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सेहरा पहनने की तैयारी थी, ओढ़ना पड़ा कफन
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सांबा। शादी की खुशी ऐसी होती है कि दुनिया का हर गम भुला देती है। बड़ेयाल का रहने वाला गोपी शर्मा पांच माह पहले सड़क हादसे में अपनी मां की हुई मौत के सदमे से बमुश्किल उबर पाया था। अब वह अपनी नई दुनिया बसाने की खुशी में मशगूल था। यों कहें कि उसका गम भुलाने के लिए रिश्तेदारों ने शादी कराने की योजना बनाई। लेकिन उसे सेहरा नहीं, कफन ओढ़ना पड़ा। वह भी तब, जब वह अपनी होने वाली दुल्हन को अंगूठी पहना कर लौट रहा था।
जिले के घगवाल के निकटवर्ती गांव बडेयाल का परिवार अपने गोपी की मंगनी (रिंग सेरेमनी) के लिए खुशी-खुशी डोडा के लिए रवाना हुए थे। सब कुछ ठीकठाक रहा। दुल्हन को अंगूठी पहना कर मंगनी पक्की हो गई। जल्द ही दोनों तरफ के परिवार बैठकर शादी का दिन पक्का करने वाले थे। गोपी उसके बड़े भाई आशा राम और भाभी रेणू शर्मा बड़ी-बड़ी आस के साथ घर लौट रहे थे। रास्ते में शादी के लिए प्लान बना रहे थे। लेकिन कुदरत का कुछ और ही प्लान था। किसी को क्या पता था, जिस युवक की मंगनी कर लौट रहे हैं, घर उसकी लाश पहुंचेगी। लंबा सफर कर जब घर के करीब पहुंचने वाले थे तो वह ओमनी वैन जतवाल में संदबडी हाईवे पर सेना के वाहन से जा भिड़ी, जिसमें गोपी और उसके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार सवार थे। एक झटके में गोपी काल के गाल में समा गया। परिवार और रिश्तेदार के अरमान वहीं बिखर गए। सड़क पर चीत्कार गूंजने गली।
पांच माह पहले ही सड़क हादसे में हुई थी मां की मौत
सनूरा के पूर्व सरपंच कुलभूषण जसरोटिया ने बताया कि जिस गोपी की मां की मौत भी पांच महीने पहले सड़क हादसे में ही हुई थी। पिता का पांच वर्ष पहले देहांत हो गया था। हादसे में मारे गए गोपी के चचेरे भाई हर्षवर्द्धन के पिता पुलिस में थे। उन्हें कश्मीर में आतंकियों ने शहीद कर दिया था। तीसरी मृतका सुनीता रानी भी गोपी की रिश्तेदार ही थी। उसी ने गोपी का रिश्ता तय करवाया था। घायल आशा राम गोपी का बड़ा भाई है। उसकी हालत भी नाजुक बनी हुई है। उसे अमृतसर ले जाया गया है। इस तरह पल भर में परिवार उजड़ जाने से बडेयाल गांव में मंगलवार को पूरा दिन मातमी सन्नाटा पसरा रहा। गोपी का घर ही बर्बाद हो गया। घर को संभालने वाला भी कोई नहीं था।
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हर्षवर्द्धन के छोटे भाई ने दी मुखाग्नि
दो चचेरे भाइयों की अर्थी जब एक साथ घर से निकली तो जैसे पूरा गांव कराह उठा। हर तरफ सिसकियां ही सिसकियां। अंतिम यात्रा में पूरे गांव के लोग उमड़ पड़े थे। हर्षवर्द्धन के छोटे भाई ने अपने दोनों भाइयों को मुखाग्नि दी। परिवार के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल था।
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जिले के घगवाल के निकटवर्ती गांव बडेयाल का परिवार अपने गोपी की मंगनी (रिंग सेरेमनी) के लिए खुशी-खुशी डोडा के लिए रवाना हुए थे। सब कुछ ठीकठाक रहा। दुल्हन को अंगूठी पहना कर मंगनी पक्की हो गई। जल्द ही दोनों तरफ के परिवार बैठकर शादी का दिन पक्का करने वाले थे। गोपी उसके बड़े भाई आशा राम और भाभी रेणू शर्मा बड़ी-बड़ी आस के साथ घर लौट रहे थे। रास्ते में शादी के लिए प्लान बना रहे थे। लेकिन कुदरत का कुछ और ही प्लान था। किसी को क्या पता था, जिस युवक की मंगनी कर लौट रहे हैं, घर उसकी लाश पहुंचेगी। लंबा सफर कर जब घर के करीब पहुंचने वाले थे तो वह ओमनी वैन जतवाल में संदबडी हाईवे पर सेना के वाहन से जा भिड़ी, जिसमें गोपी और उसके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार सवार थे। एक झटके में गोपी काल के गाल में समा गया। परिवार और रिश्तेदार के अरमान वहीं बिखर गए। सड़क पर चीत्कार गूंजने गली।
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पांच माह पहले ही सड़क हादसे में हुई थी मां की मौत
सनूरा के पूर्व सरपंच कुलभूषण जसरोटिया ने बताया कि जिस गोपी की मां की मौत भी पांच महीने पहले सड़क हादसे में ही हुई थी। पिता का पांच वर्ष पहले देहांत हो गया था। हादसे में मारे गए गोपी के चचेरे भाई हर्षवर्द्धन के पिता पुलिस में थे। उन्हें कश्मीर में आतंकियों ने शहीद कर दिया था। तीसरी मृतका सुनीता रानी भी गोपी की रिश्तेदार ही थी। उसी ने गोपी का रिश्ता तय करवाया था। घायल आशा राम गोपी का बड़ा भाई है। उसकी हालत भी नाजुक बनी हुई है। उसे अमृतसर ले जाया गया है। इस तरह पल भर में परिवार उजड़ जाने से बडेयाल गांव में मंगलवार को पूरा दिन मातमी सन्नाटा पसरा रहा। गोपी का घर ही बर्बाद हो गया। घर को संभालने वाला भी कोई नहीं था।
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हर्षवर्द्धन के छोटे भाई ने दी मुखाग्नि
दो चचेरे भाइयों की अर्थी जब एक साथ घर से निकली तो जैसे पूरा गांव कराह उठा। हर तरफ सिसकियां ही सिसकियां। अंतिम यात्रा में पूरे गांव के लोग उमड़ पड़े थे। हर्षवर्द्धन के छोटे भाई ने अपने दोनों भाइयों को मुखाग्नि दी। परिवार के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल था।