कश्मीर में अब लश्कर की बागडोर संभालेगा अबू दुजाना
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अबू दुजाना अभी तक लश्कर का सेकेंड इन कमांड और अबू कासिम का खास सहयोगी था। वह पिछले करीब तीन वर्षों से घाटी में सक्रिय है। दुजाना ने सभी आतंकी मंसूबों में कासिम का साथ दिया है। सूत्रों की माने तो दुजाना अभी तक लोकल रिक्रूटमेंट में मुख्य भूमिका निभा रहा था।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अबू कासिम ने अपनी मौत से पहले घाटी में लश्कर की कमान मजबूत कर दी थी। कासिम ने मरने से करीब एक सप्ताह पहले पाकिस्तानी मूल के नौ विदेशी आतंकियों को खुद उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा से दक्षिणी कश्मीर तक सुरक्षित पहुंचाया था।
दक्षिणी कश्मीर में केवल तीन विदेशी मूल के आतंकी बचे
इन सभी आतंकियों ने नवीनतम हथियारों की उच्च ट्रेनिंग प्राप्त की हुई है और इनकी उम्र 17 से 20 वर्ष के बीच बताई जा रही है। जानकारी यह भी है कि सभी आतंकियों के छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाए गए हैं और सभी में दो विदेशी आतंकी शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कासिम के मारे जाने के बाद दक्षिणी कश्मीर में केवल तीन विदेशी मूल के आतंकी बच गए थे। जिनमें अबू दुजाना, अबू उकाशा और अबू चाहा शामिल हैं।
गत सात अक्तूबर को कासिम खुद इन नौ विदेशी मूल के आतंकियों को लेने जा रहा था लेकिन पुलिस द्वारा उसे इंटरसेप्ट कर लिया गया। इसके बाद हुई मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर अल्ताफ अहमद शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ के करीब एक सप्ताह बाद कासिम दोबारा बांदीपोरा गया और उन्हें दक्षिण कश्मीर पहुंचाया।
ये सभी आतंकी इस वर्ष की शुरूआत में घुसपैठ करने में सफल हुए थे और कुपवाड़ा के जंगलों में थे। इसके बाद वे अन्य आठ आतंकियों के साथ करीब एक महीने तक बांदीपोरा के जंगलों में थे। बाकी के आठ आतंकियों के खिलाफ बांदीपोरा में बडे़ पैमाने पर अभियान जारी है।