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गृहमंत्री के पत्थरबाजों को रियायत देने के बयान से लोगों में रोष

Sat, 09 Jun 2018 01:19 AM IST
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:19 AM IST
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गृहमंत्री के पत्थरबाजों को रियायत देने के बयान से लोगों में रोष
कठुआ। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पत्थरबाजों पर दर्ज मामले वापस लेने के बयान को राष्ट्रीय जनता दल के राज्य प्रधान मनोहर डोगरा ने कड़े शब्दों में कोसा है। उन्होंने इसे सेना के हौसलों को कम करने वाला करार दिया और कहा कि उन्हें ऐसा कहने से पूर्व सेना के बारे में सोचना चाहिए था। डोगरा ने कहा कि गृह मंत्री ने पत्थरबाजों पर रहम करने की बात कहीं लेकिन वह शायद यह भूल गए कि यही पत्थरबाज आतंकी हमलों के दौरान सेना को कार्रवाई करने से रोकते हैं। बार बार नहीं हर बार यही पत्थरबाज आतंकियों को बचाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि क्या आतंकियों को बचाने वालों को वह देश द्रोही नहीं मानते। उन्होंने एक भटका हुआ युवक एक बार या दो बार गलती कर सकता है लेकिन बार बार और हर बार ऐसा होता है तो इसे भटकना नहीं जानबूझ और एक साजिश के तहत किया गया कार्य कहा जाता है। उन्होंने कहा कि राजनीति की भेंट चढ़ चुके यह युवक आज हर नीति को ताक पर रखकर सेना के आगे आतंकियों की ढाल बनकर खड़ा होता है। ऐसे में उन्हें उनपर रहम करने के स्थान पर सख्त सजा देने की बात करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि क्या केंद्र सरकार भी कश्मीरी नेताओं के आगे घुटने टेक चुकी है। अगर ऐसा है तो फिर जनता आने वाले चुनाव में भाजपा को राज्य में जवाब देगी।
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उधर, हिंदू एकता मंच ने भी गृहमंत्री के पत्थरबाजों को रियायत देने के बयान का विरोध किया है। मंच के सदस्यों ने कहा है कि गृहमंत्री पत्थरबाजों पर जो रहम दिखा रहे हैं, उसका नतीजा क्या होगा वह खुद भी भली भांति जानते हैं। राज खजूरिया ने कहा कश्मीर में पिछले 4 वर्षों से सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसा रहे पत्थरबाजों पर केंद्र सरकार बेहद नरम रही है। गृहमंत्री ने भी पत्थरबाजों के प्रति अपनी हमदर्दी दिखाते हुए कहा है इन्हें एक बार फिर से रियायत दी जाएगी, ताकि यह लोग सरकार की ओर से मिलने वाली मदद के बाद फिर से पत्थरबाजी शुरू कर सकें। इन से सख्ती से निपटने की बजाय सरकार इन्हें नए-नए ऑफर दे रही है। जबकि जम्मू के लोगों के लिए सरकार के पास कुछ नहीं है। यहां अमरनाथ भूमि आंदोलन को लेकर हुए संघर्ष में जिन लोगों पर मामले दर्ज किए गए थे उन्हें भी आज तक कोई छूट नहीं दी गई है। रसाना में मारी गई 8 वर्षीय बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए हिंदू एकता मंच ने शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष किया। सरकार के दबाव में पुलिस ने मंच के क मंच के कई पदाधिकारियों व सदस्यों पर मामले दर्ज किए। इन मामलों को वापस नहीं लिया गया। सरकार से यह पूछना चाहते हैं कि मामले सिर्फ उन्हीं लोगों के वापस होंगे जो पत्थर चलाते हैं या उनके भी जो सच्चाई और इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं।
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