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नए साल पर माता वैष्णो देवी के दरबार में रिकार्ड संख्या में पहुंचे भक्त
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 01 Jan 2017 06:23 PM IST
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वैष्णो देवी
- फोटो : FILE
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साल के आखिरी दिन धर्मनगरी कटड़ा में श्रद्धालुओं का जैसे सैलाब उमड़ पड़ा। दिन भर पंजीयन काउंटर पर लंबी कतार लगी रही। शहर में खचाखच भीड़ के कारण बसें अड्डा तक नहीं पहुंच पा रही थी। साल के आखिरी दिन रात नौ बजे तक 53 हजार श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवाया।
दुनिया भर से यात्रियों के सैलाब को देखते हुए धर्मनगरी में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। बसों को शहर से पहले ही रोक कर यात्रियों को उतार दिया जाता रहा। भक्त मुश्किलों की परवाह किए बिना पैदल बाणगंगा की ओर बढ़ रहे थे। चेक पोस्ट पर इतनी भीड़ लगी थी कि कतार आटो स्टैंड से ऊपर तक लगी रही। भवन के ऊपर पर लॉकर रूम और सभी ठहरावों की जगह फुल रही। पिछले साल की तुलना 31 दिसंबर को एक हजार ज्यादा भक्त पहुंचे। पिछले वर्ष 52 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे।
दूसरी तरफ पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार पूरे 2016 में वैष्णो देवी की प्राकृतिक पिंडियों के दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 77 लाख 20 हजार रही। यह आंकड़ा वर्ष 2015 की तुलता में 50 हजार कम है। 2015 में 77 लाख 70 हजार भक्तों ने माता के दर्शन किए थे। आंकड़े बताते हैं पिछले चार वर्षों से वैष्णो देवी की यात्रा में गिरावट ही हुई है।
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दुनिया भर से यात्रियों के सैलाब को देखते हुए धर्मनगरी में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। बसों को शहर से पहले ही रोक कर यात्रियों को उतार दिया जाता रहा। भक्त मुश्किलों की परवाह किए बिना पैदल बाणगंगा की ओर बढ़ रहे थे। चेक पोस्ट पर इतनी भीड़ लगी थी कि कतार आटो स्टैंड से ऊपर तक लगी रही। भवन के ऊपर पर लॉकर रूम और सभी ठहरावों की जगह फुल रही। पिछले साल की तुलना 31 दिसंबर को एक हजार ज्यादा भक्त पहुंचे। पिछले वर्ष 52 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे।
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दूसरी तरफ पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार पूरे 2016 में वैष्णो देवी की प्राकृतिक पिंडियों के दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 77 लाख 20 हजार रही। यह आंकड़ा वर्ष 2015 की तुलता में 50 हजार कम है। 2015 में 77 लाख 70 हजार भक्तों ने माता के दर्शन किए थे। आंकड़े बताते हैं पिछले चार वर्षों से वैष्णो देवी की यात्रा में गिरावट ही हुई है।
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कश्मीर के हालात और नोटबंदी की वजह से 2016 में आई गिरावट
माता वैष्णो देवी
- फोटो : फाइल
वर्ष 2016 में यात्रा में हुई गिरावट के लिए विशेषज्ञ कई कारण बताते हैं। इनमें कश्मीर के हालात और नोटबंदी को प्रमुख बताया गया है। हालांकि वर्ष 2012 के बाद यात्रियों की संख्या में हर बार गिरावट ही हुई है।
जहां वर्ष 2014 में भवन में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 78 लाख 3 हजार थी तो 2013 में 93 लाख 2 हजार भक्तों ने दर्शन किए थे। वर्ष 2012 में भक्तों का आंकड़ा सबसे अधिक रहा था। 1 करोड़ 4 लाख भक्तों ने दर्शन किए थे।
गौरतलब है कि वर्ष 1986 में श्राइन बोर्ड के गठन से पहले वर्ष में मात्र पंद्रह लाख भक्त ही दर्शन को आते थे। बोर्ड द्वारा जैसे-जैसे सुविधाआें में इजाफा किया, वैसे-वैसे भक्तों की संख्या भी बढ़ती गई।
वर्ष 2011 में पहली बार यात्रियों की संख्या ने एक करोड़ का आंकड़ा पार किया, लेकिन पिछले चार वर्षों से हो रही भक्तों में कमी स्थानीय व्यवसायियों के लिए भी चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब यात्रा में और वृद्धि लाने के लिए अधिक प्रयास होने चाहिए। इसमें बोर्ड मुख्य भूमिका अदा कर सकता है।
जहां वर्ष 2014 में भवन में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 78 लाख 3 हजार थी तो 2013 में 93 लाख 2 हजार भक्तों ने दर्शन किए थे। वर्ष 2012 में भक्तों का आंकड़ा सबसे अधिक रहा था। 1 करोड़ 4 लाख भक्तों ने दर्शन किए थे।
गौरतलब है कि वर्ष 1986 में श्राइन बोर्ड के गठन से पहले वर्ष में मात्र पंद्रह लाख भक्त ही दर्शन को आते थे। बोर्ड द्वारा जैसे-जैसे सुविधाआें में इजाफा किया, वैसे-वैसे भक्तों की संख्या भी बढ़ती गई।
वर्ष 2011 में पहली बार यात्रियों की संख्या ने एक करोड़ का आंकड़ा पार किया, लेकिन पिछले चार वर्षों से हो रही भक्तों में कमी स्थानीय व्यवसायियों के लिए भी चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब यात्रा में और वृद्धि लाने के लिए अधिक प्रयास होने चाहिए। इसमें बोर्ड मुख्य भूमिका अदा कर सकता है।