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सिंचाई विभाग के खिलाफ किसानों में रोष
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जयौडियां के गांव मुट्ठी मैरा के ग्रामीणों फ्लड विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन
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सांबा। सरकार की ओर से अब किसानों से नहरों के सिंचाई पानी पर भी कर वसूला जाएगा। इसकी नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई है। इसको लेकर किसानों में काफी रोष है।
किसान राज कुमार, किसान सुरिंद्र सिंह, किसान मनोहर लाल, रामगढ़ कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रधान यशपाल शर्मा ने सरकार के निर्णय का विरोध किया है। किसानों के अनुसार पहले से किसान कई आपदाओं का सामना कर रहे हैं, जिसमें कुदरती आपदा भी शामिल हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि सिंचाई पानी पर लगाए जाने वाले सिंचाई कर को बंद किया जाए। उनके अनुसार सरकार किसानों की आय बढ़ाने के वादे कर रही थी, जबकि सरकार किसानों पर अधिक बोझ लाद कर किसानों को परेशान करने में जुटी है।
किसानों पर आबियाना वसूलने पर की निंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
मीरां साहिब। कस्बे में आम आदमी पार्टी के जम्मू संभाग के संयोजक ओम प्रकाश खजूरिया ने प्रेसवार्ता कर आबियाना वसूली के फैैसले की निंदा की। उन्होंने शासन से इसे वापस लेने की मांग की।
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खजूरिया ने कहा कि तत्कालीन भाजपा-पीडीपी सरकार द्वारा किसानों से वसूली बंद की गई थी। अब प्रदेश शासन ने अधिसूचना जारी कर फिर से किसानों से नहरी पानी की प्रति हेक्टेयर से वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान को पहले ही उनकी फसलों की काफी कम कीमत मिल रही है। अब फिर से आबियाना लगा उन पर बोझ डालने का फैसला ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि खाद्य की कीमतों में बढ़ोतरी करने के साथ डीजल, बीज, कीटनाशक दवाइयों आदि खरीदने पर किसानों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
खजूरिया ने कहा कि नहरों की जर्जर हालत बनी होने पर किसानों को सुचारु रूप से नहरी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। पहले किसानों को नहरी पानी की आपूर्ति करने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसानों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। एक और केंद्र सरकार किसानों की आय दो गुना किए जाने की दुहाई दे रही, दूसरी और किसानों पर आबियाना थोपने का फैसला किसान विरोधी है। यही नहीं कई स्थानों पर लिफ्ट खराब होने पर किसानों को कई वर्षों से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही। कई गार किसानों की ओर से विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद सिंचाई विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर आबियाना वसूली का फैसला सरकार ने वापस नहीं लिया, तो आम आदमी पार्टी आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शन करेगी।
आबियाना शुल्क लागू करने पर स्वागत
किसानों ने कहा, इससे सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग की जवाबदेही होगी सुनिश्चित
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सात वर्षों बाद फिर से आबियाना शुल्क लागू करने पर किसानों ने केंद्र के फैसले को सराहनीय बताया है। इस फैसले से विभाग की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
कृषि प्रधान क्षेत्र अरनिया के लोगों का मुख्य व्यवसाय काश्तकारी है। ऐसे में सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा। कीमती लाल, बाबू राम, मोहिंदर सिंह, टिंकू शर्मा, बलदेव राज, राज कुमार व बॉबी नामक आदि क्षेत्र के किसानों का कहना है कि 2015 में जब राज्य सरकार ने किसानों का आबियाना शुल्क माफ करने की घोषणा की। मात्र एक वर्ष बाद ही इसका सिंचाई पर विपरीत असर पड़ना शुरू हो गया। तब से आज तक न तो नहरों की सही प्रकार से सफाई हो सकी और न ही नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंच सका। यहां तक की बीते इन सात वर्षों में बड़ी (डिस्ट्रीब्यूटरी ) नहरें छोटी (माइनर) बनती गई और जो माइनर थी, उसको नालियों (आऊट लेट) में तब्दील कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह कि पीक सीजन में कई बार सफाई का फंड भी उपलब्ध नहीं कराया जाता था।
