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पिता और सौतेली मां की हत्या का आरोपी बेटा रिहा
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जम्मू। पिता और सौतेली मां की हत्या के आरोप में ट्रायल काट रहे आरोपी बेटे को कोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में सबूतों के अभाव में यह आदेश दिया है। मामला 2019 का है। पंजाब के पठानकोट सुजानपुर के रहने वाले मंदीप शर्मा उर्फ मनी बाबा पर पिता इंद्रजीत शर्मा और सौतेली मां की हत्या का केस है।
कठुआ के प्रिंसिपल सेशन जज संजीव गुप्ता ने सोमवार को मामले पर सुनवाई की। जज ने कहा कि मुझे यह ऐसे कहते हुए बहुत ही दुख है और गुस्सा भी है कि इस तरह की हिंसक वारदात में सबूतों के अभाव में आरोपी को रिहा करना पड़ रहा है। जिसमें मृतकों को न्याय नहीं मिला। आरोपी को सजा नहीं मिली। प्रासीक्यूशन के केस में सबूतों में कई छेद हैं। आखिरकार यह कोर्ट है और कोर्ट सबूत मांगता है। प्रासीक्यूशन केस को साबित करने में फेल हुआ है। जिसका आरोपी को लाभ मिल रहा है। इसलिए प्रासीक्यूशन के केस को रदद किया जाता है और आरोपी को रिहा किया जाता है।
क्या था मामला
मृतक इंद्रजीत एमईएस विभाग में कार्यरत थे और 2010 में रिटायर हुए। उनकी पहली पत्नी पदमावती का 2005 में देहांत हो गया था। पहली पत्नी से इंद्रजीत के तीन बच्चे (दो लड़के और एक लड़की) हैं। इनमें सबसे बड़े बेटे संदीप शर्मा की 23 साल की उम्र में 1998 में मौत हो गई। आरोपी मंदीप और बहन राधिका की 2005 में 2 मई और 5 मई को शादी हो गई। दोनों बच्चों की शादी के दो महीने के बाद ही इंद्रजीत ने काजल नाम की महिला से शादी कर ली। वर्ष 2006 में आरोपी मंदीप के घर बेटी हुई और पिता के घर एक हफ्ते के बाद बेटे ने जन्म लिया। मंदीप को उसके रिश्तेदार चिड़ाने लगे। 2010 में दोबारा पिता ने एक और बेटे को जन्म दिया। तब भी उसे रिश्तेदारों ने चिड़ाया। कुछ देर के बाद इंद्रजीत की पत्नी मौत हो गई। कुछ देर के बाद इंद्रजीत ने एक विकलांग महिला पोली देवी के साथ शादी कर ली। एक दिन इंद्रजीत और मंदीप की संपत्ति को लेकर आपस में तीखी बहस हुई और इसके बाद मारपीट हुई। मंदीप ने इंद्रजीत और पोली देवी की हत्या कर दी।
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कठुआ के प्रिंसिपल सेशन जज संजीव गुप्ता ने सोमवार को मामले पर सुनवाई की। जज ने कहा कि मुझे यह ऐसे कहते हुए बहुत ही दुख है और गुस्सा भी है कि इस तरह की हिंसक वारदात में सबूतों के अभाव में आरोपी को रिहा करना पड़ रहा है। जिसमें मृतकों को न्याय नहीं मिला। आरोपी को सजा नहीं मिली। प्रासीक्यूशन के केस में सबूतों में कई छेद हैं। आखिरकार यह कोर्ट है और कोर्ट सबूत मांगता है। प्रासीक्यूशन केस को साबित करने में फेल हुआ है। जिसका आरोपी को लाभ मिल रहा है। इसलिए प्रासीक्यूशन के केस को रदद किया जाता है और आरोपी को रिहा किया जाता है।
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क्या था मामला
मृतक इंद्रजीत एमईएस विभाग में कार्यरत थे और 2010 में रिटायर हुए। उनकी पहली पत्नी पदमावती का 2005 में देहांत हो गया था। पहली पत्नी से इंद्रजीत के तीन बच्चे (दो लड़के और एक लड़की) हैं। इनमें सबसे बड़े बेटे संदीप शर्मा की 23 साल की उम्र में 1998 में मौत हो गई। आरोपी मंदीप और बहन राधिका की 2005 में 2 मई और 5 मई को शादी हो गई। दोनों बच्चों की शादी के दो महीने के बाद ही इंद्रजीत ने काजल नाम की महिला से शादी कर ली। वर्ष 2006 में आरोपी मंदीप के घर बेटी हुई और पिता के घर एक हफ्ते के बाद बेटे ने जन्म लिया। मंदीप को उसके रिश्तेदार चिड़ाने लगे। 2010 में दोबारा पिता ने एक और बेटे को जन्म दिया। तब भी उसे रिश्तेदारों ने चिड़ाया। कुछ देर के बाद इंद्रजीत की पत्नी मौत हो गई। कुछ देर के बाद इंद्रजीत ने एक विकलांग महिला पोली देवी के साथ शादी कर ली। एक दिन इंद्रजीत और मंदीप की संपत्ति को लेकर आपस में तीखी बहस हुई और इसके बाद मारपीट हुई। मंदीप ने इंद्रजीत और पोली देवी की हत्या कर दी।
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