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कठुआ में एनएचएम कर्मियों ने मांगा वेतन
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कठुआ। नेशनल हेल्थ मिशन कर्मचारियों ने दो दिन की हड़ताल के बाद बुधवार को जिला अस्पताल कठुआ में धरना शुरू कर दिया है। अस्पताल के पार्किंग स्थल पर धरना देते हुए कर्मचारियों ने अपनी मांगों के लिए नारेबाजी की और कहा कि पिछली साल की तरह इस साल वह बातों में नहीं आएंगे और अपना हक लेकर रहेंगे।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि पिछले साल भी जनवरी में 32 दिनों के धरने के बाद सरकार ने उनसे दो महीने का समय मांगा था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें नियमित करने और समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बहुत अफसोस की बात है कि राज्य को तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान दिलवाने वाले नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी आज अपने हक के लिए धरना करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य स्तर पर ही नहीं विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को भी पूरा करते हुए उन योजनाओं में पहले नंबर पर आने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों ने जी जान से काम किया है। फिर चाहे हाल ही में संपन्न हुए मीजल्स रूबेला अभियान की बात हो या फिर अब आयुष्मान भारत की। एनएचएम कर्मचारियों ने हर आदेश को पूरा किया, लेकिन उनके साथ किया गया वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वह केवल नियमित करने और एक जैसे काम के एक जैसा वेतन देने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी एक भी मांग पूरी नहीं की जा रही। ऐसे में उनके पास धरने से अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है।
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धरने के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि पिछले साल भी जनवरी में 32 दिनों के धरने के बाद सरकार ने उनसे दो महीने का समय मांगा था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें नियमित करने और समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बहुत अफसोस की बात है कि राज्य को तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान दिलवाने वाले नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी आज अपने हक के लिए धरना करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य स्तर पर ही नहीं विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को भी पूरा करते हुए उन योजनाओं में पहले नंबर पर आने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों ने जी जान से काम किया है। फिर चाहे हाल ही में संपन्न हुए मीजल्स रूबेला अभियान की बात हो या फिर अब आयुष्मान भारत की। एनएचएम कर्मचारियों ने हर आदेश को पूरा किया, लेकिन उनके साथ किया गया वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वह केवल नियमित करने और एक जैसे काम के एक जैसा वेतन देने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी एक भी मांग पूरी नहीं की जा रही। ऐसे में उनके पास धरने से अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है।
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