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मंदिरों में गूंजे महामाई के जयकारे
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उधमपुर। नवरात्र के प्रथम दिन देविका नगरी माता की भक्ति में डूबी हुई नजर आई। सुबह से ही लोग शहर व आसपास के मंदिरों में माथा टेकने के लिए पहुंचने लगे थे। इस दौरान पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की। शाम के समय विभिन्न जगहों पर जागरण का आयोजन भी किया गया। इस दौरान मंदिरों के बाहर सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे।
ज्यादातर शहरवासी पवित्र देविका नदी के तट पर पहुंचे, जहां बावलियों में स्नान करने के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना की। टी मोड़ इलाके में काली माता मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर को विशेष तौर पर सजाया गया था। मंदिर में शहर के साथ ही ग्रामीण व सैनिक क्वार्टरों से भी सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचे। इस दौरान दर्शन के लिए उन्हें लंबी कतार में भी लगना पड़ा। जखैनी इलाके में काली माता मंदिर, चबूतरा बाजार स्थित शीतला माता मंदिर, गंगेड़ा की पहाड़ी पर स्थित शारदा माता मंदिर, रैंबल स्थित काली माता मंदिर व कई अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने महामाई का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने पहले नवरात्र का व्रत भी रखा। सुबह से लेकर रात तक शहर व आसपास के इलाकों में सिर्फ महामाई के भजन ही सुनाई दे रहे थे। रात के समय शहर के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक संस्थाओं द्वारा जागरण का आयोजन किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने रात तक महामाई की महिमा के भजनों का आनंद उठाया। वहीं मंदिरों के बाहर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। मंदिरों में जब तक श्रद्धालुओं का पहुंचना होता रहा, तब तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
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ज्यादातर शहरवासी पवित्र देविका नदी के तट पर पहुंचे, जहां बावलियों में स्नान करने के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना की। टी मोड़ इलाके में काली माता मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर को विशेष तौर पर सजाया गया था। मंदिर में शहर के साथ ही ग्रामीण व सैनिक क्वार्टरों से भी सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचे। इस दौरान दर्शन के लिए उन्हें लंबी कतार में भी लगना पड़ा। जखैनी इलाके में काली माता मंदिर, चबूतरा बाजार स्थित शीतला माता मंदिर, गंगेड़ा की पहाड़ी पर स्थित शारदा माता मंदिर, रैंबल स्थित काली माता मंदिर व कई अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने महामाई का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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श्रद्धालुओं ने पहले नवरात्र का व्रत भी रखा। सुबह से लेकर रात तक शहर व आसपास के इलाकों में सिर्फ महामाई के भजन ही सुनाई दे रहे थे। रात के समय शहर के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक संस्थाओं द्वारा जागरण का आयोजन किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने रात तक महामाई की महिमा के भजनों का आनंद उठाया। वहीं मंदिरों के बाहर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। मंदिरों में जब तक श्रद्धालुओं का पहुंचना होता रहा, तब तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
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