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बेरोजगार आंदोलन के शहीद को दी श्रद्धांजलि
Updated Mon, 03 Dec 2018 01:27 AM IST
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पुंछ। नगर स्थित डिग्री कालेज में बनाए गए 1978 के बेरोजगार आंदोलन के शहीद वरयाम सिंह को उनके 40वें शहीद दिवस पर याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद पीडीपी के एमएलसी यशपाल शर्मा ने वरयाम सिंह की अगली बरसी से पहले स्मारक पर उनकी प्रतिमा स्थापित करवाने का आश्वासन दिया।
रविवार को डिग्री कालेज में बनाए गए 1978 के बेरोजगार आंदोलन के शहीद वरयाम सिंह के स्मारक पर गुरु रामदास सेवा सोसाइटी और शहीद के परिजनों की तरफ से श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सोसाइटी के प्रधान अनमोल सिंह, सचिव बलबीर सिंह, शहीद की बहन दीश कौर और भांजे गगनदीप सिंह ने की। एमएलसी यशपाल शर्मा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद बेरोजगार आंदोलन में अग्रिम भूमिका निभाने वाले एडवोकेट मोहम्मद जमान, संजय रैना, नरेश कुमार आदि ने बताया कि उस आंदोलन में डिग्री कालेज के गेट के बाहर आंदोलनकारी बेरोजगारों पर गोली चलाई गई, जिसमें 21 वर्ष के वरयाम सिंह शहीद हो गए। उनकी शहादत के बाद करीब एक वर्ष तक चले आंदोलन से जिले के करीब 2000 बेरोजगारों को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुईं।
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इस अवसर पर एमएलसी यशपाल शर्मा, जो उस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने वरयाम सिंह को याद करते हुए कहा कि 1978 में पुंछ से शुरू हुआ बेरोजगार आंदोलन जम्मू प्रांत में कठुआ तक पहुंच गया था। तत्कालीन शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेकां सरकार को बेरोजगारों के आगे झुकना पड़ा था। उस आंदोलन में वरयाम सिंह ने पहली शहादत 2 दिसंबर 1978 को दी। इसके बाद 5 जनवरी 1989 को सात और लोगों की शहादत हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फिर से बेराजगारी बढ़ रही है। ऐसे में रियासत के युवाओं को भी वरयाम सिंह से प्रेरणा लेते हुए फिर से एक नया आंदोलन शुरू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 1978 का आंदोलन इतना मजबूत हो गया था कि दो साल तक सरकार का कोई मंत्री या विधायक जिले में घुसने की हिम्मत तक नहीं कर पाया था। इतना ही नहीं लोगों ने पुलिस तक को नगर से बाहर खदेड़ दिया था।
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रविवार को डिग्री कालेज में बनाए गए 1978 के बेरोजगार आंदोलन के शहीद वरयाम सिंह के स्मारक पर गुरु रामदास सेवा सोसाइटी और शहीद के परिजनों की तरफ से श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सोसाइटी के प्रधान अनमोल सिंह, सचिव बलबीर सिंह, शहीद की बहन दीश कौर और भांजे गगनदीप सिंह ने की। एमएलसी यशपाल शर्मा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।
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श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद बेरोजगार आंदोलन में अग्रिम भूमिका निभाने वाले एडवोकेट मोहम्मद जमान, संजय रैना, नरेश कुमार आदि ने बताया कि उस आंदोलन में डिग्री कालेज के गेट के बाहर आंदोलनकारी बेरोजगारों पर गोली चलाई गई, जिसमें 21 वर्ष के वरयाम सिंह शहीद हो गए। उनकी शहादत के बाद करीब एक वर्ष तक चले आंदोलन से जिले के करीब 2000 बेरोजगारों को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुईं।
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इस अवसर पर एमएलसी यशपाल शर्मा, जो उस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने वरयाम सिंह को याद करते हुए कहा कि 1978 में पुंछ से शुरू हुआ बेरोजगार आंदोलन जम्मू प्रांत में कठुआ तक पहुंच गया था। तत्कालीन शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेकां सरकार को बेरोजगारों के आगे झुकना पड़ा था। उस आंदोलन में वरयाम सिंह ने पहली शहादत 2 दिसंबर 1978 को दी। इसके बाद 5 जनवरी 1989 को सात और लोगों की शहादत हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फिर से बेराजगारी बढ़ रही है। ऐसे में रियासत के युवाओं को भी वरयाम सिंह से प्रेरणा लेते हुए फिर से एक नया आंदोलन शुरू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 1978 का आंदोलन इतना मजबूत हो गया था कि दो साल तक सरकार का कोई मंत्री या विधायक जिले में घुसने की हिम्मत तक नहीं कर पाया था। इतना ही नहीं लोगों ने पुलिस तक को नगर से बाहर खदेड़ दिया था।