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लंबित परियोजनाएं बीम्स पोर्टल से हटाएं : मुख्य सचिव
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- राशि जारी करने को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाए
- 2024-25 के लिए बजट उपयोग की प्रगति की समीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने प्रशासनिक सचिवों को बीम्स पर विभागीय कार्यों की सूची की समीक्षा करने के साथ लंबे समय से लंबित अधूरी परियोजनाओं को पोर्टल से हटाने पर जोर दिया है। बीम्स पर राशि जारी करने को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि कृषि उत्पादन विभाग में मौसमी गतिविधियां, राजस्व और वन विभागों के माध्यम से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके।
मुख्य सचिव ने मंगलवार को प्रशासनिक सचिवों के साथ बैठक कर जम्मू में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के कार्यान्वयन का आकलन करने के अलावा 2024-25 के लिए लेखानुदान (वीओए) पारित होने के बाद जारी किए गए धन के उपयोग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से जेकेपीसीसी से पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के वित्त पोषण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा, ताकि उन्हें शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने उक्त संगठन से अधिक किश्तें प्राप्त करने के लिए नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित कार्यों पर खर्च में तेजी लाने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने जेकेआईडीएफसी वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधूरी परियोजनाओं की शेष धनराशि को नियमित बजट से समायोजित करने को कहा। उन्होंने मनरेगा के साथ अभिसरण के तहत अंतिम क्षेत्र तक सिंचाई सुविधाएं सुनिश्चित करने और महत्वपूर्ण गांव के बुनियादी ढांचे के कार्यों को शुरू करने की संभावना तलाशने पर जोर दिया।
गैर-कर राजस्व संग्रहण के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसे पिछले वर्ष से और अधिक बढ़ाने के प्रयास तेज करने को कहा। उन्होंने प्रौद्योगिकी और अन्य अपेक्षित उपायों को अपनाकर इस संग्रह को और अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया। प्रधान सचिव वित्त संतोष डी वैद्य ने 2014-15 से लेकर पिछले दशक के दौरान इसके खर्च का संक्षिप्त विश्लेषण दिया। उन्होंने यूटी में अब तक पंजीकृत वर्तमान व्यय प्रवृत्तियों के बारे में विस्तार से बताया। इसके साथ कार्यों का व्यय-वार वर्गीकरण, उनके पूरा होने में दर्ज देरी, राजस्व, पूंजी और स्वयं के संसाधनों के व्यय के अलावा प्रत्येक योजना से संबंधित मुद्दों और परियोजनाओं के सुचारू निष्पादन में बाधाओं को उजागर किया गया। बताया गया कि पिछले 5-6 वर्षों के दौरान परियोजनाओं के पूरा होने और बजट दोनों में भारी उछाल देखा गया है। 2014-15 के दौरान कुल खर्च सिर्फ 35681 करोड़ रुपये था जो 2023-24 के दौरान बढ़कर 87501 करोड़ रुपये हो गया। इसमें कहा गया कि पूंजीगत व्यय 2014-15 में मात्र 9330 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 22628 करोड़ रुपये हो गया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सीएसएस के तहत हुई प्राप्तियों और व्यय के बारे में भी जानकारी दी गई। यहां के विभागों को 2023-24 के लिए 110 योजनाओं के तहत 10324 करोड़ रुपये की राशि मिली, जो 2021-22 के दौरान प्राप्त राशि से लगभग दोगुनी थी। इस वर्ष के बजट के बारे में बताया गया कि अब तक पंजीकृत कुल प्राप्तियां 9993 करोड़ रुपये और व्यय लगभग 11465 करोड़ रुपये है। संसद ने देश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नियमित बजट पारित होने तक यूटी के लिए वीओए पारित किया है।
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- 2024-25 के लिए बजट उपयोग की प्रगति की समीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने प्रशासनिक सचिवों को बीम्स पर विभागीय कार्यों की सूची की समीक्षा करने के साथ लंबे समय से लंबित अधूरी परियोजनाओं को पोर्टल से हटाने पर जोर दिया है। बीम्स पर राशि जारी करने को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि कृषि उत्पादन विभाग में मौसमी गतिविधियां, राजस्व और वन विभागों के माध्यम से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके।
मुख्य सचिव ने मंगलवार को प्रशासनिक सचिवों के साथ बैठक कर जम्मू में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के कार्यान्वयन का आकलन करने के अलावा 2024-25 के लिए लेखानुदान (वीओए) पारित होने के बाद जारी किए गए धन के उपयोग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से जेकेपीसीसी से पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के वित्त पोषण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा, ताकि उन्हें शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने उक्त संगठन से अधिक किश्तें प्राप्त करने के लिए नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित कार्यों पर खर्च में तेजी लाने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने जेकेआईडीएफसी वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधूरी परियोजनाओं की शेष धनराशि को नियमित बजट से समायोजित करने को कहा। उन्होंने मनरेगा के साथ अभिसरण के तहत अंतिम क्षेत्र तक सिंचाई सुविधाएं सुनिश्चित करने और महत्वपूर्ण गांव के बुनियादी ढांचे के कार्यों को शुरू करने की संभावना तलाशने पर जोर दिया।
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गैर-कर राजस्व संग्रहण के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसे पिछले वर्ष से और अधिक बढ़ाने के प्रयास तेज करने को कहा। उन्होंने प्रौद्योगिकी और अन्य अपेक्षित उपायों को अपनाकर इस संग्रह को और अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया। प्रधान सचिव वित्त संतोष डी वैद्य ने 2014-15 से लेकर पिछले दशक के दौरान इसके खर्च का संक्षिप्त विश्लेषण दिया। उन्होंने यूटी में अब तक पंजीकृत वर्तमान व्यय प्रवृत्तियों के बारे में विस्तार से बताया। इसके साथ कार्यों का व्यय-वार वर्गीकरण, उनके पूरा होने में दर्ज देरी, राजस्व, पूंजी और स्वयं के संसाधनों के व्यय के अलावा प्रत्येक योजना से संबंधित मुद्दों और परियोजनाओं के सुचारू निष्पादन में बाधाओं को उजागर किया गया। बताया गया कि पिछले 5-6 वर्षों के दौरान परियोजनाओं के पूरा होने और बजट दोनों में भारी उछाल देखा गया है। 2014-15 के दौरान कुल खर्च सिर्फ 35681 करोड़ रुपये था जो 2023-24 के दौरान बढ़कर 87501 करोड़ रुपये हो गया। इसमें कहा गया कि पूंजीगत व्यय 2014-15 में मात्र 9330 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 22628 करोड़ रुपये हो गया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सीएसएस के तहत हुई प्राप्तियों और व्यय के बारे में भी जानकारी दी गई। यहां के विभागों को 2023-24 के लिए 110 योजनाओं के तहत 10324 करोड़ रुपये की राशि मिली, जो 2021-22 के दौरान प्राप्त राशि से लगभग दोगुनी थी। इस वर्ष के बजट के बारे में बताया गया कि अब तक पंजीकृत कुल प्राप्तियां 9993 करोड़ रुपये और व्यय लगभग 11465 करोड़ रुपये है। संसद ने देश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नियमित बजट पारित होने तक यूटी के लिए वीओए पारित किया है।
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