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40 हजार लोगों पर एक सरकारी बस

Wed, 04 Nov 2015 10:04 AM IST
Updated Wed, 04 Nov 2015 10:04 AM IST
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40 thousand people per roadways bus in Jammu and Kashmir

राज्य में 300 सरकारी बसें चल रही हैं। जबकि राज्य की आबादी करीब एक करोड़ 20 लाख के आसपास है। ऐसे में 40 हजार लोगों पर एक सरकारी बस चलती हैं। आधी बाहरी राज्यों के लिए चलती हैं।

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जम्मू शहर में एसआरटीसी की एक भी बस नहीं चलती। जम्मू से पुंछ, राजोरी, डोडा, किश्तवाड़, रियासी, के लिए एक-एक बस चलती है। श्रीनगर के लिए 25 बसें चलती हैं। श्रीनगर से आसपास के जिलों को कोई बस नहीं चलती है।
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निगम के पास मौजूदा समय में स्थायी और अस्थायी चालकों की संख्या 970 के करीब है। इनमें से सवा सौ चालक ऐसे हैं, जो अनफिट हैं। इन चालकों की नजर कम हो गई है और शरीर भी साथ नहीं देता।
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इसके बावजूद चालक बसें चला रहे हैं। विडंबना यह भी है कि चालकों के प्रमोशन के लिए कोई नियम नहीं है। वह चालक के तौर पर भर्ती होते हैं और चालक के तौर पर ही रिटायर हो जाते हैं।

बाढ़ और बवाल की भेंट चढ़ गईं पांच सौ बसें

40 thousand people per roadways bus in Jammu and Kashmir

राज्य परिवहन निगम (एसआरटीसी) पर राज्य के हालात भारी पड़े हैं। निगम के एक-तिहाई वाहन आतंकवाद, विभिन्न घटनाओं में हुए बवाल, बाढ़ की भेंट चढ़ गए। यही नहीं, मरम्मत के अभाव में भी सैकड़ों वाहन वर्कशाप में सड़ रहे हैं।

पिछले दो दशकों पर नजर डालें तो निगम की कुल बसों में से तीन सौ बसें ही मौजूदा समय में चल रही हैं। निगम की हालत इतनी पतली है कि सवा सौ अनफिट चालक बसों को चला रहे हैं जबकि निगम के पास पर्याप्त चालक हैं।

पिछले वर्ष राज्य परिवहन निगम की 125 बसें श्रीनगर में बाढ़ की वजह से खराब हो गईं। बसों के इंजन में पानी चला गया। कई की सीटें खराब हो गईं। इन बसों में से 20 को ही मरम्मत कर चलाया जा सका।

वर्ष 2008 में अमरनाथ यात्रा जमीन विवाद के चलते 70 वाहनों के शीशे टूट गए। इसके बाद से अब तक कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी में 40 बसें भेंट चढ़ चुकी हैं। आतंकवाद के दौरान 250 बसों को फूंक दिया गया या फिर क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

पांच सौ से अधिक बसें हालात और तनाव के चलते क्षतिग्रस्त हो गईं। इस समय निगम के पास कुल 550 वाहन हैं। इनमें 215 ट्रक और 235 बसें हैं। 300 से अधिक बसें वर्कशाप में मरम्मत का इंतजार कर रही हैं।

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