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हादसे को न्योता दे रही पांच दशक पुरानी पानी की टंकी
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जर्जर हो चुकी पानी की टंकी।
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अरनिया। कस्बे के वार्ड-सात में पीएचई की तरफ से बनाई गई पानी की टंकी काफी जर्जर स्थिति में है। इसके कभी भी ढह जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। टंकी की खस्ता हालत से लोगों की जानमाल पर खतरा मंडराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे जल्द तोड़ने की विभाग से गुहार लगाई है।
वर्ष 1972-73 में जलपूर्ति के लिए बनाई गई इस टंकी के चारों तरफ सैकड़ों परिवार रह रहे हैं। स्थानीय निवासी रोहित लाल का कहना है कि कई बार अवगत कराने के बाद भी न तो विभाग ने इस ओर ध्यान दिया और न ही नगर पालिका ने इस पर गंभीरता दिखाई है। गोलाबारी के समय भी इसके गिरने की आशंका बनी रहती है। जो फिलहाल बंद है मगर पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है।
सुरिंदर कुमार ने कहा कि स्थानीय लोगों तक जलपूर्ति पहुंचाने के लिए विभाग ने इस टंकी को 1972-73 में बनाया था। मगर 2004-05 में भूकंप आने के बाद इससे आपूर्ति बंद कर लोगों के घरों में सीधे जलापूर्ति शुरू की गई। जो आज भी जारी है। मगर जगह-जगह से टूटी इस टंकी की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि गोलाबारी के धमाकों, आंधी व कम तीव्रता वाला भूकंप भी इसे अपनी चपेट में ले सकता है। भगवान न करे कि ऐसा हो जाए, अगर ऐसा हो जाएगा तो सैकड़ों परिवार इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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मुकेश कुमार का कहना है कि करीब 50-60 फीट की ऊंचाई के साथ सामने खड़ी इस टंकी को गिराने के लिए हमने कई बार नपा अध्यक्ष व विभाग को बताया, मगर कोई लाभ नहीं हुआ। शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
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इसे डिस्मेंटल कराने के लिए मैंने पहले ही उच्च अधिकारियों को बता दिया है। प्रक्रिया पूरी होते ही इसे तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-अश्विनी सेठ, एईई, जल शक्ति विभाग
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मैंने पहले भी कई बार जल शक्ति विभाग को बताया और सोमवार को फिर से मुख्य अभियंता या एक्सईएन को इस संबंध में अवगत करा दिया जाएगा। ताकि अनहोनी की इस आशंका को रोका जा सके।
-रमेश सैनी, अध्यक्ष, नगर पालिका, अरनिया
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वर्ष 1972-73 में जलपूर्ति के लिए बनाई गई इस टंकी के चारों तरफ सैकड़ों परिवार रह रहे हैं। स्थानीय निवासी रोहित लाल का कहना है कि कई बार अवगत कराने के बाद भी न तो विभाग ने इस ओर ध्यान दिया और न ही नगर पालिका ने इस पर गंभीरता दिखाई है। गोलाबारी के समय भी इसके गिरने की आशंका बनी रहती है। जो फिलहाल बंद है मगर पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है।
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सुरिंदर कुमार ने कहा कि स्थानीय लोगों तक जलपूर्ति पहुंचाने के लिए विभाग ने इस टंकी को 1972-73 में बनाया था। मगर 2004-05 में भूकंप आने के बाद इससे आपूर्ति बंद कर लोगों के घरों में सीधे जलापूर्ति शुरू की गई। जो आज भी जारी है। मगर जगह-जगह से टूटी इस टंकी की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि गोलाबारी के धमाकों, आंधी व कम तीव्रता वाला भूकंप भी इसे अपनी चपेट में ले सकता है। भगवान न करे कि ऐसा हो जाए, अगर ऐसा हो जाएगा तो सैकड़ों परिवार इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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मुकेश कुमार का कहना है कि करीब 50-60 फीट की ऊंचाई के साथ सामने खड़ी इस टंकी को गिराने के लिए हमने कई बार नपा अध्यक्ष व विभाग को बताया, मगर कोई लाभ नहीं हुआ। शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
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इसे डिस्मेंटल कराने के लिए मैंने पहले ही उच्च अधिकारियों को बता दिया है। प्रक्रिया पूरी होते ही इसे तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-अश्विनी सेठ, एईई, जल शक्ति विभाग
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मैंने पहले भी कई बार जल शक्ति विभाग को बताया और सोमवार को फिर से मुख्य अभियंता या एक्सईएन को इस संबंध में अवगत करा दिया जाएगा। ताकि अनहोनी की इस आशंका को रोका जा सके।
-रमेश सैनी, अध्यक्ष, नगर पालिका, अरनिया