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धान की रोपाई के लिए दूसरे राज्यों से पहुंचने लगे श्रमिक
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अरनिया। भले ही इस बार खुश्क मौसम की मार झेल रहे किसान ने अभी तक धान की रोपाई का कार्य शुरू नहीं किया हो, मगर समय के हिसाब से हर वर्ष दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों का सिलसिला शुरू हो चुका है।
हालांकि हर वर्ष की तरह इस बार किसानों ने धान रोपाई के लिए फोन पर संपर्क करके नहीं बुलाया है, मगर फिर भी काम की आस लेकर यह श्रमिक क्षेत्र में पहुंचने शुरू हो चुके हैं। अमी चन्द, बबली चौधरी, बैसाखी राम, गुरिंदर सिंह, प्यार चंद और वीर सिंह आदि किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की बेरुखी से भले ही धान की रोपाई का कार्य कुछ दिन बाद शुरू होगा मगर दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों का यहां पहुंचना शुरू हो चुका है। अभी तक करीब अस्सी श्रमिक क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जो दिन भर काम की तलाश में जुटे रहते हैं।
बताते चलें कि कस्बा सहित अला व साथ लगते अन्य गांवों के किसान धान की रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कूल कलां व कूल खुर्द आदि गांवों के किसान पर्याप्त सिंचाई मिलने से करीब सत्तर प्रतिशत रोपाई का कार्य समाप्त कर चुके हैं। इसी तरह क्षेत्र के सीमावर्ती हल्के में नहरों की पूर्ति अभी तक पूरी तरह ठप रहने से धान की पनीरी की रोपाई भी नहीं कर सके।
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हालांकि हर वर्ष की तरह इस बार किसानों ने धान रोपाई के लिए फोन पर संपर्क करके नहीं बुलाया है, मगर फिर भी काम की आस लेकर यह श्रमिक क्षेत्र में पहुंचने शुरू हो चुके हैं। अमी चन्द, बबली चौधरी, बैसाखी राम, गुरिंदर सिंह, प्यार चंद और वीर सिंह आदि किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की बेरुखी से भले ही धान की रोपाई का कार्य कुछ दिन बाद शुरू होगा मगर दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों का यहां पहुंचना शुरू हो चुका है। अभी तक करीब अस्सी श्रमिक क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जो दिन भर काम की तलाश में जुटे रहते हैं।
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बताते चलें कि कस्बा सहित अला व साथ लगते अन्य गांवों के किसान धान की रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कूल कलां व कूल खुर्द आदि गांवों के किसान पर्याप्त सिंचाई मिलने से करीब सत्तर प्रतिशत रोपाई का कार्य समाप्त कर चुके हैं। इसी तरह क्षेत्र के सीमावर्ती हल्के में नहरों की पूर्ति अभी तक पूरी तरह ठप रहने से धान की पनीरी की रोपाई भी नहीं कर सके।
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