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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   165 ventilators sent from PM Cares for Kovid patients in Jammu and Kashmir turned out to be bad

आरटीआई में खुलासा: जम्मू-कश्मीर में कोविड मरीजों के लिए पीएम केयर्स से भेजे 165 वेंटिलेटर निकले खराब, मरीजों को नहीं मिला लाभ

Tue, 09 Nov 2021 01:55 AM IST
विमल शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 09 Nov 2021 01:55 AM IST
सार

पीएम केयर्स के तहत श्रीनगर के एसएमएचएस और अन्य दूसरे चिकित्सा संस्थानों को कोरोना के मरीजों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए गए थे। तकनीकी स्तर पर क्षमता में खरा न उतरने पर इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाया। इसका खुलासा आरटीआई के जवाब से हुआ। 

 

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165 ventilators sent from PM Cares for Kovid patients in Jammu and Kashmir turned out to be bad
वेंटिलेटर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोविड की दूसरी लहर के दौरान पीएम केयर्स के तहत श्रीनगर के एसएमएचएस और अन्य दूसरे चिकित्सा संस्थानों को भेजे गए सभी 165 वेंटिलेटर खराब पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि उच्च क्षमता वेंटिलेटर न होने की वजह से मरीजों को इनका लाभ नहीं मिला पाया और अधिकांश वापस भेजे गए। इसका खुलासा सरकारी मेडिकल कालेज श्रीनगर के जन सूचना अधिकारी की ओर से एक आरटीआई के जवाब में हुआ है। वहीं, जम्मू-कश्मीर चिकित्सा आपूर्ति निगम का कहना है कि आपात स्थिति को देखते हुए ज्यादा संख्या में भेजे गए यह वेंटिलेटर लो एंड के थे, जिनमें सीमित सुविधाएं होती हैं।

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कंप्रेशर और हीट अप की समस्या होने के कारण बंद हुए वेंटिलेटर
आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया गया है कि एनेथीसियालोजी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, जीएमसी श्रीनगर ने पीएम केयर फंड के तहत चिकित्सा अधीक्षक एसएमएचएस अस्पताल के माध्यम से वेंटिलेटर हासिल किए। इसमें भारत वेंटिलेटर की ओर से 37 वेंटिलेटर को एसएमएचएस अस्पताल में ट्रायल रन पर लिया गया। लेकिन इन वेंटिलेटर में कंप्रेशर और हीट अप की समस्या होने के कारण ये बंद हो गए। ये सभी वेंटिलेटर चिकित्सा देखभाल प्रबंधन के लायक नहीं थे, जिससे इन वेंटिलेटर को वापस भेज दिया गया। इसी तरह एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर के तीन वेंटिलेटर भी तकनीकी स्तर पर खराब पाए गए। ये पूर्ण रूप से प्रदर्शन नहीं कर सके। इनमें टिडाल वाल्यूम को भी सृजित करने में समस्या आई।
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मरीजों की जान को बना रहता था खतरा

इसके अलावा दमन-3 के 125 वेंटिलेटर डीआरडीओ अस्पताल खोनमोह श्रीनगर में भेजे गए, इसमें 2 वेंटिलेटर एसएमएचएस अस्पताल में लाए गए। लेकिन सभी वेंटिलेटर में तकनीकी खराबी आई। ये टिडाल वाल्यूम सृजित नहीं कर सके। इन वेंटिलेटर से मरीज को फ्लो 2 नहीं दिया जा सका। ये वेंटिलेटर आटोमेटिक बंद हो जाते थे, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता था। अगवा वेंटिलेटर की ओर से अन्य 22 वेंटिलेटर अंडर ट्रायल हैं। जवाब में वेंटिलेटर प्रबंधन के लिए श्रम शक्ति में नर्सिंग अर्दली, सेनेटरी कर्मियों की कमी बताई गई है।

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लो एंड के वेंटिलेटर में होती हैं सीमित सुविधाएं

वेंटिलेटर के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सामाजिक कार्यकर्ता बलविंदर सिंह की ओर से आरटीआई दी गई थी। वहीं, जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के एमडी डॉ. यशपाल शर्मा का कहना है कि कोविड के दौरान पीएम केयर फंड के तहत लो एंड के वेंटिलेटर भी भेजे गए थे, जबकि हाई एंड के वेंटिलेटर में सभी सुविधाएं होती हैं। लो एंड के वेंटिलेटर में सीमित सुविधाएं होती हैं। इनमें हाई फ्लो आक्सीजन सहित अन्य सुविधाएं शामिल थीं।



पीएम केयर्स फंड में सबसे बड़ी ठगी: महबूबा 
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पीएम केयर्स फंड को भ्रष्टाचार का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम केयर फंड के तहत जम्मू-कश्मीर में लाए गए घटिया स्तर के वेंटिलेटर से भ्रष्टाचार सामने आया है। ऐसे वेंटिलेटर न सिर्फ कश्मीर में खराब पाए गए, बल्कि गुजरात में भी ऐसे मामले आए हैं। सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं।

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