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पीओके से बेटे के अवशेष मिल जाएं तो दफनाएं अपनी सरजमीं में
Updated Sat, 06 Oct 2018 01:48 AM IST
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राजोरी। सात जून को कारगिल के हरदास ब्रिज से एक गैस टैंकर खाई में गिर कर सिंधुु दरिया के तेज बहाव में बह गया था। टैंकर चालक व दो अन्य युवक पानी के तेज बहाव में बहते हुए पीओके की तरफ चले गए। इसमें से एक युवक मोहम्मद सलीम पुत्र मोहम्मद कबीर का शव पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में कहीं मिला था, जबकि चालक व एक अन्य युवक का अभी तक कोई अता पता नहीं है। सलीम के पिता मोहम्मद कबीर पीओके से उसका शव भारत लाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने दिल्ली गए, लेकिन कई दिनों बाद भी उनको मिलने के लिए समय नहीं दिया गया। मोहम्मद कबीर के मुताबिक वे अपने बेटे से संबंधित फाइल, फोटो लेकर हर दिन विदेश मंत्री की कोठी पर जाते, लेकिन उनको बैंरग लौटा दिया जाता।
थन्नामंडी तहसील के साज क्षेत्र गैस टैंकर चालक मोहम्मद शौकत 4 जून को दो अन्य युवकों मोहम्मद सलीम व 11वीं कक्षा के एक छात्र मोहम्मद जब्बार को साथ लेकर कारगिल के लिए निकले थे। 7 जून को कारगिल के हरदास ब्रिज से गैस टैंकर खाई में गिर कर सिंधु दरिया के तेज बहाव में बह गया। चालक मोहम्मद शौकत व अन्य दोनों युवक सिंधु में बहते हुए पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में पहुंच गए। करीब एक माह बाद यानी जुलाई के दूसरे सप्ताह में मोहम्मद सलीम के परिवार को मालूम पड़ा कि उनके बेटे का शव गिलगिट के खैरमंग में नदी किनारे पड़ा मिला है। इससे सलीम और जब्बार के परिवार वाले भी सदमे में चले गए।
टैंकर चालक मोहम्मद शौकत के साथ गए 11वीं के छात्र मोहम्मद जब्बार के पिता मोहम्मद इकबाल ने बताया कि जुलाई से अब तक वे अपने बेटे की तलाश कर रहे हैं। डीसी राजोरी, डिवकॉम जम्मू से लेकर दिल्ली तक घूम आए हैं, लेकिन अभी तक न उनके बेटे के शव का कोई पता चला और न ही बेटे के जिंदा होने की कोई खबर है।
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दूसरे युवक मोहम्मद सलीम के पिता मोहम्मद कबीर के अनुसार पाक अधिकृत कश्मीर के स्कर्दू जिला से आशिक हुसैन नामक व्यक्ति ने टैंकर पर लिखे मोबाइल नंबर को देख कर टैंकर के मालिक चमन को फोन कर बताया कि गिलगिट के खैरमंग में नदी किनारे गैस टैंकर आधा डूबा हुआ मिला है। टैंकर पर मोबाइल नंबर लिखा था, इसलिए फोन किया। इसके बाद चमन ने सलीम के पिता मोहम्मद कबीर को इस हादसे की सूचना दी। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति आशिक हुसैन का नंबर भी उनको दिया। इसके बाद तो घर में कोहराम मच गया।
पीओके में बेटे के शव को रेत में गाड़ने की खबर सुन टूट गए पिता
जब मोहम्मद सलीम के पिता मोहम्मद कबीर ने आशिक हुसैन से बात की, तो उसने बताया कि गिलगित पुलिस ने टैंकर से एक शव बरामद किया है। आशिक हुसैन ने वहां के हालात व शव की वॉट्स ऐप पर फोटो कबीर को भेजी। कबीर ने शव देखकर अपने बेटे सलीम को पहचान लिया। पीओके नागरिक आशिक हुसैन ने यह भी बताया कि उनके मुल्क की पुलिस व मौलवी को जैसे ही पता चला कि शव हिंदुस्तानी है, उन्होंने कब्रिस्तान में दफनाने के बजाय जनाजा पढ़ कर रेत में ही उसे गाड़ दिया। यह सब सुनकर पिता का दिल तार-तार हो गया और वे बुरी तरह टूट गए। अपने बेटे मोहम्मद सलीम के शव के साथ इस प्रकार से ज्यादती होने की खबर लगते ही परिवार के लोग बुरी तरह से टूट गए।
भारत सरकार से पाकिस्तान से बात करने की गुहार
