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113 करोड़ के घोटाला में फारुख अब्दुल्ला का नाम

Thu, 27 Nov 2014 01:18 AM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 01:18 AM IST
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113 crore scam in jkca

जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में हुए 113 करोड़ रुपये के घोटाले में नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला का नाम सामने आने पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनका जोरदार बचाव किया है।

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उमर ने विपक्षियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उछालकर उनके पिता और पार्टी का नाम बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि जम्मू कश्मीर-क्रिकेट एसोसिएशन में हुए करोडों रुपये की बंदरबांट में उनके पिता की कोई भूमिका नहीं थी।
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न ही पुलिस की जांच में किसी तरह से उनका नाम सामने आया है। ऐसे में फारुख अब्दुल्ला पर बेवजह के आरोप लगाना गलत है। बतातें चलें कि नेशनल पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष्ा हैं।
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क्या था मामला

113 crore scam in jkca

मामले की पूरी जानकारी के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। असल में अक्टूबर 2011 में नेशनल कान्फ्रेंस के मुखिया फारुख अब्दुल्ला को जम्‍मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। उसके बाद साल 2012 में बीसीसीआई ने घाटी में क्रिकेट के विकास और बढ़ावा देने के लिए जेकेसीए को 113 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया था।

आरोप है कि इस पैसे को क्रिकेट की भलाई में न लगाकर बंदरबांट कर दी गई और यह सब हुआ फारुख अब्दुल्ला के अध्यक्ष रहते। मामले की भनक बीसीसीआई को लगी तो उसने जेकेसीए को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा। इसके बाद मामले में कई लोगों को आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया था।

अंग्रेजी अखबार डीएनए ने इस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मामले में पुलिस ने जेकेसीए अध्यक्ष फारुख्‍ा अब्दुल्ला को भी आरोपी नंबर पांच बनाया था। उनका नाम भी उस रिपोर्ट में था।

अखबार के अनुसार 113 करोड़ रुपये की बंदरबांट के लिए जेकेसीए ने बकायदा 18 फर्जी अकाउंट खोले। जिसके बाद 50 लोगों और कंपनियों को उस पैसे से लोन दिया गया। इसके बाद किसी से भी उस पैसे की वसूली के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।

आरोपी नंबर पांच थे फारुख अब्दुल्ला

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मामले में जांच के बाद पुलिस ने एक आरोपी जम्‍मू के व्यवसायी मंजूर गजनफर को गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने जेकेसीए से मिले पैसे से अहसम अहमद मिर्जा के बिजनेश में निवेश किया।

जांच में पता चला कि मिर्जा फारुख अब्दुल्ला का खासा नजदीकी रहा है। अखबार के अनुसार आरोपियों पर धारा 406, 168, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसका नंबर 27/2012 था। इसमें फारुख अब्दुल्ला को भी आरोपी बनाया गया।

आरोप है कि जैसे ही इसमें फारुख अब्दुल्ला का नाम आया पुलिस ने मामले की जांच धीमी कर दी। यही कारण है कि जब निचली अदालत से मंजूर गजनफर को जमानत मिली तो पुलिस ने ऊपरी अदालत में इसे चुनौती नहीं दी।

क्योंकि ऐसा करने पर पुलिस को मामले में चार्जशीट पेश करनी पड़ती और ऐसे में फारुख अब्दुल्ला की मुश्किलें बढ़ सकती थी। आरोप है कि पुलिस ने तभी से मामले को ठंडे बस्ते में डालते हुए जांच धीमी कर दी।

घोटालों और राजनीति का अखाड़ा बनी जेकेसीए

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अखबार द्वारा मामला दोबारा उछालने पर उमर ने बुधवार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उमर ने मीडिया पर इसका दोष्‍ा मढ़ते हुए कहा कि उनके परिवार को बदनाम करने के लिए जानबूझकर इस मामले को उछाला जा रहा है।

पुलिस ने अपनी जांच में किसी भी तरह से फारुख अब्दुल्ला को दोषी नहीं पाया है ‌इसलिए उनका नाम इससे जोड़ना पूरी तरह गलत है। जो लोग गुनहगार थे, पुलिस उनके खिलाफ जांच कर रही है। उमर ने कहा कि जांच में कुछ नहीं पाया गया तो फारुख साहब का इसमें क्या कसूर है। उन्होंने दावा किया कि एनसी सरकार ने किसी भी आरोपी को नहीं बचाया।

न ही मामले में पुलिस पर किसी तरह का सियासी दबाव डाला गया। पुलिस ने पूरी निष्पक्ष्‍ाता से मामले की जांच की है। बताते चलें कि जम्‍मू कश्मीर में जिस संस्‍था पर रियासत में ‌क्रिकेट को बढ़ावा देने का जिम्मा है वह पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बनी हुई है।

जेकेसीए में करोडों रुपये के घोटाले का मामला तो चल ही रहा है संस्‍था में दो गुट भी बन गए हैं। जो घाटी में क्रिकेट को आगे ले जाने के बजाय पीछे खींच रहे हैं। यही कारण है कि इस बार आपसी खींचतान के कारण ही अंडर 19 और रणजी ट्राफी के कैंप यहां के बजाय दूसरे राज्यों में लगे। इसके अलावा आपसी गुटबाजी के चलते हर बार यहां होने वाले रणजी मैचों को भी दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया।

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