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जल शक्ति विभाग से खफा लोगों ने ट्यूबवेल में जड़ा ताला
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अरनिया। जल शक्ति विभाग की कार्यशैली पर जितने भी सवाल खड़े करें, उतने ही कम हैं। या यूं कहिए कि सुधार लाने की कितनी भी कोशिश कर लो मगर यह नहीं सुधरने वाले। विभाग की कार्यशैली से तंग आ चुके लोगों ने आखिरकार रविवार को क्षेत्र के गांव चक्क रामदास में लगे ट्यूबवेल पर ताला जड़ दिया। आरोप है कि इनकी जितनी भी मिन्नतें कर लो मगर यह नहीं सुधरने वाले। उल्टा लोगों को आंखें दिखाकर कहते हैं कि जो करना है कर लो।
भारत भूषण सैनी, रुलदू राम, राम पाल, राकेश शर्मा, सरवन सिंह, आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते तीन वर्षों से यह ट्यूबवेल बंद पड़ा है। इस पर आस पास के सात गांव निर्भर हैं मगर पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई। समस्य बताते हैं तो उल्टा जबाब मिलता है। कहते हैं कि जो करना है, कर लो। इस ट्यूबवेल को तैयार करने में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किया गया है मगर फिर भी लोगों को पानी नहीं मिला। पुरानी पाइपें निकालकर बेच दी जाती हैं जिसे नीचे से लेकर ऊपर तक सभी मिल बांट कर खाते हैं।
दूसरी ओर आदर्श गांव अला में भी जल शक्ति विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठना शुरू हो चुके हैं। जसवीर सिंह, ओम प्रकाश, बिशन दास, तरसेम लाल, रमेश लाल, आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते करीब आठ वर्षों से गांव के लिए लगाए गए ट्यूबवेल से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। हालांकि, गत वर्ष यह समस्या मीडिया में उजागर होने के करीब एक माह बाद जलापूर्ति जरूर शुरू हो हुई लेकिन जगह जगह से पाइपों के रिसाव के चलते विभाग ने फिर काम बंद कर दिया। इस संबंध में विभागीय एईई सुनील सेठ का कहना है कि जल्द ही लोगों के हित में कार्य करके जलापूर्ति बहाल की जाएगी।
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भारत भूषण सैनी, रुलदू राम, राम पाल, राकेश शर्मा, सरवन सिंह, आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते तीन वर्षों से यह ट्यूबवेल बंद पड़ा है। इस पर आस पास के सात गांव निर्भर हैं मगर पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई। समस्य बताते हैं तो उल्टा जबाब मिलता है। कहते हैं कि जो करना है, कर लो। इस ट्यूबवेल को तैयार करने में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किया गया है मगर फिर भी लोगों को पानी नहीं मिला। पुरानी पाइपें निकालकर बेच दी जाती हैं जिसे नीचे से लेकर ऊपर तक सभी मिल बांट कर खाते हैं।
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दूसरी ओर आदर्श गांव अला में भी जल शक्ति विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठना शुरू हो चुके हैं। जसवीर सिंह, ओम प्रकाश, बिशन दास, तरसेम लाल, रमेश लाल, आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते करीब आठ वर्षों से गांव के लिए लगाए गए ट्यूबवेल से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। हालांकि, गत वर्ष यह समस्या मीडिया में उजागर होने के करीब एक माह बाद जलापूर्ति जरूर शुरू हो हुई लेकिन जगह जगह से पाइपों के रिसाव के चलते विभाग ने फिर काम बंद कर दिया। इस संबंध में विभागीय एईई सुनील सेठ का कहना है कि जल्द ही लोगों के हित में कार्य करके जलापूर्ति बहाल की जाएगी।
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