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शांत हुआ बार्डर, घर लौटे लोग
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:40 AM IST
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हीरानगर। भारत पाक अतंरराष्ट्रीय सीमा पर पिछले दिनों हुई भीषण गोलाबारी के बाद रविवार को शांति हुई। इसके बाद शिविरों में पहुंचे लोगों ने भी घरों में वापसी शुरू कर दी। उनका कहना था कि हालात जैसे भी हों घरों को लौटना उनकी मजबूरी है जिसे कोई और नहीं समझ सकता।
गदियाल शिविर में दो दिन बिताने वाली 60 वर्षीय बिशनो देवी ने बताया कि लगभग तीन दशक के बाद इस तरह का माहौल सीमा पर देखा। पहले अक्सर हल्की गोलीबारी हुआ करती थी, जिससे इतना नुकसान नहीं होता था, लेकिन इस बार पाक ने अचानक गोलाबारी की और गांवों को बड़े गोलों का शिकार बनाया।
कमल किशोर, प्रेम कुमार, तारा चंद ने बताया कि मन्यारी क्षेत्र में 30 के करीब मोर्टार के गोले गिरे। दो गोले सुबह लाईव दिखे बाकी सब इस गांव की तबाही का कारण बने। उसके बाद लोगों को यहां से निकलना पड़ा और राहत शिविर में शरण लेनी पड़ी। आज पूरा दिन शांति रही जिसके बाद वे अपने गांव लौट रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि हालात भले ही घर लौटने की इजाजत न दे, लेकिन लौटना उनकी मजबूरी है। क्योंकि आपात स्थिति में वह तो घरों से निकल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए, लेकिन मवेशी अभी भी वहीं हैं जो हमारा इंतजार कर रहे हैं। उनके चारे की व्यवस्था के लिए हमें वापस लौटना पड़ता है, साथ ही जो चैन की नींद अपने घरों में पड़ती है वो कहीं और नहीं आती। उन्हाेंने कहा कि हर हाल में अपने घरों में लौटना उनकी मजबूरी है, जबकि दिल में भय का माहौल बना ही रहता है।
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गदियाल शिविर में दो दिन बिताने वाली 60 वर्षीय बिशनो देवी ने बताया कि लगभग तीन दशक के बाद इस तरह का माहौल सीमा पर देखा। पहले अक्सर हल्की गोलीबारी हुआ करती थी, जिससे इतना नुकसान नहीं होता था, लेकिन इस बार पाक ने अचानक गोलाबारी की और गांवों को बड़े गोलों का शिकार बनाया।
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कमल किशोर, प्रेम कुमार, तारा चंद ने बताया कि मन्यारी क्षेत्र में 30 के करीब मोर्टार के गोले गिरे। दो गोले सुबह लाईव दिखे बाकी सब इस गांव की तबाही का कारण बने। उसके बाद लोगों को यहां से निकलना पड़ा और राहत शिविर में शरण लेनी पड़ी। आज पूरा दिन शांति रही जिसके बाद वे अपने गांव लौट रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि हालात भले ही घर लौटने की इजाजत न दे, लेकिन लौटना उनकी मजबूरी है। क्योंकि आपात स्थिति में वह तो घरों से निकल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए, लेकिन मवेशी अभी भी वहीं हैं जो हमारा इंतजार कर रहे हैं। उनके चारे की व्यवस्था के लिए हमें वापस लौटना पड़ता है, साथ ही जो चैन की नींद अपने घरों में पड़ती है वो कहीं और नहीं आती। उन्हाेंने कहा कि हर हाल में अपने घरों में लौटना उनकी मजबूरी है, जबकि दिल में भय का माहौल बना ही रहता है।
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