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Jammu News: अरनिया तहसील पर भारी पड़ रहा अतिरिक्त कार्यभार
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तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और नपा अधिकारी का पद अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे
दफ्तर में अधिकारी न होने से लोग हो रहे परेशान, हफ्ते में एक या दो दिन आ रहे अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। तहसील अरनिया पिछले छह महीने से अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे चल रही है। यहां तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और नपा अधिकारी का पद अतिरिक्त कार्यभार पर चल रहा है। इन पदों पर तैनात अतिरिक्त कार्यभार वाले अधिकारी अपने दफ्तरों पर पूर्ण ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। निचले स्तर के अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। इसके चलते तहसील की व्यवस्था बिगड़ चुकी है। लोग दिन-प्रतिदिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। हफ्ते में एक से दो दिन बमुश्किल अधिकारी दफ्तर में पहुंच रहे हैं।
अरनिया की तहसीलदार पुणिका का तबादला जनवरी के पहले हफ्ते में हो गया था। उसके बाद तहसीलदार सुचेतगढ़ निर्भय शर्मा को अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया था। उसके बाद अनंत द्विवेदी को एक महीने के लिए अरनिया का तहसीलदार नियुक्त किया गया था। उसके बाद फिर से निर्भय शर्मा को अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।
खंड विकास अधिकारी अरनिया रजनी बाला का तबादला लगभग दो महीने पहले कर दिया गया था। उसके बाद मीरां साहिब के खंड विकास अधिकारी गुरजीत सिंह को अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। वह भी हफ्ते में एक से दो दिन बमुश्किल दफ्तर पहुंच रहे हैं। इससे दूरदराज के देहात क्षेत्रों से लोग काम करवाने के लिए दरबदर हो रहे हैं।
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अरनिया नगरपालिका के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर का पद भी अतिरिक्त कार्यभार के सहारे चल रहा है। 31 दिसंबर को नपा अधिकारी कैलाश चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जोधराज भगत को नपा अधिकारी अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया था। पिछले एक महीने से उनका तबादला हो गया है। आरएसपुरा नगरपालिका के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रवि सैनी को अरनिया नगरपालिका का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। दोनों नगरपालिकाओं में ध्यान केंद्रित कर पाना मुश्किल हो रहा है। अरनिया नगरपालिका में स्थायी तौर पर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त न होने से कस्बे की व्यवस्था चरमरा गई है। हालांकि पिछले एक महीने से रवि सैनी ने कस्बे में व्यवस्था को सुचारू किया है लेकिन उसके बावजूद भी कई कमियां सामने आ रही हैं।
अरनिया में इन तीन महत्वपूर्ण पदों पर अतिरिक्त कार्यभार के अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। इससे अरनिया क्षेत्र पिछड़ता चला जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इन पदों पर अधिकारियों का पूर्ण रूप से बैठना लोगों के हित में होता है। आज के दौर में हर प्रकार की योजना के लिए फॉर्म सत्यापित करना आवश्यक हो गया है लेकिन लोगों को अधिकारी दफ्तर में मिलते ही नहीं हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। लिहाजा प्रशासन और सरकार को अरनिया कस्बे की बिगड़ी हुई व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
इस मुद्दे पर ग्रामीण मुकेश कुमार ने बताया कि विकास खंड अधिकारी के दफ्तर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कार्य होते हैं लेकिन निचले स्तर के अधिकारी टालमटोल करते रहते हैं। लिहाजा स्थायी तौर पर खंड विकास अधिकारी की नियुक्ति कर देनी चाहिए। इस मुद्दे पर कुलदीप राज ने बताया कि वह जमीनी दस्तावेज से जुड़े कार्य लेकर दफ्तर जाते हैं लेकिन वहां पर तहसीलदार न होने को लेकर वापस भेज दिया जाता है। ऐसे हालात में जमीनी दस्तावेज से जुड़े मुद्दे लटक रहे हैं। लिहाजा स्नायी तौर पर तहसीलदार की नियुक्ति कर देनी चाहिए।
