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पास्को आरोपी की अर्जी रद्द
Updated Sat, 20 Oct 2018 01:24 AM IST
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जम्मू। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद चटर्जी कौल ने पॉक्सोे एक्ट के तहत पकड़े गए आरोपी दुर्गा किशन की जमानत की अर्जी को रद्द कर दिया।
पुलिस केस के अनुसार दुर्गा किशन के खिलाफ आरोप है कि 26 अगस्त को शाम पौने आठ बजे शिकायतकर्ता अपनी सात वर्ष की बेटी के साथ बाजार से सामान खरीदने के लिए निकला था। नगरोटा स्थित विस्थापित कालोनी मेें वह आरोपी से मिला। आरोपी ने शिकायतकर्ता की बेटी को गोद में लिया। कुछ ही मिनटों के बाद लड़की रोने लगी। लड़की ने बताया कि आरोपी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर हाथ डाला है। वह टाफी देने के बहाने लड़की को दुकान पर ले गया। दो तीन बार प्राइवेट पार्ट पर हाथ डालने की रिपोर्ट नगरोटा पुलिस ने दर्ज कर ली। उसके खिलाफ 376 आरपीसी और पॉक्सोे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोप काफी गंभीर है और किसी को भी समाज या एक वर्ग के साथ खेलने की अनुमति नहीं है। ऐसी हरकतें सामान्य व्यक्ति को अपराधी बनने के लिए उत्सुक करती हैं। ऐसे हालातों में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट की जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज में न्याय प्रदान करे। लोगों को न्यायपालिका पर पूर विश्वास है। अगर आरोपी को जमानत दी गई तो वह कहीं भी फरार हो सकता है। केस की जांच को प्रभावित कर सकता है। उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और जमानत की अर्जी को रद्द कर दिया। जेएनएफ
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पुलिस केस के अनुसार दुर्गा किशन के खिलाफ आरोप है कि 26 अगस्त को शाम पौने आठ बजे शिकायतकर्ता अपनी सात वर्ष की बेटी के साथ बाजार से सामान खरीदने के लिए निकला था। नगरोटा स्थित विस्थापित कालोनी मेें वह आरोपी से मिला। आरोपी ने शिकायतकर्ता की बेटी को गोद में लिया। कुछ ही मिनटों के बाद लड़की रोने लगी। लड़की ने बताया कि आरोपी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर हाथ डाला है। वह टाफी देने के बहाने लड़की को दुकान पर ले गया। दो तीन बार प्राइवेट पार्ट पर हाथ डालने की रिपोर्ट नगरोटा पुलिस ने दर्ज कर ली। उसके खिलाफ 376 आरपीसी और पॉक्सोे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोप काफी गंभीर है और किसी को भी समाज या एक वर्ग के साथ खेलने की अनुमति नहीं है। ऐसी हरकतें सामान्य व्यक्ति को अपराधी बनने के लिए उत्सुक करती हैं। ऐसे हालातों में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट की जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज में न्याय प्रदान करे। लोगों को न्यायपालिका पर पूर विश्वास है। अगर आरोपी को जमानत दी गई तो वह कहीं भी फरार हो सकता है। केस की जांच को प्रभावित कर सकता है। उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और जमानत की अर्जी को रद्द कर दिया। जेएनएफ