1990 के नरसंहार में भी घर न छोड़ने वाले जागर नाथ की मौत, मातम के बीच मुस्लिम समुदाय ने पेश की मिसाल
दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के बुचू त्राल गांव के निवासी जागर नाथ बट का उनके पैतृक गांव में निधन हो गया। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही, लोग घर पहुंचे। युवाओं ने मृतक के दाह संस्कार में इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी और अन्य महत्वपूर्ण सामान की व्यवस्था की।
इस दौरान त्राल में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है। मौत की खबर मिलते ही इलाके के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनके घर पहुंचकर परिवार की मदद की। साथ ही मृतक के अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामान की व्यवस्था की।
मौत से इलाके में मातम का माहौल है, इलाके का हर इंसान आज दुखी हैः स्थानीय नागरिक
एक स्थानीय निवासी ने कहा कि वह एक ऐसी हस्ती थे जिन्हें सभी से प्यार था। वह इलाके के जाने-माने इंसान थे। उनकी मौत से इलाके में मातम का माहौल है। इलाके का हर इंसान आज दुखी है। जागर नाथ सहकारिता विभाग में ऑडिटर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
बता दें कि मृतक जागर नाथ बट (95) ने कश्मीर उस वक्त भी नहीं छोड़ा था जब 1990 में उग्रवाद हावी था और कश्मीरी पंडितों के साथ बर्बरता हुई थी। इसके बाद भारी संख्या में कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा था। लेकिन जागर नाथ अपने परिवार से साथ यहीं रुकने का फैसला किया था।