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कंप्यूटर तथा इंटरनेट के इस अत्याधुनिक युग में भी पुस्तकालयों का अपना विशेष महत्व एवं स्थान है। जम्मू संभाग में हालांकि जिला एवं तहसील-ब्लाक स्तर पर सरकारी 59 पुस्तकालय हैं, जबकि ब्लाक खौड़ के पलांवाला, मंडी संवाली में रीडिंग रूम हैं।
जम्मू संभाग में नये गठित जिले सांबा, किश्तवाड़, रामबन तथा रियासी में चार जिला पुस्तकालयों के निर्माण के लिए डायरेक्टर लाइब्रेरीज को प्रस्ताव के रूप में लिखा गया है।
जानकारी के मुताबिक कठुआ जिला लाइब्रेरी में करीब 31हजार पुस्तकें हैं। वहीं उधमपुर जिला लाइब्रेरी में करीब 23 हजार किताबें हैं। डोडा जिला लाइब्रेरी में करीब 31 हजार पुस्तकें हैं।
ऐतिहासिक लाइब्रेरी में मौजूद है दुर्लभतम तिब्बती पांडुलिपि
श्री रणवीर लाइब्रेरी (सेंट्रल लाइब्रेरी) कच्ची छावनी जम्मू की स्थापना वर्ष 1879 में हुई थी। तत्कालीन महाराजा रणवीर सिंह द्वारा जम्मू में इस पुस्तकालय की स्थापना की गई थी।
अभी भी अपने करीब 135 साल पुराने इतिहास तथा पुस्तकालय की परंपरा को धरोहर के रूप में जम्मू की आन-बान-शान बनकर ज्ञान भंडार को प्रकाशित करने में सक्षम बना हुआ है।
वहीं, इस प्राचीन लाइब्रेरी के इस समय करीब12 हजार 26 सदस्य हैं। इस लाइब्रेरी में तकरीबन 63 हजार पुस्तकें मौजूद हैं, जिसमें दुर्लभतम तिब्बती पांडुलिपि भी मौजूद है।
नए पुस्तकालयों के लिए जमीन की तलाश
राजोरी जिला लाइब्रेरी में लगभग दस हजार पुस्तकें हैं। जम्मू जिला लाइब्रेरी छन्नी में करीब 15 हजार पुस्तकें हैं।
पुंछ स्थित जिला लाइब्रेरी में करीब 17 हजार पुस्तकें हैं। संभाग के दो जम्मू तथा पुंछ के जिला पुस्तकालयों के लिए अपना भवन नहीं हैं।
वहीं, इन दोनों पुस्तकालयों के लिए भवन निर्माण को लेकर जमीन की तलाश की जा रही है।