किसानों का कहना यह भी है कि चूंकि अब सिंचाई शुल्क लागू हो चूका है अब सिंचाई व बाद नियंत्रण विभाग की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। बता दें कि 2015 में पीडीपी व भाजपा सरकार ने किसानों का आबियाना माफ करने कि घोषणा की थी, तो उस समय अंदर खाने किसानों ने इस आदेश को किसानों से मालिकाना हक छीनने का बताया था।
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किसान राज कुमार, किसान सुरिंद्र सिंह, किसान मनोहर लाल, रामगढ़ कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रधान यशपाल शर्मा ने सरकार के निर्णय का विरोध किया है। किसानों के अनुसार पहले से किसान कई आपदाओं का सामना कर रहे हैं, जिसमें कुदरती आपदा भी शामिल हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि सिंचाई पानी पर लगाए जाने वाले सिंचाई कर को बंद किया जाए। उनके अनुसार सरकार किसानों की आय बढ़ाने के वादे कर रही थी, जबकि सरकार किसानों पर अधिक बोझ लाद कर किसानों को परेशान करने में जुटी है।
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किसानों पर आबियाना वसूलने पर की निंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
मीरां साहिब। कस्बे में आम आदमी पार्टी के जम्मू संभाग के संयोजक ओम प्रकाश खजूरिया ने प्रेसवार्ता कर आबियाना वसूली के फैैसले की निंदा की। उन्होंने शासन से इसे वापस लेने की मांग की।
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खजूरिया ने कहा कि तत्कालीन भाजपा-पीडीपी सरकार द्वारा किसानों से वसूली बंद की गई थी। अब प्रदेश शासन ने अधिसूचना जारी कर फिर से किसानों से नहरी पानी की प्रति हेक्टेयर से वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान को पहले ही उनकी फसलों की काफी कम कीमत मिल रही है। अब फिर से आबियाना लगा उन पर बोझ डालने का फैसला ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि खाद्य की कीमतों में बढ़ोतरी करने के साथ डीजल, बीज, कीटनाशक दवाइयों आदि खरीदने पर किसानों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
खजूरिया ने कहा कि नहरों की जर्जर हालत बनी होने पर किसानों को सुचारु रूप से नहरी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। पहले किसानों को नहरी पानी की आपूर्ति करने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसानों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। एक और केंद्र सरकार किसानों की आय दो गुना किए जाने की दुहाई दे रही, दूसरी और किसानों पर आबियाना थोपने का फैसला किसान विरोधी है। यही नहीं कई स्थानों पर लिफ्ट खराब होने पर किसानों को कई वर्षों से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही। कई गार किसानों की ओर से विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद सिंचाई विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर आबियाना वसूली का फैसला सरकार ने वापस नहीं लिया, तो आम आदमी पार्टी आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शन करेगी।
आबियाना शुल्क लागू करने पर स्वागत
किसानों ने कहा, इससे सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग की जवाबदेही होगी सुनिश्चित
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सात वर्षों बाद फिर से आबियाना शुल्क लागू करने पर किसानों ने केंद्र के फैसले को सराहनीय बताया है। इस फैसले से विभाग की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
कृषि प्रधान क्षेत्र अरनिया के लोगों का मुख्य व्यवसाय काश्तकारी है। ऐसे में सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा। कीमती लाल, बाबू राम, मोहिंदर सिंह, टिंकू शर्मा, बलदेव राज, राज कुमार व बॉबी नामक आदि क्षेत्र के किसानों का कहना है कि 2015 में जब राज्य सरकार ने किसानों का आबियाना शुल्क माफ करने की घोषणा की। मात्र एक वर्ष बाद ही इसका सिंचाई पर विपरीत असर पड़ना शुरू हो गया। तब से आज तक न तो नहरों की सही प्रकार से सफाई हो सकी और न ही नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंच सका। यहां तक की बीते इन सात वर्षों में बड़ी (डिस्ट्रीब्यूटरी ) नहरें छोटी (माइनर) बनती गई और जो माइनर थी, उसको नालियों (आऊट लेट) में तब्दील कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह कि पीक सीजन में कई बार सफाई का फंड भी उपलब्ध नहीं कराया जाता था।
किसानों का कहना यह भी है कि चूंकि अब सिंचाई शुल्क लागू हो चूका है अब सिंचाई व बाद नियंत्रण विभाग की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। बता दें कि 2015 में पीडीपी व भाजपा सरकार ने किसानों का आबियाना माफ करने कि घोषणा की थी, तो उस समय अंदर खाने किसानों ने इस आदेश को किसानों से मालिकाना हक छीनने का बताया था।