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बंदरों के आतंक से किसान परेशान
Updated Tue, 30 Jan 2018 01:16 AM IST
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उधमपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों के खेतों में बंदरों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। 11 कृषि जोन में 100 से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जहां बंदरों की वजह से खेती प्रभावित हो रही है। नुकसान की वजह से धीरे-धीरे किसान खेती का काम छोड़ दूसरा व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर कृषि विभाग चिंतित तो है, लेकिन बंदरों के आतंक से खेती को बचाने के लिए कुछ कर नहीं पा रहा है।
ज्यादातर ग्रामीणों की रोजी रोटी कृषि पर निर्भर है। फसल अच्छी होती है, तो किसान चैन की नींद लेते हैं। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से किसानों की नींद बंदरों ने उड़ा रखी है। करीब 15 वर्ष पहले ग्रामीण इलाकों में बंदरों ने दस्तक दी थी। शुरूआत में बंदर मामूली रूप से फसल को नुकसान पहुंचाते थे। लेकिन, जैसे-जैसे बंदरों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई वैसे-वैसे फसलों का नुकसान भी बढ़ता गया। वर्तमान में जिले के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में बंदर हैं, जो हर वर्ष किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिब, थाती, चढ़ेई, मुत्तल, नीली नाला, कुपड़, नंबल व अन्य इलाकों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कुछ किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है।
2011-12 में कृषि विभाग ने जब सर्वे कर आंकड़े एकत्र किए, तो चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में बंदरों ने 11 कृषि जोन के 100 से ज्यादा गांव में आतंक मचाकर 2145 हेक्टेयर भूमि पर लगी मक्की, गेहूं व धान की फसल को बर्बाद कर दिया था।
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ज्यादातर ग्रामीणों की रोजी रोटी कृषि पर निर्भर है। फसल अच्छी होती है, तो किसान चैन की नींद लेते हैं। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से किसानों की नींद बंदरों ने उड़ा रखी है। करीब 15 वर्ष पहले ग्रामीण इलाकों में बंदरों ने दस्तक दी थी। शुरूआत में बंदर मामूली रूप से फसल को नुकसान पहुंचाते थे। लेकिन, जैसे-जैसे बंदरों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई वैसे-वैसे फसलों का नुकसान भी बढ़ता गया। वर्तमान में जिले के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में बंदर हैं, जो हर वर्ष किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिब, थाती, चढ़ेई, मुत्तल, नीली नाला, कुपड़, नंबल व अन्य इलाकों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कुछ किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है।
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2011-12 में कृषि विभाग ने जब सर्वे कर आंकड़े एकत्र किए, तो चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में बंदरों ने 11 कृषि जोन के 100 से ज्यादा गांव में आतंक मचाकर 2145 हेक्टेयर भूमि पर लगी मक्की, गेहूं व धान की फसल को बर्बाद कर दिया था।
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