सहमा सा श्रीनगर, न लोगों की भीड़ और न बाजार में रौनक
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सैलाब के बाद शहर सहमा-सहमा सा दिखता है। तमाम होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं। न पर्यटकों की भीड़ है और न खरीदारी की चहल-पहल। अलगाववादियों द्वारा हर शुक्रवार को होने वाले बंद के आयोजनों और आतंकवादियों की हरकतों के कारण इस शहर को कर्फ्यू जैसी स्थिति झेलने की आदत सी हो गई है।
लेकिन इस बार सैलाब की तबाही ने ये हालात पैदा किए हैं। सैलाब के बाद चारों तरफ एक अजीब सी दुर्गंध फिजां में बस गई है जो महामारी के खतरे का आभास कराती है। लिहाजा, रियासत सरकार भी अभी तीन महीने तक पर्यटन व्यवसाय को शुरू करने के पक्ष में नहीं है। होटलों को सफाई के पूरे इंतजाम के बाद ही पर्यटकों को ठहराने की हिदायत दी गई है।
पानी की सप्लाई ठप है। बिजली आपूर्ति शुरू तो हुई है लेकिन कटौती अधिक हो रही है। होटल कर्मचारी भी खुद के लिए उबला हुआ पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। केबल कनेक्शन नहीं है। ऐसे में किसी पर्यटक को ठहराया नहीं जा सकता। अधिकांश होटलों में सफाई का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इनमें ताला ही लटका है।
सरकारी गेस्ट हाउसों को आशियाना बना लिया
जिन सरकारी अफसरों के घरों में पानी घुसा, उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउसों को आशियाना बना लिया है। कई सरकारी गेस्ट हाउस भी पानी में डूब गए थे। नतीजतन अगले तीन-चार महीने तक पर्यटन के लिए स्थिति माकूल नहीं लगती है। राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का अहम योगदान रहा है। आतंकी घटनाओं में कमी आई तो 2012 में 13 लाख देशी-विदेशी पर्यटकों ने कश्मीर की ओर रुख किया।
पिछले साल इसमें एक लाख की कमी आ गई। इस साल मई के बाद से पर्यटकों की आमद बढ़ने से इस व्यवसाय से जुडे़ लोगों की उम्मीदें परवान चढ़ी थीं लेकिन सैलाब इस पर कचरा डाल गया। सैलाब ने झेलम के हाउस बोट को ज्यादा नुकसान पहुंचाया। हाउस बोट न्यू शहजादा के मालिक गुलाम अहमद कहते हैं कि भारी नुकसान हुआ है और पर्यटकों की आमद बंद होने से आगे आमदनी की भी उम्मीद नहीं है।
राजबाग में झेलम नदी पर बने हाउस बोट न्यू जाफरान डीलक्स, विक्टोरिया पैलेस और शाहीन पैलेस में तबाही के निशान मौजूद हैं। पहली बार श्रीनगर पर्यटक विहीन हुआ है।