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दफ्तर में अधिकारी न होने से लोग हो रहे परेशान, हफ्ते में एक या दो दिन आ रहे अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। तहसील अरनिया पिछले छह महीने से अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे चल रही है। यहां तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और नपा अधिकारी का पद अतिरिक्त कार्यभार पर चल रहा है। इन पदों पर तैनात अतिरिक्त कार्यभार वाले अधिकारी अपने दफ्तरों पर पूर्ण ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। निचले स्तर के अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। इसके चलते तहसील की व्यवस्था बिगड़ चुकी है। लोग दिन-प्रतिदिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। हफ्ते में एक से दो दिन बमुश्किल अधिकारी दफ्तर में पहुंच रहे हैं।
अरनिया की तहसीलदार पुणिका का तबादला जनवरी के पहले हफ्ते में हो गया था। उसके बाद तहसीलदार सुचेतगढ़ निर्भय शर्मा को अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया था। उसके बाद अनंत द्विवेदी को एक महीने के लिए अरनिया का तहसीलदार नियुक्त किया गया था। उसके बाद फिर से निर्भय शर्मा को अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।
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खंड विकास अधिकारी अरनिया रजनी बाला का तबादला लगभग दो महीने पहले कर दिया गया था। उसके बाद मीरां साहिब के खंड विकास अधिकारी गुरजीत सिंह को अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। वह भी हफ्ते में एक से दो दिन बमुश्किल दफ्तर पहुंच रहे हैं। इससे दूरदराज के देहात क्षेत्रों से लोग काम करवाने के लिए दरबदर हो रहे हैं।
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अरनिया नगरपालिका के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर का पद भी अतिरिक्त कार्यभार के सहारे चल रहा है। 31 दिसंबर को नपा अधिकारी कैलाश चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जोधराज भगत को नपा अधिकारी अरनिया का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया था। पिछले एक महीने से उनका तबादला हो गया है। आरएसपुरा नगरपालिका के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रवि सैनी को अरनिया नगरपालिका का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। दोनों नगरपालिकाओं में ध्यान केंद्रित कर पाना मुश्किल हो रहा है। अरनिया नगरपालिका में स्थायी तौर पर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त न होने से कस्बे की व्यवस्था चरमरा गई है। हालांकि पिछले एक महीने से रवि सैनी ने कस्बे में व्यवस्था को सुचारू किया है लेकिन उसके बावजूद भी कई कमियां सामने आ रही हैं।
अरनिया में इन तीन महत्वपूर्ण पदों पर अतिरिक्त कार्यभार के अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। इससे अरनिया क्षेत्र पिछड़ता चला जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इन पदों पर अधिकारियों का पूर्ण रूप से बैठना लोगों के हित में होता है। आज के दौर में हर प्रकार की योजना के लिए फॉर्म सत्यापित करना आवश्यक हो गया है लेकिन लोगों को अधिकारी दफ्तर में मिलते ही नहीं हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। लिहाजा प्रशासन और सरकार को अरनिया कस्बे की बिगड़ी हुई व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
इस मुद्दे पर ग्रामीण मुकेश कुमार ने बताया कि विकास खंड अधिकारी के दफ्तर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कार्य होते हैं लेकिन निचले स्तर के अधिकारी टालमटोल करते रहते हैं। लिहाजा स्थायी तौर पर खंड विकास अधिकारी की नियुक्ति कर देनी चाहिए। इस मुद्दे पर कुलदीप राज ने बताया कि वह जमीनी दस्तावेज से जुड़े कार्य लेकर दफ्तर जाते हैं लेकिन वहां पर तहसीलदार न होने को लेकर वापस भेज दिया जाता है। ऐसे हालात में जमीनी दस्तावेज से जुड़े मुद्दे लटक रहे हैं। लिहाजा स्नायी तौर पर तहसीलदार की नियुक्ति कर देनी चाहिए।