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भूमि रिकार्ड के छेड़छाड़ करने के मामले में पूछ के पूर्व एसीआर समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट पेश
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जम्मू। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने भूमि रिकार्ड में हेरफेर के आरोप में पुंछ के तत्कालीन सहायक आयुक्त राजस्व (एसीआर) शफीक अहमद और अन्य के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। शफीक अहमद वर्तमान में साइंस एंड टेक्नालाजी विभाग नागरिक सिविल सचिवालय में अतिरिक्त सचिव पद तैनात हैं। मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। हवेली तहसील में वन विभाग एवं राजस्व विभाग की भूमि को धोखाधड़ी से बेचने के आरोप में एसीबी ने वर्ष 2018 में जिला पुंछ में तैनात एसीआर समेत कई अधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
एसीबी के अनुसार उन्हें दो शिकायतें मिली थीं कि जिला पुंछ में राजस्व अधिकारियों ने भू-माफिया से मिलीभगत कर सरकारी भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे बेच दिया। जांच के दौरान एसीबी अधिकारियों ने मामले से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए। प्राथमिक जांच में धोखाधड़ी साबित होने के बाद तत्कालीन एसीआर शफीक अहमद, हलका देगवार और अजोट के तत्कालीन पटवारी जफ्फर इकबाल के अलावा मसूद अहमद के विरुद्ध विशेष न्यायालय एंटी करप्शन में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान राजस्व रिकार्ड में जिस भूमि को वन भूमि की बताया गया था, उसे निजी भूमि बता कर उसके फर्द इंतकाल बना दिए गए। उक्त भूमि को भू-माफिया के सदस्यों के नाम कर दिया गया। राजस्व रिकार्ड में बताया कि आरोपित वर्ष 1958 से उक्त भूमि में रह रहे है, जबकि मौके पर भूमि वन विभाग के नाम पर है। मामले की गहन जांच पूरी होने के बाद अब कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई है।
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एसीबी के अनुसार उन्हें दो शिकायतें मिली थीं कि जिला पुंछ में राजस्व अधिकारियों ने भू-माफिया से मिलीभगत कर सरकारी भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे बेच दिया। जांच के दौरान एसीबी अधिकारियों ने मामले से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए। प्राथमिक जांच में धोखाधड़ी साबित होने के बाद तत्कालीन एसीआर शफीक अहमद, हलका देगवार और अजोट के तत्कालीन पटवारी जफ्फर इकबाल के अलावा मसूद अहमद के विरुद्ध विशेष न्यायालय एंटी करप्शन में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान राजस्व रिकार्ड में जिस भूमि को वन भूमि की बताया गया था, उसे निजी भूमि बता कर उसके फर्द इंतकाल बना दिए गए। उक्त भूमि को भू-माफिया के सदस्यों के नाम कर दिया गया। राजस्व रिकार्ड में बताया कि आरोपित वर्ष 1958 से उक्त भूमि में रह रहे है, जबकि मौके पर भूमि वन विभाग के नाम पर है। मामले की गहन जांच पूरी होने के बाद अब कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई है।
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