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4 जून को लखनपुर से श्रीनगर तक चक्का जाम
Updated Sat, 02 Jun 2018 01:43 AM IST
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जम्मू। पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चार जून को सभी तरह के व्यवसायिक वाहन बंद रहेंगे। लखनपुर से श्रीनगर तक वाहनों का चक्का जाम रहेगा।
यह बात ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर ने शुक्रवार कोे पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ट्रांसपोर्टरों का खून चूस रही है। हर दिन पेट्रोलियम पदार्थों के रेट बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन किराया अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने कई बार सरकार से बात की और हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। पहले से ही 50 फीसदी वाहन सड़कों पर खड़े हैं। अब जो बचे हैं, वो इस काबिल नहीं कि सड़कों पर चल सकें। वह कब से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री से भी इसे लेकर बातचीत की गई, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए अब उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। 4 जून को एक दिन की हड़ताल की जाएगी। इसमेें सभी तरह के व्यवसायिक वाहन बंद रहेंगे। लखनपुर से श्रीनगर तक 70 हजार वाहनों के पहिए थमे रहेंगे।
वजीर ने यह भी कहा कि वाहनों के परमिट लेने, फिटनेस कराने, वाहन ट्रांसफर कराने में आरटीओ कार्यालय में महीनों लग जाते हैं। आरटीओ कार्यालय में बिना पैसों के कोई काम नहीं होता। ट्रांसपोर्टरों के प्रति आरटीओ का रवैया बहुत ही खराब है। सरकार की नीतियों ने ट्रांसपोर्टरों को तबाह कर दिया है।
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यह बात ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर ने शुक्रवार कोे पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ट्रांसपोर्टरों का खून चूस रही है। हर दिन पेट्रोलियम पदार्थों के रेट बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन किराया अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने कई बार सरकार से बात की और हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। पहले से ही 50 फीसदी वाहन सड़कों पर खड़े हैं। अब जो बचे हैं, वो इस काबिल नहीं कि सड़कों पर चल सकें। वह कब से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री से भी इसे लेकर बातचीत की गई, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए अब उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। 4 जून को एक दिन की हड़ताल की जाएगी। इसमेें सभी तरह के व्यवसायिक वाहन बंद रहेंगे। लखनपुर से श्रीनगर तक 70 हजार वाहनों के पहिए थमे रहेंगे।
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वजीर ने यह भी कहा कि वाहनों के परमिट लेने, फिटनेस कराने, वाहन ट्रांसफर कराने में आरटीओ कार्यालय में महीनों लग जाते हैं। आरटीओ कार्यालय में बिना पैसों के कोई काम नहीं होता। ट्रांसपोर्टरों के प्रति आरटीओ का रवैया बहुत ही खराब है। सरकार की नीतियों ने ट्रांसपोर्टरों को तबाह कर दिया है।
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