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देविका नदी के तट पर आयोजित प्राचीन बैसाखी मेला देखने उमड़ा जनसैलाब
Tue, 16 Apr 2019 02:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2019 02:22 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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देविका नदी के तट पर आयोजित प्राचीन बैसाखी मेला में सोमवार को दूसरे दिन भी जनसैलाब उमड़ा। दोपहर बाद तो तो मेला स्थल पर इतनी ज्यादा भीड़ जमा हो गई कि लोगों को चलने के लिए भी स्थान नहीं मिल रहा है। शहर व ग्रामीण इलाकों से पहुंचे लोगों ने जमकर खरीदारी की। युवाओं ने झूला झूलने और मौत का कुंआ देखने का दिन भर आनंद उठाया।
पवित्र देविका नदी के तट पर स्थित बावलियों में स्नान करने के लिए दूसरे दिन भी सुबह से ही लोगों का तांता लगना शुरू हो गया था। स्नान के बाद लोगों ने देविका स्थित मंदिरों में पूजा अर्चना की और फिर मेले का आनंद उठाया। मंगलवार को दिन भर मेले में काफी चहल-पहल रही। मेले में भीड़ इतनी अधिक थी कि पैदल चलना मुश्किल हो रहा था। सबसे ज्यादा भीड़ मेले में लगे झूलों के पास थी। विभिन्न प्रकार के झूूलों के पास लोगों को अपनी बारी के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा।
लंबी कतार में लगने के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं था। महिलाओं ने उत्साह के साथ श्रंगार का सामान खरीदा और युवा व बुजुर्ग खाने पीने की वस्तुओं का आनंद उठाते आए। खिलौने की दुकानों पर बच्चे भीड़ लगाकर मनपसंद खिलौने खरीदते नजर आए। दुकानदारों की ओर से घरों को सजाने के लिए गुलदस्ते बेचे जा रहे हैं वहीं, सरकारी स्टालों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार दूसरे दिन भी जारी रहा।
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मेले की निगरानी के लिए मेला अफसर बनाए गए उधमपुर के तहसीलदार दिन भर मेला स्थल के चक्कर लगाते रहे। तहसीलदार ने सीएपीडी के अधिकारी के साथ मिलकर नियमों की अनदेखी करके सामान बेचने वाले स्टालों से जुर्माना वसूल कर कार्रवाई भी की। बैसाखी मेले के दूसरे दिन भी प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मेले में सिविल डिफेंस की तरफ से भी एक स्टाल लगाया गया।
विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल में लोगों को आपदा प्रबंधन के गुर सिखाए जा रहे थे। लोगों को भूकंप, बाढ़, आग लगने व अन्य आपास स्थिति से बचने के उपाए बताए गए। ग्रामीण इलाकों से पहुंचने वाले ग्रामीणों को विशेष तौर पर स्वच्छ भारत मिशन की जानकारी देकर जागरूक किया गया। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में मतदान करने को प्रेरित किया गया।
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पवित्र देविका नदी के तट पर स्थित बावलियों में स्नान करने के लिए दूसरे दिन भी सुबह से ही लोगों का तांता लगना शुरू हो गया था। स्नान के बाद लोगों ने देविका स्थित मंदिरों में पूजा अर्चना की और फिर मेले का आनंद उठाया। मंगलवार को दिन भर मेले में काफी चहल-पहल रही। मेले में भीड़ इतनी अधिक थी कि पैदल चलना मुश्किल हो रहा था। सबसे ज्यादा भीड़ मेले में लगे झूलों के पास थी। विभिन्न प्रकार के झूूलों के पास लोगों को अपनी बारी के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा।
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लंबी कतार में लगने के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं था। महिलाओं ने उत्साह के साथ श्रंगार का सामान खरीदा और युवा व बुजुर्ग खाने पीने की वस्तुओं का आनंद उठाते आए। खिलौने की दुकानों पर बच्चे भीड़ लगाकर मनपसंद खिलौने खरीदते नजर आए। दुकानदारों की ओर से घरों को सजाने के लिए गुलदस्ते बेचे जा रहे हैं वहीं, सरकारी स्टालों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार दूसरे दिन भी जारी रहा।
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मेले की निगरानी के लिए मेला अफसर बनाए गए उधमपुर के तहसीलदार दिन भर मेला स्थल के चक्कर लगाते रहे। तहसीलदार ने सीएपीडी के अधिकारी के साथ मिलकर नियमों की अनदेखी करके सामान बेचने वाले स्टालों से जुर्माना वसूल कर कार्रवाई भी की। बैसाखी मेले के दूसरे दिन भी प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मेले में सिविल डिफेंस की तरफ से भी एक स्टाल लगाया गया।
विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल में लोगों को आपदा प्रबंधन के गुर सिखाए जा रहे थे। लोगों को भूकंप, बाढ़, आग लगने व अन्य आपास स्थिति से बचने के उपाए बताए गए। ग्रामीण इलाकों से पहुंचने वाले ग्रामीणों को विशेष तौर पर स्वच्छ भारत मिशन की जानकारी देकर जागरूक किया गया। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में मतदान करने को प्रेरित किया गया।