JK: बाढ़ नियंत्रण के लिए 4500 करोड़ के दो प्रोजेक्ट
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जम्मू कश्मीर सरकार ने सबको पेयजल उपलब्ध कराने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। जम्मू और श्रीनगर के अलावा सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए 4500 करोड़ रुपये के दो बड़े प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। केंद्र की मंजूरी के बाद इन योजनाओं पर काम शुरू हो सकेगा।
पीएचई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री चौधरी सुखनंदन ने कहा कि रणजीत सागर बांध से कठुआ इलाके को पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए पंजाब सरकार से बातचीत चल रही है।
इस प्रोजेक्ट से कठुआ और हीरानगर को 1150 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिल सकेगा। पीएचई मंत्री सुखनंदन ने कहा कि वह गांव से आते हैं और खुद गरीब किसान रहे हैं।
अपने सियासी करियर में किसानों की सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहे। इसे महसूस करते हुए भाजपा आलाकमान ने उन्हें ऐसा महकमा दिया, जिसके माध्यम से वह किसानों के हित की योजनाएं लागू कर सकते हैं।
सरकार में एकतरफा फैसले संभव नहीं होंगे
मंत्री सुखनंदन ने कहा कि पीडीपी के साथ भाजपा की गठबंधन सरकार पूरे छह साल तक चलेगी। पीडीपी एकतरफा फैसले नहीं ले सकेगी। सरकार में विचार-विमर्श के बाद साझा फैसले होंगे। मंत्री सुखनंदन गठबंधन एजेंडा को लागू करने के लिए बने मंत्रिमंडलीय समूह के भी सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की टीम जून के पहले सप्ताह में दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सीएमपी पर ही चलेगी।
पेयजल की मांग और आपूर्ति के अंतर को खत्म करेंगे
मंत्री सुखनंदन ने कहा कि पेयजल सबकी जरूरत है। गरीब और अमीर सबको पानी चाहिए। इसलिए सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता पर लिया है। पेयजल की कमी समाप्त करने के लिए नए प्रोजेक्टों पर काम शुरू किया जा रहा है। सवा करोड़ आबादी को पोर्टेबल पानी उपलब्ध कराना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
जम्मू और श्रीनगर में नए प्रोजेक्ट
जम्मू और श्रीनगर की कुल आबादी लगभग 26 लाख है। इसके लिए 116.22 मिलियन गैलन पानी की जरूरत है। रियासत सरकार के पास फिलहाल 104.36 मिलियन गैलन पेयजल प्रतिदिन आपूर्ति करने की क्षमता है। इसी तरह अन्य बड़े शहरों में 14.5 लाख की आबादी के लिए 74.80 मिलियन गैलन पानी प्रतिदिन चाहिए, लेकिन सरकार 33.78 मिलियन गैलन प्रतिदिन आपूर्ति करती है। इस अंतर को पाटना है।
गांवों को चाहिए 107 मिलियन गैलन पानी
पीएचई मंत्री ने कहा कि गांवों में रहने वाले 85 लाख लोगों को 107.72 मिलियन गैलन पानी प्रतिदिन चाहिए। सरकार फिलहाल 92.13 मिलियन गैलन पानी उपलब्ध करा रही है। मांग और आपूर्ति के इस अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार ने विस्तृत योजना पर काम शुरू किया है। धरातल पर योजनाओं को लागू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
नेहरू मिशन के तहत दो योजनाएं
मंत्री ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू शहरी मिशन के तहत श्रीनगर शहर के लिए दो प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। पेयजल आपूर्ति के इन प्रोजेक्टों पर 269 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च होंगे। इनमें से मार्च 2014 तक 160.28 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। दोनों प्रोजेक्टों पर पिछले वित्तीय वर्ष में 12 करोड़ खर्च किए गए। योजनाएं इस वर्ष पूरी हो जाएंगी। इससे श्रीनगर शहर को 20 मिलियन गैलन अतिरिक्त पेयजल प्रतिदिन मिल सकेगा।
जम्मू के लिए प्रोजेक्ट केंद्र को भेजा
जम्मू शहर में पेयजल की किल्लत को समाप्त करने के लिए चिनाब से पानी लाने के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र के साथ बातचीत चल रही है। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को 886 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा गया है। इस प्रोजेक्ट के लागू होने से जम्मू शहर को 240 एलएलडी अतिरिक्त पेयजल मिल सकेगा। शहरी आबादी की समस्याएं दूर करने के लिए एलआईसी ऋण सहायता के तहत 78 योजनाएं चल रही हैं।
क्वालिटी पेयजल के लिए 22 प्रयोगशालाएं
सुखनंदन ने कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिला मुख्यालयों में 22 प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं हैं। इसके अलावा सब डिवीजन स्तर पर 64 प्रयोगशालाएं हैं। केंद्र सरकार ने जम्मू और श्रीनगर के लिए दो अतिरिक्त राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना रियासत सरकार की पहली प्राथमिकता है और इस दिशा में काम हो रहा है।
बाढ़ से 2983 योजनाएं हुईं ध्वस्त
मंत्री ने कहा कि बाढ़ से पेयजल आपूर्ति की 2983 योजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं। इनकी मरम्मत के लिए 234.76 करोड़ रुपये की जरूरत है। आई एंड एफसी सेक्टर में 8348 स्पाट क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन पर 1279. 41 करोड़ का खर्च जरूरी होगा। भविष्य में बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए रियासत सरकार ने कमर कस ली है। इस बार बारिश से श्रीनगर में बाढ़ के खतरे के बाद मैं वहीं डटा रहा और चुनौतियों का विभाग ने सामना किया।