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पीडीडी के निजीकरण से पांच हजार कर्मी होंगे प्रभावित
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अखनूर में पीडीडी के निजीकरण के खिलाफ के प्रदर्शन करते कर्मचारी।
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अखनूर। केंद्रीय अराजपत्रित विद्युत कर्मचारी संघ ने विद्युत विकास विभाग (पीडीडी) का निजीकरण किए जाने के खिलाफ सोमवार को कस्बे के बिजलीघर में प्रदर्शन किया। इसका नेतृत्व जिला अध्यक्ष राज कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने पहले जेके पावर डेवलपमेंट विभाग को विभिन्न निगमों में बंद कर दिया है और अब पीडीडी का निजीकरण किया जा रहा है जो कर्मचारी विरोधी और उपभोक्ता विरोधी कदम होगा।
उन्होंने कहा कि निजीकरण से पांच हजार से अधिक डेलीवेजर और श्रमिक प्रभावित होंगे। जो नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कई महीनों से अवैतनिक हैं। निजीकरण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। प्रदर्शन में प्रांतीय सचिव सुरजीत खजूरिया बोधराज, किरण बाला, राकेश कुमार, पवन कुमार आदि शामिल रहे। संवाद
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पीडीडी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
बाड़ी ब्राह्मणा। सबडिवीजन ऑफिस में सोमवार को पीडीडी कर्मचारियों ने सरकार द्वारा विभाग को निजी क्षेत्र में लाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इसमें सभी कर्मचारी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर यूटी बन गया है। अभी तक यूटी के नियमों व कानूनों से लोग रूबरू नहीं हुए हैं। दूसरी ओर सरकार ने बिजली विभाग को निजी क्षेत्र में लाने की कवायद तेज कर दी है। जो कर्मचारियों के लिए अन्याय पूर्ण रवैया है।
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उन्होंने कहा कि प्राइवेट होने के बाद मौजूदा स्टाफ को काफी परेशानियां आएंगी। क्योंकि आने वाले दिनों में उन्हें भी ठेकेदार के नीचे काम करने के लिए कहा जाएगा और इन्हें भी प्राइवेट कंपनी में मिला दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो जम्मू-कश्मीर में बिजली विभाग की तरफ से कोई भी नई भर्ती नहीं होगी। सारा कामकाज ठेकेदार के अधीन चला जाएगा और वह अपनी मर्जी से दूसरे राज्यों के कर्मचारियों को तैनात करेंगे।
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उन्होंने कहा कि निजीकरण से पांच हजार से अधिक डेलीवेजर और श्रमिक प्रभावित होंगे। जो नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कई महीनों से अवैतनिक हैं। निजीकरण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। प्रदर्शन में प्रांतीय सचिव सुरजीत खजूरिया बोधराज, किरण बाला, राकेश कुमार, पवन कुमार आदि शामिल रहे। संवाद
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पीडीडी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
बाड़ी ब्राह्मणा। सबडिवीजन ऑफिस में सोमवार को पीडीडी कर्मचारियों ने सरकार द्वारा विभाग को निजी क्षेत्र में लाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इसमें सभी कर्मचारी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर यूटी बन गया है। अभी तक यूटी के नियमों व कानूनों से लोग रूबरू नहीं हुए हैं। दूसरी ओर सरकार ने बिजली विभाग को निजी क्षेत्र में लाने की कवायद तेज कर दी है। जो कर्मचारियों के लिए अन्याय पूर्ण रवैया है।
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उन्होंने कहा कि प्राइवेट होने के बाद मौजूदा स्टाफ को काफी परेशानियां आएंगी। क्योंकि आने वाले दिनों में उन्हें भी ठेकेदार के नीचे काम करने के लिए कहा जाएगा और इन्हें भी प्राइवेट कंपनी में मिला दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो जम्मू-कश्मीर में बिजली विभाग की तरफ से कोई भी नई भर्ती नहीं होगी। सारा कामकाज ठेकेदार के अधीन चला जाएगा और वह अपनी मर्जी से दूसरे राज्यों के कर्मचारियों को तैनात करेंगे।