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J&K: ट्रेड पालिसी जारी होने के दो माह बाद भी ई-कामर्स प्लेटफार्म मुहैया कराने की कवायद नहीं हुई शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 14 Oct 2018 08:35 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के कारीगरों और बुनकरों के लिए वर्चुअल शोरूम खोलने की कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। इस साल बजट घोषणा के बाद अगस्त माह के पहले सप्ताह में रियासत की पहली ट्रेड एंड एक्सपोर्ट पालिसी घोषित हुई। 10 अक्तूबर को पालिसी का जीओ जारी हुए। दो माह गुजर गए हैं, लेकिन जिम्मेदार इस दिशा में दो कदम भी आगे नहीं बढ़े हैं।
रियासत की इस पहली ट्रेड एंड एक्सपोर्ट पालिसी का एक बड़ा हिस्सा कारीगरों और बुनकरों के लिए उठाए जाने वाले कदमों को समर्पित है। इसमें खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंच बनाने के लिए उत्पादों को ई-कामर्स प्लेटफार्म मुहैया कराने और सभी कारीगरों, बुनकरों को लिंक किए जाने की योजना थी। ये कवायद ऐसे शहरों के लिए थी, जहां रियासत के रिटेल स्टोर मौजूद नहीं।
लेकिन वर्चुअल स्टोर रूम बनाने की जगह उनकी दूसरी दिक्कतें सिर उठाने लगी। मसलन बहुत से कारीगरों के जीएसटी में रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से वह बाहर से मिलने वाले आर्डरों को भी पूरा नहीं कर सके। विभाग इन कारीगरों और बुनकरों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए जागरूकता कैंप कर आगे लाने की बात कह जरूर रहा है, अकेले घाटी में 40 हजार परिवारों का घर कारीगरी के जयिे चल रहा है। लेकिन जिस स्पीड से सेंट्रलाइज्ड वेब बेस्ड ई-कामर्स पोर्टल को लेकर कवायद चल रही है, उसमें उसका तैयार हो पाना दूर की कौड़ी नजर आता है।
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रियासत की इस पहली ट्रेड एंड एक्सपोर्ट पालिसी का एक बड़ा हिस्सा कारीगरों और बुनकरों के लिए उठाए जाने वाले कदमों को समर्पित है। इसमें खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंच बनाने के लिए उत्पादों को ई-कामर्स प्लेटफार्म मुहैया कराने और सभी कारीगरों, बुनकरों को लिंक किए जाने की योजना थी। ये कवायद ऐसे शहरों के लिए थी, जहां रियासत के रिटेल स्टोर मौजूद नहीं।
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लेकिन वर्चुअल स्टोर रूम बनाने की जगह उनकी दूसरी दिक्कतें सिर उठाने लगी। मसलन बहुत से कारीगरों के जीएसटी में रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से वह बाहर से मिलने वाले आर्डरों को भी पूरा नहीं कर सके। विभाग इन कारीगरों और बुनकरों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए जागरूकता कैंप कर आगे लाने की बात कह जरूर रहा है, अकेले घाटी में 40 हजार परिवारों का घर कारीगरी के जयिे चल रहा है। लेकिन जिस स्पीड से सेंट्रलाइज्ड वेब बेस्ड ई-कामर्स पोर्टल को लेकर कवायद चल रही है, उसमें उसका तैयार हो पाना दूर की कौड़ी नजर आता है।
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