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किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए कर्ज माफ करने की मांग
Tue, 12 May 2020 01:22 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2020 01:22 PM IST
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खेत में काम करता एक किसान।
- फोटो : PTI
कोरोना और मौसम की मार के चलते किसान कई प्रकार की परेशानियों से घिरे हैं। वे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए कर्ज की किश्त नहीं अदा कर पा रहे हैं। किसान दल खौड़ ने कर्ज को माफ करने की मांग की है।
किसानों के अनुसार उनकी धान की फसल खेतों में ही बेमौसम बारिश से खराब हो गई। गेहूं की फसल का भी बारिश की वजह से काफी नुकसान हुआ है। अब हम कोरोना के भय के चलते खेतों में काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते किसान दल ने किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तीन चार सीजन से हमें खेती-बाड़ी से नुकसान हो रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। सरकार ने हमारे खातों में जो दो-दो हजार रुपये डाल कर मदद की है उसके हम आभारी हैं, लेकिन दो हजार से कुछ नहीं हो सकता। इसलिए हमारे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिये लोन की किश्त को माफ किया जाए।
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किसान बलबीर सिंह, स्वर्ण सिंह, चगर सिंह आदि ने बताया कि उनकी जमीन भारत-पाक सीमा पर स्थित है। वर्षाें से हमें आज तक कभी भी खेतीबाड़ी से मुनाफा नहीं हुआ है। कभी गोलाबारी की मार तो कभी मौसम की मार। अब कोरोना के भय से हमारा घरों से निकलना मुश्किल हो गया है, हम कैसे खेतीबाड़ी कर पाएंगेे।
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किसानों के अनुसार उनकी धान की फसल खेतों में ही बेमौसम बारिश से खराब हो गई। गेहूं की फसल का भी बारिश की वजह से काफी नुकसान हुआ है। अब हम कोरोना के भय के चलते खेतों में काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते किसान दल ने किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ करने की मांग कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि तीन चार सीजन से हमें खेती-बाड़ी से नुकसान हो रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। सरकार ने हमारे खातों में जो दो-दो हजार रुपये डाल कर मदद की है उसके हम आभारी हैं, लेकिन दो हजार से कुछ नहीं हो सकता। इसलिए हमारे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिये लोन की किश्त को माफ किया जाए।
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किसान बलबीर सिंह, स्वर्ण सिंह, चगर सिंह आदि ने बताया कि उनकी जमीन भारत-पाक सीमा पर स्थित है। वर्षाें से हमें आज तक कभी भी खेतीबाड़ी से मुनाफा नहीं हुआ है। कभी गोलाबारी की मार तो कभी मौसम की मार। अब कोरोना के भय से हमारा घरों से निकलना मुश्किल हो गया है, हम कैसे खेतीबाड़ी कर पाएंगेे।