी को देखते हुए किसानों ने पिछले दिनों गांव सजवाल में एकत्रित होकर रणनीति बनाई और गांव के ही कुछ युवाओं को जंगली मवेशियों से फसल को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी और बदले में फसल कटने तक प्रति एकड़ करीब 28 किलो गेहूूं देने का वादा किया। जो अनोखी पहल है। इसका अच्छा असर दिख रहा है। अब किसान वर्ग भी खुश दिख रहा है और पहरेदारी करने वाले युवा भी खुश हैं। क्योंकि उनकी फसल बचने के साथ-साथ उनको फायदा भी होगा। सनद रहे जंगली मवेशी ज्यादातर रात को किसानों के खेतों पर धावा बोलकर उनकी फसल बरबाद कर दरिया चिनाब के बीच बने टापू पर चले जाते हैं। इसको लेकर किसान वर्ग बहुत परेशान रहता था।
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