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मांगों को लेकर सड़क पर उतरे एलआईसी कर्मी
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कठुआ। देशव्यापी हड़ताल के चलते कठुआ में नार्थ जोन इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के नेतृत्व में एलआईसी कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई। विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया और उन्हें जल्द पूरा करने की गुहार लगाई।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल ने कहा कि वह सरकार से पेंशन योजना 1995 के तहत पेंशन देने की मांग कर रहे हैं, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा है। एक अगस्त, 2017 से देय वेतन पर वार्ता करने की भी पहल नहीं की जा रही है। भारतीय जीवन बीमा निगम में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नई भर्ती अभी तक शुरू नहीं की है। सार्वजनिक क्षेत्र में बीमा उद्योग की हिफाजत करते हुए उसे मजबूत करने, किसानों का कर्ज माफ करने के साथ-साथ फसल का उचित दाम देने के लिए भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही।
श्रम कानूनों में कारपोरेट क्षेत्रों के हितों के लिए सरकार बार-बार संशोधन कर रही है, जिसे बंद करना चाहिए। श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने के साथ समान काम के लिए समान वेतन की नीति लागू करनी चाहिए। अगर आने वाले समय में मांगों पर गौर नहीं किया गया तो धरना-प्रदर्शन तेज कर देंगे। इस मौके पर विजय शर्मा, चरण दास, प्राण नाथ भट्ट, अश्विनी कुमार व हरजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल ने कहा कि वह सरकार से पेंशन योजना 1995 के तहत पेंशन देने की मांग कर रहे हैं, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा है। एक अगस्त, 2017 से देय वेतन पर वार्ता करने की भी पहल नहीं की जा रही है। भारतीय जीवन बीमा निगम में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नई भर्ती अभी तक शुरू नहीं की है। सार्वजनिक क्षेत्र में बीमा उद्योग की हिफाजत करते हुए उसे मजबूत करने, किसानों का कर्ज माफ करने के साथ-साथ फसल का उचित दाम देने के लिए भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही।
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श्रम कानूनों में कारपोरेट क्षेत्रों के हितों के लिए सरकार बार-बार संशोधन कर रही है, जिसे बंद करना चाहिए। श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने के साथ समान काम के लिए समान वेतन की नीति लागू करनी चाहिए। अगर आने वाले समय में मांगों पर गौर नहीं किया गया तो धरना-प्रदर्शन तेज कर देंगे। इस मौके पर विजय शर्मा, चरण दास, प्राण नाथ भट्ट, अश्विनी कुमार व हरजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।
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