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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   25th anniversary of afspa in jammu and kashmir

'शुक्र है पीट कर छोड़ दिया, गोली नहीं मारी'

Sun, 05 Jul 2015 04:15 PM IST
Updated Sun, 05 Jul 2015 04:15 PM IST
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25th anniversary of afspa in jammu and kashmir

साल 1993 की बात है। मेरे गृह राज्य भारत प्रशासित कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) लगे तीन साल हो चुके थे।

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मैं उन दिनों उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग के पास के अपने गांव में रहता था। मेरा एक दोस्त गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। डॉक्टरों ने कहा कि अभी उसे किसी तरह श्रीनगर के मुख्य अस्पताल ले जाएं तो वह बच सकता है।

मैं गाड़ी चला रहा था। सड़क पर बहुत ज्यादा गाड़ियां नहीं थी। लिहाज़ा, मैं निश्चिंत था कि समय रहते मैं उसे लेकर श्रीनगर पंहुच जाउंगा और उसका इलाज आसानी से हो जाएगा। इसमें बहुत ज्यादा चिंता की बात नहीं थी।

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रेंगते काफ़िले के पीछे मरीज

25th anniversary of afspa in jammu and kashmir

तभी मैंने पाया कि सड़क पर मेरे आगे सेना की गाड़ियों का बहुत बड़ा काफ़िला चल रहा था। अपने अपने चेहरे ढके गाड़ियों की छतों पर चढ़े सैनिक लंबे लंबे बांसों से लोगों को किनारे होने को कह रहे थे। उनके हाथों में बंदूकें भी थीं।

पर गाड़ियों की रफ़्तार निहायत ही धीमी थी। मैं उनके पीछे धीरे धीरे गाड़ी चला रहा था। मेरी गाड़ी एक तरह से रेंग रही थी और मेरा दोस्त मुझ पर बुरी तरह झल्ला रहा था।

वह मुझे कोस रहा था कि मैं गाड़ी तेज़ क्यों नहीं चला रहा हूँ। मैं ऐसे काफ़िले के पीछे चल रहा था, जो कछुए की रफ़्तार से रेंग रहा था। मेरा दोस्त वाक़ई बहुत अधिक दर्द में था।

उसने दर्द से कराहते हुए ही मुझे बुरी तरह कोसना शुरू कर दिया। उसने चिल्ला कर कहा, 'तुम गाड़ी का हॉर्न क्यों नहीं बजा रहे हो, तुम ओवरटेक कर इन गाड़ियों के बगल से निकल क्यों नहीं जाते। इसी रफ़्तार से तुम गाड़ी चलाते रहे तो मैं जल्दी ही मर जाउंगा।'

अच्छा होता यदि मैंने टैक्सी ले ली होती

25th anniversary of afspa in jammu and kashmir

यकायक गाड़ियों का काफ़िला थम गया। मुझे भी अपनी गाड़ी रोक देनी पड़ी। सैनिक गाड़ियों की छतों से कूद कर नीचे आ गए। वे कहकहे लगा रहे थे, हंसी मज़ाक कर रहे थे। उन्होंने गाड़ियां रोक सड़क के किनारे पेशाब की।

मेरा दोस्त अब तक अपना आपा खो चुका था। उसने मुझसे कहा, 'अच्छा होता यदि मैंने टैक्सी ले ली होती। तुम तो ऐसे डरपोक हो कि हॉर्न भी नहीं दे सकते, न ही ओवरटेक कर आगे निकल सकते हो। लगता है मैं कभी भी अस्पताल नहीं पंहुच पाऊंगा।'

मेरे दोस्त की किस्मत अच्छी थी कि थोड़ी दूर जाने के बाद सेना के काफ़िले ने अपना रास्ता बदल लिया और वह बाईपास की ओर मुड़ गया। दर्द कम होने के बाद मैंने अपने दोस्त से गाड़ी धीमी चलाने और ओवरटेक नहीं करने का कारण उसे बताया।

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' उसने पूछा तूने हॉर्न क्यों बजाया?'

25th anniversary of afspa in jammu and kashmir

इस घटना के तीन महीने बाद मैं पट्टन के पास अपनी गाड़ी से कहीं जा रहा था। मेरी गाड़ी के आगे सेना की तीन गाड़ियां चल रही थीं। मैं जल्दबाज़ी में था। मैंने उन्हें ओवरटेक करने की कोशिश की। सेना की गाड़ियां रुक गईं। उन गाड़ियों से सैनिक कूद कर बाहर निकले और उन्होंने मुझे दबोच लिया। 'हॉर्न क्यों बजाया?' उन्होंने पूछा।

मैंने उन्हें बताया कि मैं एक पत्रकार हूँ। मैंने कहा कि मैं जल्दबाज़ी में हूँ। उन्होंने मेरी गाड़ी की खिड़की के शीशे तोड़ दिए और मेरी जम कर पिटाई की। मेरी नाक से ख़ून निकलने लगा। मैंने बाद में एक बड़े अफ़सर से मुलाकात की और कहा कि मैं आर्मी के ख‌िलाफ मामला दर्ज करना चाहता हूँ।

वह मेरा दोस्त था और उसने मुझे दोस्ताना सलाह दी। उसने कहा,'तुम्हारी तक़दीर अच्छी थी कि उन्होंने तुम्हें गोली नहीं मार दी। उनका यह कहना काफ़ी होता कि तुम संदेहास्पद ढंग से गाड़ी चला रहे थे और ख़तरनाक तरीके से उनकी ओर मुड़े थे।

एफआईआर के बारे में तो भूल ही जाओ। वे बादशाह हैं। आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट ने उन्हें इतनी ताक़त दे दी है कि वे जो मर्ज़ी कर सकते हैं।'

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