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परिवार को बचाने के लिए बाइक से उन्हें लेकर भागा तरसेम
Updated Wed, 23 May 2018 01:44 AM IST
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हीरानगर। बोबिया गांव में भारी गोलाबारी के बीच तरसेम सिंह अपनी पत्नी और बच्चे को बाइक पर बिठाकर जान बचाकर निकले। घर का जो सामान जहां था वहीं छोड़, मवेशियों को मरते देख उस व्यक्ति ने परिवार को जान जोखिम में डालकर बचाने का फैसला किया। कुछ दूरी पर लोगों के मिलते ही उसका दर्द छलक गया। दंपति को आंसू की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी, हर आंसू के साथ सरकार के लिए जुबां पर बद्दुआएं थीं।
तरसेम सिंह कहते हैं कि बोबिया गांव में जगह-जगह गोले गिरने के बाद आग लग चुकी है। धुआं ही धुआं हो चुका है। जान बचाकर घर में बैठे रहे, लेकिन इसी बीच एक मोर्टार आकर उनके आंगन में गिरा। धुआं छंटते ही देखा तो एक गाय की दोनों टांगे जा चुकी थी। वहीं, दो बछड़े मौत के घाट उतर चुके थे। इसके बाद बच्चों की चीखें सुनकर उससे रहा नहीं गया और गोलाबारी के बीच ही उसने बाइक स्टार्ट की और परिवार को रिश्तेदारों के यहां ले जाने की तैयारी कर ली। तरसेम ने कहा कि क्या करना ऐसी सरकार को जो लोगों के दुख-दर्द को नहीं समझ सकती। न ही आगाह किया जाता है और न ही घरों से सुरक्षित निकाला जाता है। घर में लोग मौत आने का इंतजार करते हैं और सरकार बस बैठकर तमाशा देखती है।
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तरसेम सिंह कहते हैं कि बोबिया गांव में जगह-जगह गोले गिरने के बाद आग लग चुकी है। धुआं ही धुआं हो चुका है। जान बचाकर घर में बैठे रहे, लेकिन इसी बीच एक मोर्टार आकर उनके आंगन में गिरा। धुआं छंटते ही देखा तो एक गाय की दोनों टांगे जा चुकी थी। वहीं, दो बछड़े मौत के घाट उतर चुके थे। इसके बाद बच्चों की चीखें सुनकर उससे रहा नहीं गया और गोलाबारी के बीच ही उसने बाइक स्टार्ट की और परिवार को रिश्तेदारों के यहां ले जाने की तैयारी कर ली। तरसेम ने कहा कि क्या करना ऐसी सरकार को जो लोगों के दुख-दर्द को नहीं समझ सकती। न ही आगाह किया जाता है और न ही घरों से सुरक्षित निकाला जाता है। घर में लोग मौत आने का इंतजार करते हैं और सरकार बस बैठकर तमाशा देखती है।
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