मोहम्मद सलीम के एक परिजन ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि पीओके में मृत व्यक्ति के साथ ऐसा सलूक किया जाएगा। वे इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक मुस्लिम देश में एक मुसलमान के शव को इसलिए सम्मानपूर्वक नहीं दफनाया गया, क्योंकि वह हिंदुस्तानी का था। उन्होंने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वह पाकिस्तान सरकार से बात कर शव को भारत लाने का प्रयास करे, ताकि परिवार उसे सम्मानपूर्वक दफन कर सके।
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थन्नामंडी तहसील के साज क्षेत्र गैस टैंकर चालक मोहम्मद शौकत 4 जून को दो अन्य युवकों मोहम्मद सलीम व 11वीं कक्षा के एक छात्र मोहम्मद जब्बार को साथ लेकर कारगिल के लिए निकले थे। 7 जून को कारगिल के हरदास ब्रिज से गैस टैंकर खाई में गिर कर सिंधु दरिया के तेज बहाव में बह गया। चालक मोहम्मद शौकत व अन्य दोनों युवक सिंधु में बहते हुए पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में पहुंच गए। करीब एक माह बाद यानी जुलाई के दूसरे सप्ताह में मोहम्मद सलीम के परिवार को मालूम पड़ा कि उनके बेटे का शव गिलगिट के खैरमंग में नदी किनारे पड़ा मिला है। इससे सलीम और जब्बार के परिवार वाले भी सदमे में चले गए।
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टैंकर चालक मोहम्मद शौकत के साथ गए 11वीं के छात्र मोहम्मद जब्बार के पिता मोहम्मद इकबाल ने बताया कि जुलाई से अब तक वे अपने बेटे की तलाश कर रहे हैं। डीसी राजोरी, डिवकॉम जम्मू से लेकर दिल्ली तक घूम आए हैं, लेकिन अभी तक न उनके बेटे के शव का कोई पता चला और न ही बेटे के जिंदा होने की कोई खबर है।
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दूसरे युवक मोहम्मद सलीम के पिता मोहम्मद कबीर के अनुसार पाक अधिकृत कश्मीर के स्कर्दू जिला से आशिक हुसैन नामक व्यक्ति ने टैंकर पर लिखे मोबाइल नंबर को देख कर टैंकर के मालिक चमन को फोन कर बताया कि गिलगिट के खैरमंग में नदी किनारे गैस टैंकर आधा डूबा हुआ मिला है। टैंकर पर मोबाइल नंबर लिखा था, इसलिए फोन किया। इसके बाद चमन ने सलीम के पिता मोहम्मद कबीर को इस हादसे की सूचना दी। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति आशिक हुसैन का नंबर भी उनको दिया। इसके बाद तो घर में कोहराम मच गया।
पीओके में बेटे के शव को रेत में गाड़ने की खबर सुन टूट गए पिता
जब मोहम्मद सलीम के पिता मोहम्मद कबीर ने आशिक हुसैन से बात की, तो उसने बताया कि गिलगित पुलिस ने टैंकर से एक शव बरामद किया है। आशिक हुसैन ने वहां के हालात व शव की वॉट्स ऐप पर फोटो कबीर को भेजी। कबीर ने शव देखकर अपने बेटे सलीम को पहचान लिया। पीओके नागरिक आशिक हुसैन ने यह भी बताया कि उनके मुल्क की पुलिस व मौलवी को जैसे ही पता चला कि शव हिंदुस्तानी है, उन्होंने कब्रिस्तान में दफनाने के बजाय जनाजा पढ़ कर रेत में ही उसे गाड़ दिया। यह सब सुनकर पिता का दिल तार-तार हो गया और वे बुरी तरह टूट गए। अपने बेटे मोहम्मद सलीम के शव के साथ इस प्रकार से ज्यादती होने की खबर लगते ही परिवार के लोग बुरी तरह से टूट गए।
भारत सरकार से पाकिस्तान से बात करने की गुहार
मोहम्मद सलीम के एक परिजन ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि पीओके में मृत व्यक्ति के साथ ऐसा सलूक किया जाएगा। वे इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक मुस्लिम देश में एक मुसलमान के शव को इसलिए सम्मानपूर्वक नहीं दफनाया गया, क्योंकि वह हिंदुस्तानी का था। उन्होंने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वह पाकिस्तान सरकार से बात कर शव को भारत लाने का प्रयास करे, ताकि परिवार उसे सम्मानपूर्वक दफन कर सके।