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कामगारों के वेतन के 30 करोड़ लैप्स
ओमपाल संबयाल/कठुआ
Updated Fri, 01 May 2015 12:17 PM IST
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सरकार ने समय पर पैसा नहीं दिया, लिहाजा करोड़ों की राशि लैप्स हो गई। जिला विकास प्लान के तहत मंजूर की गई इस राशि के बिल या तो विभागों को वापस भेज दिए गए हैं या फिर कोष कार्यालय में पड़े हैं। लैप्स हुई राशि 42 करोड़ है। इसमें से करीब 30 करोड़ रुपये मुलाजिमों के वेतन का है।
किसी मुलाजिम का पांच महीने से जीपीएफ लंबित है, तो किसी की ग्रेच्युटी अधर में है। और तो और महीनों का वेतन भी नहीं मिला। उस पर तुर्रा ये कि लैप्स होने वाली श्रेणी में शामिल मुलाजिमों का वेतन अब महीनों इंतजार के बाद ही मिलेगा। ऐसे में महीने के खर्च को पहले से तंगहाली में चला रहे मुलाजिमों के लिए संकट बन गया है।
दरअसल, 31 मार्च तक कोष विभाग के पास कुल 56 करोड़ की देनदारी से जुडे बिल जमा करवाए गए थे। इसके बदले में विभाग को बिल जांचने के बाद देनदारी चुकानी थी। इसमें किसी का वेतन तो किसी का मानदेय। ठेकेदारों की देनदारी से लेकर पेंशन, ग्रेच्युटी और जीपीएफ जैसे जरूरी कंपोनेंट शामिल थे।
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लेकिन, सरकार ने जिला कोष विभाग को 56 करोड़ के बजाए महज 14 करोड़ की राशि ही उपलब्ध करवाई। इस बीच वित्तीय वर्ष की आखिरी तारीख गुजर गई और 42 करोड़ की भारी भरकम राशि की देनदारी अटक गई। अब मुलाजिम कोष विभाग के कार्यालय रोजाना चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
एक तरफ मुलाजिम वर्ग परेशान है तो दूसरी तरफ कोष विभाग के लिए धर्मसंकट बन गया है। अमर उजाला द्वारा पूछे जाने पर जिला कोष अधिकारी अरशद चौधरी ने बताया कि निर्धारित समय में पैसा नहीं मिल पाने की वजह से पिछले वित्त वर्ष की 42 करोड़ की देनदारी नहीं चुकाई जा सकी है।
इसमें ज्यादातर राशि लैप्स होने वाली श्रेणी की है। विभाग के पास रोजाना बड़ी संख्या में लोग वेतन सहित अन्य श्रेणी की देय राशि के लिए पूछने आ रहे हैं। यह मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र का है। लैप्स हुई राशि के लिए तो अब नए सिरे से बजट की पुनर्समीक्षा की प्रक्रिया अनिवार्य है, जिसके लिए कई महीने लग सकते हैं।
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किसी मुलाजिम का पांच महीने से जीपीएफ लंबित है, तो किसी की ग्रेच्युटी अधर में है। और तो और महीनों का वेतन भी नहीं मिला। उस पर तुर्रा ये कि लैप्स होने वाली श्रेणी में शामिल मुलाजिमों का वेतन अब महीनों इंतजार के बाद ही मिलेगा। ऐसे में महीने के खर्च को पहले से तंगहाली में चला रहे मुलाजिमों के लिए संकट बन गया है।
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दरअसल, 31 मार्च तक कोष विभाग के पास कुल 56 करोड़ की देनदारी से जुडे बिल जमा करवाए गए थे। इसके बदले में विभाग को बिल जांचने के बाद देनदारी चुकानी थी। इसमें किसी का वेतन तो किसी का मानदेय। ठेकेदारों की देनदारी से लेकर पेंशन, ग्रेच्युटी और जीपीएफ जैसे जरूरी कंपोनेंट शामिल थे।
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लेकिन, सरकार ने जिला कोष विभाग को 56 करोड़ के बजाए महज 14 करोड़ की राशि ही उपलब्ध करवाई। इस बीच वित्तीय वर्ष की आखिरी तारीख गुजर गई और 42 करोड़ की भारी भरकम राशि की देनदारी अटक गई। अब मुलाजिम कोष विभाग के कार्यालय रोजाना चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
एक तरफ मुलाजिम वर्ग परेशान है तो दूसरी तरफ कोष विभाग के लिए धर्मसंकट बन गया है। अमर उजाला द्वारा पूछे जाने पर जिला कोष अधिकारी अरशद चौधरी ने बताया कि निर्धारित समय में पैसा नहीं मिल पाने की वजह से पिछले वित्त वर्ष की 42 करोड़ की देनदारी नहीं चुकाई जा सकी है।
इसमें ज्यादातर राशि लैप्स होने वाली श्रेणी की है। विभाग के पास रोजाना बड़ी संख्या में लोग वेतन सहित अन्य श्रेणी की देय राशि के लिए पूछने आ रहे हैं। यह मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र का है। लैप्स हुई राशि के लिए तो अब नए सिरे से बजट की पुनर्समीक्षा की प्रक्रिया अनिवार्य है, जिसके लिए कई महीने लग सकते हैं।