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विकास को गति देने के लिए हस्तक्षेप करें पीएम : राज्यपाल
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जम्मू। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य में विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि यह राज्य की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए जरूरी है।
नीति आयोग की बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य में विकास प्रक्रिया को और गति देने की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया। राज्यपाल व राष्ट्रपति शासन के दौरान की उपलब्धियों का ब्योरा रखते हुए कहा कि पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराए गए। यह लोगों के सशक्तीकरण का माध्यम है। सात साल बाद बहिष्कार और धमकियों के बावजूद नवंबर- दिसंबर में शहरी निकाय चुनाव हुए। बिना किसी नुकसान के 74 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य सरकार ने पंचायतों को मजबूत करने और उन्हें अधिक अधिकार दिए जाने के लिए जम्मू और कश्मीर पंचायती राज अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए हैं। इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 20 से 27 जून तक एक सप्ताह का बैक टू द विलेज कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सभी राजपत्रित अधिकारी दो दिनों के लिए पंचायत में रहेंगे। वे पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़ेंगे, देखेंगे कि कैसे सरकारी सेवाओं को पहुंचाया जा रहा है और स्थानीय जरूरतों को समझेंगें। चारों ओर उत्साह हमें आशा देता है कि राज्य में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के लिए भविष्य उज्ज्वल है।
राज्यपाल ने कहा कि जम्मू से श्रीनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ी असुविधा का स्रोत रहा है। व्यवधान को दूर करने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को साइट पर पूरे समय रहना आवश्यक है ताकि घाटी और लद्दाख के लिए हर समय कनेक्टिविटी सुनिश्चित किया जा सके। श्रीनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाया जाना चाहिए।
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राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी विकास जरूरतों के लिए केंद्र पर बहुत कुछ निर्भर करता है। 80 हजार करोड़ रुपये का पीएमडीपी राज्य के लिए वरदान रहा है। पिछले एक साल में पीएमडीपी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अभूतपूर्व तेजी आई है। सड़कें, पुल, फ्लाईओवर, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और कौशल व आजीविका कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इससे लोगों के बीच उम्मीद की एक किरण जगी है।
एसडीआरएफ मानदंडों को बनाया जाए लचीला
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में इस वर्ष अच्छी बर्फ बारी हुई है। इसके साथ ही लगातार बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ के मानदंडों में लचीलेपन की जरूरत है ताकि उपकरणों के लिए 10 प्रतिशत से अधिक धनराशि का उपयोग किया जा सके। जेएंडके को अधिक संख्या में बर्फ निकासी और बाढ़ राहत उपकरण की आवश्यकता होती है। भारत सरकार से मनरेगा प्राप्तियों का भारी भरकम बकाया है जो व्यवस्था में तनाव पैदा कर रहा है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में एक विशेष व्यवस्था थी, जिसके द्वारा भूमि अधिग्रहण लागत को पीएमजीएसवाई परियोजनाओं में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर चाहता है कि उसे जारी रखा जाए। कृषि और बागवानी क्षेत्र पर कहा कि राज्य में किसान की आय को दोगुना करने के लिए बागवानी और पशुपालन पर ध्यान केंद्रित करके प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने हॉर्टिकल्चर, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए अधिक से अधिक केंद्रीय सहायता मांगी।
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नीति आयोग की बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य में विकास प्रक्रिया को और गति देने की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया। राज्यपाल व राष्ट्रपति शासन के दौरान की उपलब्धियों का ब्योरा रखते हुए कहा कि पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराए गए। यह लोगों के सशक्तीकरण का माध्यम है। सात साल बाद बहिष्कार और धमकियों के बावजूद नवंबर- दिसंबर में शहरी निकाय चुनाव हुए। बिना किसी नुकसान के 74 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य सरकार ने पंचायतों को मजबूत करने और उन्हें अधिक अधिकार दिए जाने के लिए जम्मू और कश्मीर पंचायती राज अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए हैं। इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 20 से 27 जून तक एक सप्ताह का बैक टू द विलेज कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सभी राजपत्रित अधिकारी दो दिनों के लिए पंचायत में रहेंगे। वे पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़ेंगे, देखेंगे कि कैसे सरकारी सेवाओं को पहुंचाया जा रहा है और स्थानीय जरूरतों को समझेंगें। चारों ओर उत्साह हमें आशा देता है कि राज्य में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के लिए भविष्य उज्ज्वल है।
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राज्यपाल ने कहा कि जम्मू से श्रीनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ी असुविधा का स्रोत रहा है। व्यवधान को दूर करने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को साइट पर पूरे समय रहना आवश्यक है ताकि घाटी और लद्दाख के लिए हर समय कनेक्टिविटी सुनिश्चित किया जा सके। श्रीनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाया जाना चाहिए।
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राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी विकास जरूरतों के लिए केंद्र पर बहुत कुछ निर्भर करता है। 80 हजार करोड़ रुपये का पीएमडीपी राज्य के लिए वरदान रहा है। पिछले एक साल में पीएमडीपी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अभूतपूर्व तेजी आई है। सड़कें, पुल, फ्लाईओवर, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और कौशल व आजीविका कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इससे लोगों के बीच उम्मीद की एक किरण जगी है।
एसडीआरएफ मानदंडों को बनाया जाए लचीला
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में इस वर्ष अच्छी बर्फ बारी हुई है। इसके साथ ही लगातार बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ के मानदंडों में लचीलेपन की जरूरत है ताकि उपकरणों के लिए 10 प्रतिशत से अधिक धनराशि का उपयोग किया जा सके। जेएंडके को अधिक संख्या में बर्फ निकासी और बाढ़ राहत उपकरण की आवश्यकता होती है। भारत सरकार से मनरेगा प्राप्तियों का भारी भरकम बकाया है जो व्यवस्था में तनाव पैदा कर रहा है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में एक विशेष व्यवस्था थी, जिसके द्वारा भूमि अधिग्रहण लागत को पीएमजीएसवाई परियोजनाओं में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर चाहता है कि उसे जारी रखा जाए। कृषि और बागवानी क्षेत्र पर कहा कि राज्य में किसान की आय को दोगुना करने के लिए बागवानी और पशुपालन पर ध्यान केंद्रित करके प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने हॉर्टिकल्चर, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए अधिक से अधिक केंद्रीय सहायता मांगी।