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सिर पर हनुमान की गदा पड़ते ही उतर जाता है बुखार
Updated Wed, 17 Oct 2018 04:13 PM IST
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पुंछ। जिला सनातन धर्मसभा की तरफ से हर साल की तरह इन दिनों नगर में गीता भवन से हर दिन शाम को शरद नवरात्र के उपलक्ष्य पर राम भक्त हनुमान की झांकी निकाली जाती है। हर कोई हनुमान की गदा से अपने सिर पर प्रहार करवा कर आशीर्वाद प्राप्त करने को तत्पर रहता है। ऐसी मान्यता है कि सिर पर हनुमान की गदा पड़ते ही बुखार दूर हो जाता है और अन्य क्लेश भी दूर होते हैं। झांकी का सभी समुदायों के लोग स्वागत करते हैं। हनुमान को जहां लोग अपने घरों में आमंत्रित कर उन्हें दूध, फल और मिठाइयों का भोग लगाते हैं। बाजार से जब झांकी निकलती है तो दुकानदार भी राम भक्त हनुमान को मिठाइयां, फल आदि भेंट करते हैं, जिसे हनुमान अपने पीछे चलती बच्चों की टोली को देते जाते हैं।
हनुमान झांकी के बारे में जिला सनातन धर्म सभा के प्रधान सतीश सासन और नगर के कई बुजुर्गों का ने बताया कि पुलस्त नगरी में हनुमान की झांकी निकालने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि पुलस्त नगरी की पवनपुत्र हनुमान हर विपदा से बचाते हैं। देश के बंटवारे के बाद से वे इसे देखते ही आ रहे हैं। हनुमान के गदा से सिर पर प्रहार करवाने के पीछे मान्यता है कि इस प्रहार के बाद बुखार नहीं आता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। नगर के कुछ बुजुर्गों का कहना है कि बदलते समय के साथ हनुमान के साथ चलने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या में कमी आ गई है। बचपन में हर दिन हनुमान के साथ 400-500 लोग चलते थे, आज उनकी संख्या 50-60 रह गई है। उस समय लोग तीन बजे ही गीता भवन पहुंच जाया करते थे कि चार बजे हनुमान की झांकी निकलेगी तो हम उसके साथ चलेंगे। तब हमारे पास मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं होता था। हनुमान का वेश धारण करने वाले युवक को कई मर्यादाओं का भी पालन करना होता है। उसे 10 दिन तक जमीन पर सोना होता है। 10 दिन तक वह दूध और फलाहार ही लेता है।
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हनुमान झांकी के बारे में जिला सनातन धर्म सभा के प्रधान सतीश सासन और नगर के कई बुजुर्गों का ने बताया कि पुलस्त नगरी में हनुमान की झांकी निकालने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि पुलस्त नगरी की पवनपुत्र हनुमान हर विपदा से बचाते हैं। देश के बंटवारे के बाद से वे इसे देखते ही आ रहे हैं। हनुमान के गदा से सिर पर प्रहार करवाने के पीछे मान्यता है कि इस प्रहार के बाद बुखार नहीं आता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। नगर के कुछ बुजुर्गों का कहना है कि बदलते समय के साथ हनुमान के साथ चलने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या में कमी आ गई है। बचपन में हर दिन हनुमान के साथ 400-500 लोग चलते थे, आज उनकी संख्या 50-60 रह गई है। उस समय लोग तीन बजे ही गीता भवन पहुंच जाया करते थे कि चार बजे हनुमान की झांकी निकलेगी तो हम उसके साथ चलेंगे। तब हमारे पास मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं होता था। हनुमान का वेश धारण करने वाले युवक को कई मर्यादाओं का भी पालन करना होता है। उसे 10 दिन तक जमीन पर सोना होता है। 10 दिन तक वह दूध और फलाहार ही लेता है।
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